भारत सरकार की नई पहल: हर विज्ञापन के लिए अनिवार्य सेल्फ डिक्लेरेशन

भारत सरकार द्वारा विज्ञापनों के लिए सेल्फ डिक्लेरेशन सर्टिफिकेट की अनिवार्यता का क्या उद्देश्य है? सेल्फ डिक्लेरेशन सर्टिफिकेट क्या होता है और इसे सबमिट करने की प्रक्रिया क्या है? क्या सभी विज्ञापनदाताओं को यह सर्टिफिकेट अपलोड करना अनिवार्य है, या सिर्फ कुछ खास श्रेणियों के विज्ञापनदाताओं को ही?सेल्फ डिक्लेरेशन सर्टिफिकेट में किन-किन जानकारियों को शामिल करना आवश्यक होता है?

Jun 24, 2024 - 15:49
Jun 24, 2024 - 15:51
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भारत सरकार की नई पहल: हर विज्ञापन के लिए अनिवार्य सेल्फ डिक्लेरेशन
भारत सरकार की नई पहल: हर विज्ञापन के लिए अनिवार्य सेल्फ डिक्लेरेशन

भारत सरकार की नई पहल: हर विज्ञापन के लिए अनिवार्य सेल्फ डिक्लेरेशन

डिजिटल आर्ट और विज्ञापन की दुनिया में बड़ा बदलाव:

हाल ही में, भारत सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सभी प्रकार के विज्ञापनों के लिए सेल्फ डिक्लेरेशन अनिवार्य कर दिया है। अगर आप एक डिजिटल आर्ट रन करते हैं, जैसे कि हम और आप करते हैं, तो यह नियम आपको भी प्रभावित करेगा।

गवर्नमेंट का निर्देश:

सरकार ने स्पष्ट कहा है कि अब हर विज्ञापनदाता को अपने विज्ञापन से संबंधित जानकारी एक सेल्फ डिक्लेरेशन सर्टिफिकेट के माध्यम से सरकार के पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। इसमें यह बताना होगा कि आप कौन हैं, आपकी कंपनी क्या है, और आप किस प्रकार का विज्ञापन चला रहे हैं। अगर यह विज्ञापन प्रिंट मीडिया का है, तो आपको इसका पीडीएफ फॉर्मेट भी अपलोड करना होगा।

प्रक्रिया:

सरकार ने इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए एक यूजर मैन्युअल भी प्रदान किया है। इसमें हर चरण को विस्तार से समझाया गया है। आप चाहे एजेंसी हों या सीधे विज्ञापनदाता, यह सेल्फ डिक्लेरेशन सर्टिफिकेट अपलोड कर सकते हैं। अगर आप एजेंसी हैं, तो आप अपने क्लाइंट के विभाग की ओर से भी यह कर सकते हैं।

सेल्फ डिक्लेरेशन सर्टिफिकेट का फॉर्मेट:

सेल्फ डिक्लेरेशन सर्टिफिकेट में निम्नलिखित जानकारी शामिल होगी:

  1. ऑथराइज्ड पर्सन का नाम: वह व्यक्ति जो इस सर्टिफिकेट को सबमिट करेगा।
  2. ईमेल एड्रेस और मोबाइल नंबर: संपर्क जानकारी।
  3. कंपनी का नाम और ऑथराइजेशन लेटर: यह पुष्टि करेगा कि ऑथराइज्ड पर्सन को कंपनी की ओर से यह सर्टिफिकेट सबमिट करने का अधिकार है।

सरकार का उद्देश्य:

इस पहल का उद्देश्य सभी विज्ञापनों को रेगुलेट करना और उन्हें ट्रांसपेरेंट बनाना है। सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में आदेश भी दिया है कि प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और इंटरनेट डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर विज्ञापनों की सामग्री को रेगुलेट किया जाए।

आवश्यकता:

हर विज्ञापनदाता को इस नए नियम का पालन करना अनिवार्य होगा। इससे न केवल विज्ञापनदाता की पहचान और उसकी सच्चाई की पुष्टि होगी, बल्कि विज्ञापन की गुणवत्ता और सत्यता भी सुनिश्चित होगी।