UGC Equity Regulation 2026 : पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा हथौड़ा: जातिगत भेदभाव की परिभाषा पर उठे गंभीर सवाल, CJI सूर्यकांत बोले – क्या भारत को फिर से बांटने की तैयारी है? जानिए क्यों रोके गए नए नियम और 19 मार्च को क्या होगा फैसला

क्या UGC Equity Regulation 2026 से देश के विश्वविद्यालयों में समानता बढ़ती या नया भेदभाव पैदा होता? सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों पर क्यों लगाई रोक, CJI सूर्यकांत ने क्या कहा और अब केंद्र सरकार के सामने क्या हैं चुनौतियां? पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

Jan 29, 2026 - 21:15
Jan 29, 2026 - 22:53
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UGC Equity Regulation 2026 : पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा हथौड़ा: जातिगत भेदभाव की परिभाषा पर उठे गंभीर सवाल, CJI सूर्यकांत बोले – क्या भारत को फिर से बांटने की तैयारी है? जानिए क्यों रोके गए नए नियम और 19 मार्च को क्या होगा फैसला
UGC Equity Regulation 2026 : पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा हथौड़ा: जातिगत भेदभाव की परिभाषा पर उठे गंभीर सवाल, CJI सूर्यकांत बोले – क्या भारत को फिर से बांटने की तैयारी है? जानिए क्यों रोके गए नए नियम और 19 मार्च को क्या होगा फैसला

UGC Equity Regulation 2026 पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी कार्रवाई, नए नियमों पर तत्काल रोक

देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता और भेदभाव समाप्त करने के उद्देश्य से लाए गए UGC Equity Regulation 2026 को लेकर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश सीजेआई सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने इन नियमों के क्रियान्वयन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई तक वर्ष 2012 के पुराने यूजीसी नियम ही लागू रहेंगे। इस फैसले ने केंद्र सरकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) दोनों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।



 क्या है UGC Equity Regulation 2026?

यूजीसी ने 13 जनवरी 2026 को “उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम, 2026” की अधिसूचना जारी की थी। इसका उद्देश्य कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाति, धर्म, लिंग और दिव्यांगता के आधार पर होने वाले भेदभाव को रोकना था।

नियमों के तहत:

  • हर विश्वविद्यालय में इक्विटी कमेटी

  • इक्विटी हेल्पलाइन

  • और भेदभाव के मामलों में सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया गया था।



 विवाद की जड़: धारा 3(1)(c)

इस पूरे विवाद की सबसे बड़ी वजह धारा 3(1)(c) बनी, जिसमें जातिगत भेदभाव की परिभाषा को केवल SC, ST और OBC वर्ग तक सीमित कर दिया गया था।

यानी:

  • यदि सामान्य वर्ग (General Category) के छात्र के साथ जाति के आधार पर दुर्व्यवहार होता है,

  • तो उसे UGC Equity Regulation 2026 के तहत कोई कानूनी संरक्षण नहीं मिलता

इसी कारण देशभर में ‘रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन’ यानी उल्टे भेदभाव की बहस शुरू हो गई और कई विश्वविद्यालय परिसरों में विरोध प्रदर्शन होने लगे।


 सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणियां

सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने बेहद कड़े शब्दों में टिप्पणी करते हुए कहा:

“प्रथम दृष्टया ये नियम अस्पष्ट हैं और इनका दुरुपयोग किया जा सकता है। क्या 75 वर्षों की संवैधानिक यात्रा के बाद हम जातिविहीन समाज की ओर बढ़ने के बजाय पीछे लौट रहे हैं?”

कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां:

  1. समाज को पीछे की ओर नहीं ले जाया जा सकता

  2. अमेरिका जैसी श्वेत-अश्वेत अलगाव वाली व्यवस्था भारत में स्वीकार्य नहीं

  3. यदि सामान्य वर्ग के छात्र की रैगिंग होती है तो वह कहां जाएगा?

  4. नियम सामाजिक संवाद को खत्म कर सकते हैं

  5. UGC Regulations 2012 ही लागू रहेंगे

  6. 2026 के नियम अस्पष्ट हैं

  7. विशेषज्ञों की कमेटी बनाकर भाषा स्पष्ट की जाए

  8. भेदभाव की परिभाषा समावेशी और जाति-तटस्थ होनी चाहिए

  9. अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी

न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने अमेरिका के पुराने सेग्रिगेटेड स्कूल सिस्टम का उदाहरण देते हुए चेताया कि शैक्षणिक संस्थान भारत की एकता का प्रतीक होने चाहिए, न कि विभाजन का।


 छात्रों का विरोध और याचिकाकर्ताओं का तर्क

पिछले दो हफ्तों से दिल्ली विश्वविद्यालय, बीएचयू और इलाहाबाद विश्वविद्यालय जैसे बड़े परिसरों में छात्र इन नियमों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे।

याचिकाकर्ता एडवोकेट विनीत जिंदल और विष्णु शंकर जैन ने दलील दी कि ये नियम संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन करते हैं। कोर्ट ने इस तर्क को गंभीरता से लेते हुए माना कि भेदभाव किसी भी दिशा में हो सकता है।


 अब केंद्र सरकार के सामने क्या चुनौती?

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और सुझाव दिया है कि:

  • विधि विशेषज्ञों

  • शिक्षाविदों

  • सामाजिक इंजीनियरों

की एक उच्चस्तरीय कमेटी गठित की जाए।

इस कमेटी का उद्देश्य नियमों की भाषा को स्पष्ट, समावेशी और संवैधानिक बनाना होगा। शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, सरकार जल्द ही इस दिशा में कदम उठा सकती है।


 निष्कर्ष

UGC Equity Regulation 2026 पर सुप्रीम कोर्ट की रोक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि समानता के नाम पर नया भेदभाव स्वीकार्य नहीं होगा। फिलहाल देशभर के विश्वविद्यालयों में 2012 के नियम ही लागू रहेंगे, जिससे लाखों छात्रों को राहत मिली है।

अब सबकी निगाहें 19 मार्च की अगली सुनवाई और केंद्र सरकार की रणनीति पर टिकी हैं।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।