Deoghar Strike: देवघर में 10 हाईटेक साइबर ठग गिरफ्तार, Amazon और Flipkart के नाम पर उड़ाते थे लाखों, पुलिस ने बिछाया जाल
देवघर साइबर थाना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 10 शातिर ठगों को दबोचा है। फर्जी कस्टमर केयर और पीएम किसान योजना के नाम पर ठगी करने वाले इस गैंग और बरामद 15 मोबाइल की पूरी इनसाइड रिपोर्ट यहाँ देखें।
देवघर, 2 अप्रैल 2026 – झारखंड का देवघर जिला एक बार फिर साइबर अपराधियों के खिलाफ की गई बड़ी कार्रवाई का केंद्र बना है। 2 अप्रैल की सुबह पुलिस अधीक्षक के कड़े निर्देश पर साइबर थाना पुलिस ने एक साथ कई ठिकानों पर छापेमारी कर 10 शातिर साइबर ठगों को सलाखों के पीछे भेज दिया है। पुलिस उपाधीक्षक (DSP) राजा कुमार मित्रा के नेतृत्व में अंजाम दी गई इस कार्रवाई ने जामताड़ा और देवघर के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय साइबर सिंडिकेट की कमर तोड़ दी है। ये ठग इतने शातिर थे कि बड़े-बड़े ई-कॉमर्स पोर्टल्स और बैंकों के नाम पर देश भर के लोगों की गाढ़ी कमाई पर डाका डाल रहे थे।
फर्जी 'कस्टमर केयर' का मायाजाल: कैसे बिछाया गया ठगी का जाल?
पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि देवघर के कुछ ग्रामीण इलाकों में युवाओं का एक समूह संदिग्ध रूप से घंटों फोन पर सक्रिय रहता है।
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बड़ी कंपनियों का मुखौटा: जांच में खुलासा हुआ कि ये आरोपी खुद को Flipkart, Amazon, Airtel Payment Bank और अन्य प्रतिष्ठित कंपनियों के फर्जी 'कस्टमर केयर' अधिकारी बताकर लोगों को कॉल करते थे।
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गूगल का गलत इस्तेमाल: ये अपराधी गूगल सर्च इंजन पर अपना मोबाइल नंबर विभिन्न बैंक शाखाओं या हेल्पलाइन नंबरों के तौर पर अपलोड कर देते थे। जब भी कोई परेशान ग्राहक गूगल से नंबर निकालकर कॉल करता, तो वह सीधे इन ठगों के चंगुल में फंस जाता था।
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किसानों को बनाया निशाना: ठगी का एक और घिनौना चेहरा तब सामने आया जब पता चला कि ये लोग मासूम किसानों को पीएम किसान योजना के तहत मिलने वाली राशि और बैंक सुविधाओं का झांसा देकर उनके खाते खाली कर रहे थे।
15 मोबाइल और 18 सिम: क्या-क्या हुआ बरामद?
DSP राजा कुमार मित्रा ने बताया कि छापेमारी के दौरान इन आरोपियों के पास से 'साइबर हथियार' बरामद किए गए हैं।
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इलेक्ट्रॉनिक उपकरण: पुलिस ने मौके से 15 महंगे स्मार्टफोन और 18 सक्रिय सिम कार्ड जब्त किए हैं। इन सिम कार्ड्स को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लिया गया था।
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कैशबैक और गिफ्ट कार्ड का लालच: आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे SBI क्रेडिट कार्ड लिंक, कैशबैक ऑफर्स और रिवॉर्ड पॉइंट्स के नाम पर लोगों को प्रलोभन देते थे और उनके मोबाइल का एक्सेस लेकर 'रिमोट एक्सेस ऐप्स' के जरिए खाते साफ कर देते थे।
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एटीएम कार्ड: इनके पास से 4 एटीएम कार्ड भी मिले हैं, जिनका इस्तेमाल ठगी के पैसों को तुरंत निकालने के लिए किया जाता था।
देवघर और साइबर अपराध का इतिहास: 'जामताड़ा मॉडल' की परछाई
देवघर जिला पिछले एक दशक से साइबर अपराध के वैश्विक मानचित्र पर उभरा है, जहाँ 'जामताड़ा मॉडल' की तर्ज पर ठगी की जाती है।
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भौगोलिक स्थिति: देवघर और जामताड़ा की सीमाएं आपस में जुड़ी हुई हैं, जिससे अपराधियों के लिए एक जिले से दूसरे जिले में भागना आसान हो जाता है।
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तकनीकी विकास: 2022 से 2026 के बीच, यहाँ के साइबर ठगों ने अब केवल कॉल करने के बजाय फिशिंग लिंक्स और फर्जी मोबाइल ऐप्स का सहारा लेना शुरू कर दिया है।
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पुलिस की 'नई नीति': झारखंड पुलिस ने अब 'साइबर कमांडो' और अत्याधुनिक सर्विलांस सिस्टम के जरिए इन इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत की है। 2 अप्रैल की यह कार्रवाई इसी कड़ी का एक हिस्सा है।
पुलिस की अपील: सतर्कता ही बचाव है
गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब इन 10 आरोपियों से कड़ी पूछताछ कर रही है ताकि उनके अन्य साथियों और मास्टरमाइंड तक पहुँचा जा सके।
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अनजान लिंक से बचें: पुलिस ने जनता से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और न ही फोन पर अपनी ओटीपी (OTP) या बैंक डिटेल्स साझा करें।
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संदेह होने पर तुरंत रिपोर्ट: अगर आपके साथ कोई ठगी होती है, तो तुरंत 1930 डायल करें या स्थानीय साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराएं।
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सतर्क रहें: याद रखें, कोई भी बैंक या ई-कॉमर्स कंपनी फोन पर आपकी निजी जानकारी या क्रेडिट कार्ड का लिंक नहीं मांगती है।
देवघर में हुई यह कार्रवाई उन अपराधियों के लिए एक कड़ा संदेश है जो तकनीक का इस्तेमाल मासूमों को लूटने के लिए करते हैं। एसपी के निर्देश पर डीएसपी राजा कुमार मित्रा ने जिस मुस्तैदी से इस ऑपरेशन को अंजाम दिया, उससे आम जनता का पुलिस पर विश्वास बढ़ा है। बरामद 15 मोबाइल और सिम कार्ड्स अब कई और राज खोलेंगे। देवघर पुलिस का यह अभियान अब थमने वाला नहीं है, क्योंकि इनका लक्ष्य इस 'साइबर हब' के दाग को पूरी तरह धोना है। फिलहाल, सभी आरोपी जेल की हवा खा रहे हैं और मामले की गहराई से जांच जारी है।
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