Dumka Accident: दुमका-साहिबगंज हाईवे पर भीषण हादसा, बाइक सवार की मौके पर मौत!
दुमका-साहिबगंज हाईवे पर हटिया पत्थर गोबर मोड़ के पास बाइक और ट्रेलर की जोरदार टक्कर! एक की मौके पर मौत, दो घायल। जानें हादसे की पूरी डिटेल और हाईवे पर बढ़ते एक्सीडेंट का इतिहास।

दुमका: झारखंड में सड़क हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। ताजा मामला दुमका-साहिबगंज मुख्य मार्ग का है, जहां मसलिया थाना क्षेत्र के हटिया पत्थर गोबर मोड़ के पास एक दर्दनाक दुर्घटना हुई। तेज रफ्तार ट्रेलर और बाइक की जोरदार टक्कर में एक बाइक सवार की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।
कैसे हुआ हादसा?
मंगलवार को दोपहर के समय जब तीन युवक बाइक से दुमका की ओर जा रहे थे, तभी तेज़ रफ़्तार ट्रेलर ने बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक सवार एक व्यक्ति ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया। दो अन्य घायल हो गए, जिन्हें स्थानीय लोगों की मदद से मसलिया थाना पुलिस ने दुमका फुलो झानो मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा।
हादसे के बाद ट्रेलर चालक फरार, पुलिस ने घेराबंदी कर पकड़ा
दुर्घटना के बाद ट्रेलर चालक मौके से फरार होने की कोशिश करने लगा, लेकिन पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए रानी घाघर के पास ट्रेलर को पकड़ लिया। हालांकि, दुर्घटना के बाद से ही इलाके में सनसनी फैल गई और स्थानीय लोगों में गुस्सा देखा गया।
क्यों हो रहे हैं लगातार हादसे?
झारखंड के प्रमुख हाइवे दुमका-साहिबगंज मार्ग पर सड़क हादसों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इस हाईवे पर भारी वाहनों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है, लेकिन सड़क सुरक्षा के उपाय न के बराबर हैं।
- स्पीड ब्रेकर और ट्रैफिक साइन की कमी – कई जगहों पर अचानक मोड़ आते हैं, लेकिन वहां कोई संकेतक नहीं लगाए गए हैं।
- ओवरलोडेड ट्रकों की भरमार – हाईवे पर तेज रफ्तार और भारी ट्रकों का दबदबा है, जो अक्सर हादसों का कारण बनते हैं।
- रोशनी और सुरक्षा उपायों की कमी – रात के समय सड़क पर पर्याप्त रोशनी नहीं होती, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना और बढ़ जाती है।
झारखंड में सड़क हादसों का बढ़ता ग्राफ
झारखंड में सड़क हादसों के आंकड़े डराने वाले हैं। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार,
हर साल करीब 5,000 से ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं होती हैं।
इनमें से 1,500 से ज्यादा लोगों की मौत हो जाती है।
झारखंड में हर दिन औसतन 13 सड़क हादसे होते हैं।
विशेषज्ञों की राय:
यातायात विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि झारखंड में सख्त ट्रैफिक नियम लागू किए जाएं, ओवरलोडिंग पर नियंत्रण रखा जाए और सड़कों की हालत सुधारी जाए, तो ऐसे हादसों में कमी लाई जा सकती है।
स्थानीय लोगों का गुस्सा, प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग
इस हादसे के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश देखा गया। उनका कहना है कि प्रशासन को सड़क सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए और स्पीड कंट्रोल के लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए।
कब बदलेगी हालात?
इस तरह की घटनाएं बार-बार यह सवाल खड़ा करती हैं – क्या झारखंड की सड़कों पर सफर करना सुरक्षित है?
जब तक प्रशासन ट्रैफिक नियमों को सख्ती से लागू नहीं करता और हाईवे पर सुरक्षा उपाय नहीं बढ़ाए जाते, तब तक ऐसे दर्दनाक हादसे होते रहेंगे।
अगर आप हाईवे पर सफर कर रहे हैं, तो सावधानी बरतें, हेलमेट पहनें और ट्रैफिक नियमों का पालन करें। ????
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