Palamu Shootout: खूनी जंग, पलामू में जमीन के लिए सगे रिश्तेदार ने मारी गोली, कनपटी पर पिस्तौल रखकर किया फायर
पलामू के तरहसी में जमीन विवाद के चलते आधी रात को सोए हुए व्यक्ति की कनपटी पर गोली मार दी गई है। गोतिया परिवार के इस खूनी हमले और फरार आरोपियों की तलाश की पूरी रोंगटे खड़े कर देने वाली रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी सगे रिश्तों के बीच छिपे इस 'साइलेंट किलर' के खतरे को कभी नहीं जान पाएंगे।
पलामू, 6 जनवरी 2026 – झारखंड के पलामू जिले में जमीन की भूख ने रिश्तों का कत्ल करना शुरू कर दिया है। तरहसी थाना क्षेत्र के उदयपुरा वन गांव में सोमवार की आधी रात को एक ऐसी वारदात हुई जिसने पूरे इलाके में दहशत फैला दी। सालों से चल रहे जमीन विवाद में एक सगे गोतिया (रिश्तेदार) ने ही इंसानियत की सारी हदें पार करते हुए सोए हुए 50 वर्षीय प्रदीप सिंह की कनपटी पर पिस्टल सटाकर गोली दाग दी। लहूलुहान प्रदीप सिंह इस वक्त MMCH अस्पताल में मौत और जिंदगी के बीच जूझ रहे हैं, जबकि हमलावर पुलिस को खुली चुनौती देते हुए फरार हो गए हैं।
आधी रात का खूनी खेल: सोते हुए शिकार पर वार
वारदात सोमवार रात करीब 11 बजे की है, जब पूरा गांव गहरी नींद में था।
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खौफनाक हमला: प्रदीप सिंह अपने घर के भीतर सो रहे थे। तभी आरोप है कि मिश्रटांड़ निवासी चतुर्गुण सिंह अपने दो साथियों के साथ दबे पांव घर में घुसा।
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सीधे सिर पर फायर: बिना किसी बहस या चेतावनी के, हमलावरों ने प्रदीप की कनपटी पर पिस्टल रखी और ट्रिगर दबा दिया। गोली लगते ही प्रदीप चीख पड़े और चारों ओर खून फैल गया।
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चीख-पुकार और फरार: गोली की आवाज सुनकर जब तक परिजन और पड़ोसी मौके पर पहुँचे, चतुर्गुण सिंह और उसके साथी अंधेरे का फायदा उठाकर चंपत हो चुके थे।
3 साल की रंजिश और 'पंचायती' की नाकामी
मंगलवार को MMCH पुलिस चौकी में अपना बयान दर्ज कराते हुए प्रदीप सिंह ने उन कड़वे पलों को याद किया जिसने उन्हें इस हाल में पहुँचाया।
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जमीन का जंजाल: प्रदीप के अनुसार, गोतिया परिवार के साथ पिछले 3-4 वर्षों से जमीन के एक टुकड़े को लेकर विवाद चल रहा था।
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विफल समाधान: इस मामले को सुलझाने के लिए कई बार गांव में पंचायती बैठी, लेकिन हर बार बात मारपीट और गाली-गलौज पर खत्म होती रही।
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बेहतर इलाज की जंग: घायल प्रदीप को पहले तरहसी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से गंभीर स्थिति देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज अस्पताल (MMCH) रेफर कर दिया।
पलामू फायरिंग कांड: घटना की पूरी जानकारी (Case Snapshot)
| विवरण | डेटा (Data) |
| पीड़ित | प्रदीप सिंह (50 वर्ष), उदयपुरा वन गांव |
| मुख्य आरोपी | चतुर्गुण सिंह (मिश्रटांड़ निवासी) |
| वारदात का समय | सोमवार रात 11:00 बजे |
| इलाज का स्थान | एमएमसीएच (MMCH), पलामू |
| पुलिस स्टेशन | तरहसी थाना क्षेत्र |
इतिहास और रंजिश: पलामू में जमीन और 'रक्त-चरित्र'
पलामू का इतिहास गवाह है कि यहाँ जमीन विवादों ने कई परिवारों को हमेशा के लिए उजाड़ दिया है। 1980 और 90 के दशक में तरहसी और पांकी के इलाकों में 'जमीन और वर्चस्व' की लड़ाई में कई बड़े नरसंहार हुए। हालांकि समय बदला, लेकिन जमीन को लेकर 'गोतिया' (रिश्तेदारों) के बीच नफरत कम नहीं हुई। पलामू के ग्रामीण इलाकों में आज भी मुकदमों से ज्यादा गोलियों और लाठियों से फैसले करने की प्रवृत्ति देखी जाती है। उदयपुरा की यह घटना उसी 'रक्त-चरित्र' का हिस्सा है, जहाँ एक इंच जमीन की कीमत सगे रिश्तेदार के खून से भी बढ़कर मानी गई।
पुलिस की कार्रवाई: अब भी लिखित आवेदन का इंतजार
हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी वारदात होने के बाद भी तरहसी थाना में अब तक कोई अधिकारिक लिखित शिकायत नहीं दी गई है।
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थाना प्रभारी का बयान: तरहसी थाना प्रभारी आनंद कुमार ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली है और टीम जांच में जुटी है। लेकिन कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए परिजनों के लिखित आवेदन का इंतजार है।
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फरार आरोपियों की तलाश: पुलिस की एक विशेष टीम चतुर्गुण सिंह के ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। सूत्रों की मानें तो आरोपी पलामू की सीमा पार कर बिहार के जंगलों की ओर भाग सकते हैं।
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बयान दर्ज: फिलहाल एमएमसीएच में फर्द बयान दर्ज हो चुका है, जिसे जल्द ही तरहसी थाने को ट्रांसफर कर एफआईआर (FIR) में तब्दील किया जाएगा।
रिश्तों पर भारी पड़ती जमीन
प्रदीप सिंह की कनपटी पर लगी गोली केवल एक इंसान को जख्मी नहीं करती, बल्कि समाज के उस भरोसे को भी मारती है जो हम अपने सगे-संबंधियों पर करते हैं। पलामू पुलिस के लिए चुनौती केवल आरोपियों को पकड़ना नहीं है, बल्कि इन सुलगते विवादों को खूनी होने से पहले ही रोकना है।
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