LPG Gas Crisis : गैस संकट पर सरकार की 'सर्जिकल स्ट्राइक', जमाखोरों के गोदाम सील, पैनिक बुकिंग करने वालों को दी सख्त चेतावनी
मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच भारत में गहराते गैस संकट पर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने पैनिक बुकिंग और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ देशव्यापी अभियान शुरू कर दिया है। यूपी से लेकर बिहार तक छापेमारी जारी है। सरकार की इस नई रणनीति और ताजा अपडेट की पूरी जानकारी यहाँ देखें।
नई दिल्ली, 13 मार्च 2026 – मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत में रसोई गैस की किल्लत को लेकर मचे हाहाकार पर अब केंद्र सरकार ने सीधा मोर्चा संभाल लिया है। सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों और 'पैनिक बाइंग' (डर में ज्यादा खरीदारी) से बिगड़ते हालात को देखते हुए शुक्रवार को पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने देश को संबोधित किया। सरकार ने स्पष्ट किया है कि संकट गैस की कमी से ज्यादा, लोगों के बीच फैले 'डर' की वजह से है। सरकार अब उन बिचौलियों और कालाबाजारी करने वालों पर 'सर्जिकल स्ट्राइक' कर रही है जो इस आपदा में अवसर तलाश रहे हैं।
आंकड़ों का खेल: पैनिक बुकिंग ने बिगाड़ा गणित
प्रेस कॉन्फ्रेंस में जो आंकड़े सामने आए, वे चौंकाने वाले हैं। सरकार के अनुसार, देश में गैस की सप्लाई चैन को पैनिक बुकिंग ने ओवरलोड कर दिया है।
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अचानक बढ़ा दबाव: आम दिनों में देशभर में रोजाना औसतन 50-55 लाख सिलेंडर बुक होते हैं। लेकिन युद्ध की अफवाहों के चलते यह आंकड़ा उछलकर 75-76 लाख तक पहुँच गया है।
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जरूरत से ज्यादा स्टॉक: लोग डर के मारे अपने खाली सिलेंडरों को समय से पहले ही भरवाने की होड़ में लग गए हैं, जिससे जरूरतमंदों तक सप्लाई पहुँचने में देरी हो रही है।
जमाखोरों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस'
गैस संकट का फायदा उठाने वालों के खिलाफ सरकार ने पूरे देश में पुलिस और प्रशासन को खुली छूट दे दी है।
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गोदाम सील: उत्तर प्रदेश के हापुड़ में अवैध भंडारण की शिकायत पर एक बड़े डिस्ट्रीब्यूटर का गोदाम सील कर दिया गया है।
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चोरी के ट्रक बरामद: झांसी में पुलिस ने गैस सिलेंडरों से भरा एक चोरी हुआ ट्रक बरामद कर बड़ी साजिश को नाकाम किया है।
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देशव्यापी छापेमारी: कर्नाटक, मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी अवैध रूप से छिपाए गए सिलेंडरों को बरामद करने के लिए छापेमारी जारी है। जिलाधिकारियों (DM) को निर्देश दिए गए हैं कि जमाखोरी मिलने पर सीधे जेल भेजें।
युद्ध और भारत की 'फ्यूल सिक्योरिटी' का संघर्ष
भारत का इतिहास रहा है कि जब भी खाड़ी देशों (Middle East) में युद्ध की स्थिति बनी है, घरेलू बाजार में ईंधन को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है।
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1990 का खाड़ी युद्ध: उस समय भी भारत ने बड़े पैमाने पर ऊर्जा संकट का सामना किया था। तब से लेकर अब तक भारत ने अपनी 'रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व' (SPR) क्षमता को काफी बढ़ाया है।
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बदलता सिस्टम: पहले गैस वितरण प्रणाली पूरी तरह मैन्युअल थी, जिससे कालाबाजारी आसान थी। आज डिजिटल ट्रैकिंग और 'वन टाइम पासवर्ड' (OTP) आधारित डिलीवरी ने इसे सुरक्षित बनाया है, लेकिन वर्तमान 'पैनिक बुकिंग' ने इस डिजिटल ढांचे को भी चुनौती दे दी है। सरकार का वर्तमान कदम 1990 की गलतियों से सीख लेकर उठाया गया एक त्वरित प्रहार है।
मदद के लिए बढ़ाई गई 'फायरपावर'
उपभोक्ताओं की बढ़ती परेशानियों को देखते हुए सरकार ने अपने सपोर्ट सिस्टम को कई गुना बढ़ा दिया है।
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हेल्पलाइन मजबूत: ऑयल कंपनियों के कॉल सेंटर में ऑपरेटरों की संख्या बढ़ाकर 400 कर दी गई है और फोन लाइनों को भी विस्तार दिया गया है।
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विशेष कंट्रोल रूम: हरियाणा, तेलंगाना, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में 24x7 कंट्रोल रूम काम कर रहे हैं। बिहार के दरभंगा जैसे संवेदनशील इलाकों में, जहाँ लंबी कतारें देखी गई थीं, अब मजिस्ट्रेट की तैनाती में गैस वितरण सुनिश्चित किया जा रहा है।
सरकार का यह सख्त रुख उन लोगों के लिए संदेश है जो इस संकट को हवा दे रहे हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय ने भरोसा दिलाया है कि देश के पास पर्याप्त भंडार है, बस जरूरत है तो धैर्य रखने की। अगर आप भी जरूरत न होने पर बुकिंग कर रहे हैं, तो आप किसी जरूरतमंद का हक मार रहे हैं। फिलहाल, प्रशासन की सख्ती और बढ़ी हुई मॉनिटरिंग से उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में सप्लाई सामान्य हो जाएगी।
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