Seraikela Accident : सरायकेला में ट्रक की हेडलाइट ने छीन ली आंखों की रोशनी, बाइक से गिरा युवक, मेला देख लौटते वक्त हुआ हादसा
सरायकेला के मुक्ति पोखर के पास ट्रक की तेज हेडलाइट की रोशनी से एक बाइक सवार युवक अनियंत्रित होकर गिर गया। टीउनिया मेला देखकर लौट रहे राजू महतो गंभीर रूप से घायल हैं और सदर अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। अगर आप भी रात में सफर करते हैं, तो इस अंधेरे सच को जरूर देखें।
सरायकेला/झारखंड, 14 मार्च 2026 – सरायकेला-खरसावां मार्ग पर शुक्रवार की रात एक डरावना सड़क हादसा पेश आया। मुक्ति पोखर के समीप ट्रक की 'हाई बीम' हेडलाइट की चकाचौंध ने एक युवक को अस्पताल के बेड तक पहुँचा दिया। रात करीब 9:30 बजे हुए इस हादसे ने एक बार फिर सड़कों पर रात के समय होने वाले जानलेवा खतरों को उजागर कर दिया है। घायल युवक की पहचान खरसावां के बंदीराम निवासी राजू महतो (26) के रूप में हुई है, जो मेला देखकर खुशियों के साथ घर लौट रहा था, लेकिन रास्ते में ही काल बनकर आई रोशनी ने उसे सड़क पर पटक दिया।
खुशियों भरा सफर और 'अंधा' कर देने वाली रोशनी
हादसे की कहानी किसी भी बाइक सवार के साथ घट सकती है और यही बात इसे डरावना बनाती है।
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मेले की यादें: राजू महतो अपने दोस्तों के साथ टीउनिया गांव में लगे वार्षिक मेले का आनंद लेने गया था। मेला खत्म होने के बाद वह अपनी बाइक से घर की ओर निकला था।
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आंखों के सामने अंधेरा: जैसे ही वह मुक्ति पोखर के पास पहुँचा, विपरीत दिशा से आ रहे एक तेज रफ्तार ट्रक ने अपनी हेडलाइट का 'हाई बीम' (तेज रोशनी) चालू कर दिया।
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संतुलन बिगड़ा: अचानक आंखों पर पड़ी इस तेज रोशनी के कारण राजू को सामने का रास्ता दिखना बंद हो गया। कुछ ही सेकंड के लिए उसकी आंखों के सामने अंधेरा छा गया और वह बाइक पर से अपना संतुलन खो बैठा। अनियंत्रित होकर वह सीधे पक्की सड़क पर जा गिरा।
पुलिस की फुर्ती: पेट्रोलिंग वैन बनी एम्बुलेंस
हादसे के तुरंत बाद मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों ने संवेदनशीलता दिखाई।
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त्वरित सूचना: ग्रामीणों ने बिना देरी किए पुलिस को फोन किया। संयोग से सरायकेला पुलिस की पेट्रोलिंग टीम पास ही थी, जो कुछ ही मिनटों में मौके पर पहुँच गई।
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सदर अस्पताल में भर्ती: युवक की गंभीर स्थिति को देखते हुए पुलिस ने एम्बुलेंस का इंतजार करने के बजाय अपने पेट्रोलिंग वाहन से ही घायल राजू को उठाकर सदर अस्पताल सरायकेला पहुँचाया।
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गंभीर चोटें: चिकित्सकों के अनुसार, राजू के सिर, हाथ और पैर में गहरी चोटें आई हैं। उसका खून काफी बह चुका था, लेकिन समय पर अस्पताल पहुँचने से उसकी जान बचा ली गई है। फिलहाल वह डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में है।
सरायकेला-खरसावां मार्ग और 'हाई बीम' का खूनी खेल
सरायकेला-खरसावां मार्ग ऐतिहासिक रूप से इस क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक सड़कों में से एक रही है।
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राजाओं का मार्ग: प्राचीन समय में यह रास्ता सरायकेला रियासत और खरसावां रियासत को जोड़ता था। जैसे-जैसे समय बदला, यहाँ बैलगाड़ियों की जगह भारी ट्रकों और डंपरों ने ले ली।
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मुक्ति पोखर का 'ब्लैक स्पॉट': स्थानीय लोग बताते हैं कि मुक्ति पोखर के पास की सड़क अपनी बनावट और पेड़ों के झुकाव के कारण रात में काफी अंधेरी रहती है। यहाँ पहले भी ट्रक की हेडलाइट के कारण बाइक सवारों के गिरने और आपस में टकराने के दर्जनों मामले इतिहास में दर्ज हैं। रात के समय 'डीपर' का इस्तेमाल न करना यहाँ के ट्रक चालकों की पुरानी और घातक आदत बन चुकी है, जिसने आज राजू जैसे युवक को गंभीर रूप से घायल कर दिया।
जनता की मांग: सड़कों पर चाहिए 'लाइटिंग' और 'लगाम'
इस हादसे के बाद सरायकेला के लोगों में भारी गुस्सा है।
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नियमों का उल्लंघन: स्थानीय निवासियों का कहना है कि रात में बड़े वाहन नियमों के विरुद्ध 'हाई बीम' का प्रयोग करते हैं, जिससे छोटे वाहन चालकों का जीना दूभर हो गया है।
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प्रशासनिक मांग: ग्रामीणों ने मांग की है कि मुक्ति पोखर जैसे अंधेरे मोड़ों पर स्ट्रीट लाइट्स की व्यवस्था की जाए और तेज हेडलाइट का इस्तेमाल करने वाले ट्रक चालकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
सरायकेला की यह घटना उन लाखों बाइक सवारों के लिए एक चेतावनी है जो रात में हाईवे पर सफर करते हैं। एक छोटी सी मानवीय चूक या ट्रक चालक की लापरवाही किसी की जान ले सकती है। राजू महतो का इलाज जारी है, लेकिन सवाल वही है—सड़कों पर रात के समय सुरक्षा कब सुनिश्चित होगी?
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