PM SVANidhi - PM Street Vendor’s Atmanirbhar Nidhi | पीएम स्वनिधि योजना : स्ट्रीट वेंडर्स की नई उम्मीद
PM SVANidhi - PM Street Vendor’s Atmanirbhar Nidhi | पीएम स्वनिधि योजना : स्ट्रीट वेंडर्स की नई उम्मीद जानिए पीएम स्वनिधि योजना के बारे में, जो स्ट्रीट वेंडर्स को माइक्रो क्रेडिट, डिजिटल पेमेंट इंसेंटिव और आर्थिक स्थिरता प्रदान कर रही है। पढ़ें इसकी विशेषताएं और यूपीएससी 2023 के लिए इसकी प्रासंगिकता।
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पीएम स्वनिधि: कोरोना काल में स्ट्रीट वेंडर्स के लिए राहत की योजना | PM SVANidhi - PM Street Vendor’s Atmanirbhar Nidhi
पीएम स्वनिधि (प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि) एक केंद्रीय क्षेत्र योजना है, जिसे जून 2020 में लॉन्च किया गया। इस योजना का उद्देश्य COVID-19 महामारी से प्रभावित स्ट्रीट वेंडर्स को सशक्त बनाना और उनकी आजीविका को फिर से पटरी पर लाना है।
यह योजना माइक्रो क्रेडिट के माध्यम से आर्थिक सहायता प्रदान करती है और डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन देती है। यह न केवल एक वित्तीय सहायता योजना है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पीएम स्वनिधि योजना की शुरुआत क्यों हुई?
COVID-19 महामारी और लॉकडाउन के कारण देशभर के स्ट्रीट वेंडर्स की आजीविका बुरी तरह प्रभावित हुई।
- छोटे पूंजी आधार पर काम करने वाले वेंडर्स ने अपनी बचत समाप्त कर दी।
- उनके व्यवसाय बंद हो गए, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति बिगड़ गई।
इस समस्या को हल करने और वेंडर्स को दोबारा आत्मनिर्भर बनाने के लिए पीएम स्वनिधि योजना की शुरुआत की गई।
पीएम स्वनिधि योजना की मुख्य विशेषताएं
-
केंद्रीय क्षेत्र योजना:
यह योजना पूरी तरह से केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित है। -
सस्ती कार्यशील पूंजी:
वेंडर्स को बिना किसी गारंटी के 10,000 रुपये तक का कार्यशील पूंजी ऋण मिलता है। -
सूद पर सब्सिडी:
समय पर ऋण चुकाने पर 7% ब्याज सब्सिडी का लाभ सीधे लाभार्थी के खाते में दिया जाता है। -
डिजिटल भुगतान पर प्रोत्साहन:
डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए वेंडर्स को 50 से 100 रुपये प्रति माह कैशबैक मिलता है। -
अगले ऋण का लाभ:
पहला ऋण समय पर चुकाने वाले वेंडर्स को बड़ी राशि का ऋण लेने की पात्रता मिलती है। -
गैर-संपार्श्विक (No Collateral):
इस योजना के तहत वेंडर्स को ऋण लेने के लिए किसी प्रकार की गारंटी नहीं देनी होती।
योजना का उद्देश्य
-
आर्थिक सशक्तिकरण:
वेंडर्स को कार्यशील पूंजी तक सस्ती पहुंच प्रदान कर उनकी आजीविका को बहाल करना। -
समय पर भुगतान को बढ़ावा:
समय पर ऋण चुकाने वाले वेंडर्स को प्रोत्साहित करने के लिए कैशबैक और उच्च ऋण राशि की पेशकश। -
डिजिटलाइजेशन को प्रोत्साहन:
डिजिटल भुगतान अपनाने वाले वेंडर्स को पुरस्कृत कर वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना।
योजना का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
स्ट्रीट वेंडर्स (जीविका सुरक्षा और नियमन) अधिनियम, 2014 के तहत स्ट्रीट वेंडर्स को आर्थिक और सामाजिक पहचान मिली। इसी अधिनियम के आधार पर पीएम स्वनिधि योजना शुरू की गई, जिससे वेंडर्स को न केवल वित्तीय सहायता मिले बल्कि उनकी आजीविका को संरक्षित किया जा सके।
यह योजना आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत स्ट्रीट वेंडर्स को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर है।
पीएम स्वनिधि योजना के तहत ऋण देने वाले संस्थान
- अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक (Scheduled Commercial Banks)
- क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (Regional Rural Banks)
- सहकारी बैंक (Cooperative Banks)
- गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFCs)
- माइक्रो-फाइनेंस संस्थान (MFIs)
- स्व-सहायता समूह बैंक (SHG Banks)
इन संस्थानों के माध्यम से ऋण प्रक्रिया सरल और सुलभ बनाई गई है।
योजना के क्रियान्वयन में SIDBI की भूमिका
स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (SIDBI) इस योजना का क्रियान्वयन साझेदार है।
- SIDBI, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के साथ मिलकर योजना को लागू करता है।
- यह योजना के लिए ऋण देने वाली संस्थाओं के नेटवर्क का लाभ उठाता है, जिसमें SCB, RRB, SFB, NBFC और MFI शामिल हैं।
डिजिटल भुगतान और कैशबैक योजना
पीएम स्वनिधि योजना का मुख्य आकर्षण डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहन देना है।
- डिजिटल लेनदेन को अपनाने वाले वेंडर्स को 50-100 रुपये प्रति माह कैशबैक दिया जाता है।
- यह पहल वेंडर्स को डिजिटल इकोसिस्टम से जोड़ती है, जिससे वित्तीय समावेशन और पारदर्शिता सुनिश्चित होती है।
योजना का प्रभाव और भविष्य
अब तक पीएम स्वनिधि योजना ने लाखों वेंडर्स को सशक्त बनाया है। यह योजना न केवल आर्थिक सहायता प्रदान करती है बल्कि डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देकर वेंडर्स को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ती है।
यूपीएससी 2023 की तैयारी करने वालों के लिए, यह योजना समावेशी विकास और जमीनी स्तर पर सामाजिक न्याय का एक आदर्श उदाहरण है।
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