Dhanbad Tragedy: ओबी डंपिंग का शिकार हुआ युवक, परिजनों की चीख-पुकार के बीच मुआवजे की जंग!
धनबाद के गोल्डेन पहाड़ी में ओबी डंपिंग की चपेट में आकर युवक की मौत! मुआवजे की मांग पर शव उठाने से इनकार, प्रशासन पर सवाल।

धनबाद के गोल्डेन पहाड़ी में मंगलवार को एक दिल दहला देने वाली घटना घटी। 31 वर्षीय संजय मल्लाह की मौत देवप्रभा आउटसोर्सिंग के ओबी डंपिंग के पत्थरों में दबने से हो गई। मौत के बाद इलाके में आक्रोश का माहौल बन गया।
परिजन और ग्रामीणों ने 50 लाख रुपये मुआवजे की मांग को लेकर शव को उठाने से इनकार कर दिया। पूरे दिन हंगामा होता रहा, लेकिन प्रशासन बेबस नजर आया। आखिर कैसे हुई यह दर्दनाक मौत और क्यों इस घटना ने इलाके में भूचाल ला दिया? आइए जानते हैं पूरी कहानी।
कैसे हुआ हादसा?
मृतक संजय मल्लाह, गोल्डेन पहाड़ी का रहने वाला था और अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था।
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मंगलवार सुबह वह घर से निकला, लेकिन दोपहर तक वापस नहीं लौटा।
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जब परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की, तो आसपास के लोगों ने बताया कि एक व्यक्ति ओबी डंपिंग के पत्थरों में दबा पड़ा है।
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परिजन घटनास्थल पर पहुंचे और देखा कि संजय की मौत हो चुकी थी।
चर्चा है कि संजय शौच के लिए गया था और तभी ओबी डंपिंग के बड़े पत्थर गिरने से दब गया।
यह पहला मामला नहीं है जब खनन क्षेत्र में ऐसी दुर्घटनाएं हुई हैं। इससे पहले भी कई हादसे हो चुके हैं, लेकिन प्रशासन हर बार आंख मूंद लेता है।
मुआवजे के लिए हंगामा, शव उठाने से इनकार!
घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने घटनास्थल पर ही प्रदर्शन शुरू कर दिया।
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50 लाख रुपये मुआवजे और गोल्डेन पहाड़ी से विस्थापन की मांग को लेकर शव को उठाने से मना कर दिया गया।
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मामला सुलझाने के लिए थाने में वार्ता हुई, लेकिन कोई हल नहीं निकला।
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सीओ के प्रतिनिधि एमके झा जब पहुंचे, तो लोगों ने उन्हें लौटा दिया।
गुस्साए ग्रामीणों का कहना था कि जब तक बीसीसीएल और जिला प्रशासन के वरीय अधिकारी मौके पर नहीं आते, शव नहीं उठाने दिया जाएगा।
प्रशासन और नेताओं की एंट्री, लेकिन हल क्या निकला?
शाम होते-होते मामला राजनीतिक रंग लेने लगा।
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सिंदरी विधायक चंद्रदेव महतो और भाजपा नेत्री तारा देवी घटनास्थल पर पहुंचे और ग्रामीणों की मांग का समर्थन किया।
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विधायक ने अगली सुबह उपायुक्त और बीसीसीएल अधिकारियों को बुलाकर मुआवजे की मांग पूरी करवाने का आश्वासन दिया।
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वन विभाग पहले भी ओबी डंपिंग पर कार्रवाई कर चुका है, लेकिन बीसीसीएल प्रबंधन की मनमानी अब भी जारी है।
ग्रामीणों का कहना था कि अगर प्रशासन खनन क्षेत्र में सुरक्षा के इंतजाम करता, तो आज संजय जिंदा होता।
ओबी डंपिंग का आतंक – कब रुकेगा यह सिलसिला?
धनबाद और आसपास के इलाकों में कोयला खनन कंपनियों की मनमानी जारी है।
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ओबी डंपिंग (Overburden Dumping) का मतलब है कि खनन के दौरान निकले बेकार पत्थरों और मलबे को एक जगह इकट्ठा करना।
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कंपनियां अक्सर बस्तियों के पास ही ओबी डंपिंग कर देती हैं, जिससे गंभीर हादसे होते रहते हैं।
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इससे पहले भी कई लोगों की ओबी मलबे में दबकर जान जा चुकी है, लेकिन प्रशासन ने कभी ठोस कदम नहीं उठाए।
ग्रामीणों की मांग है कि गोल्डेन पहाड़ी के निवासियों को सुरक्षित जगह पर बसाया जाए और उसके बाद ही डंपिंग की अनुमति दी जाए।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
संजय मल्लाह की मौत के बाद उसके परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।
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पिता भोला मल्लाह का कहना है कि उनका बेटा घर का इकलौता सहारा था।
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पत्नी आरती देवी और दो साल की बच्ची बेसुध हैं।
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संजय के भाई गणेश मल्लाह और अजय मल्लाह, बहनें सरिता, बबीता और लक्ष्मी भी सदमे में हैं।
परिजनों का सवाल है –
"क्या अब प्रशासन हमें न्याय दिलाएगा, या फिर यह हादसा भी फाइलों में दफन हो जाएगा?"
प्रशासन का लापरवाह रवैया – आखिर कब तक?
इस पूरे मामले में प्रशासन की लापरवाही एक बार फिर उजागर हो गई।
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जब पत्रकारों ने लोदना एरिया के जीएम निखिल बी त्रिवेदी से इस मामले पर बात करनी चाही, तो उन्होंने फोन तक नहीं उठाया।
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इससे साफ है कि प्रशासन और कंपनी, दोनों ही इस घटना को गंभीरता से नहीं ले रहे।
अगर ग्रामीणों की मांगें नहीं मानी गईं, तो जल्द ही बड़ा आंदोलन देखने को मिल सकता है।
क्या यह सिर्फ एक दुर्घटना है, या लापरवाही की साजिश?
यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि खनन कंपनियों की मनमानी और प्रशासन की लापरवाही का नतीजा है।
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क्या सरकार खनन क्षेत्र में सुरक्षा के नियमों को लागू करेगी?
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क्या पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा?
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क्या भविष्य में ऐसे हादसे रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे?
ये सवाल न सिर्फ संजय मल्लाह के परिवार के हैं, बल्कि उन हजारों लोगों के भी हैं, जो ऐसे खतरनाक खनन क्षेत्रों में रह रहे हैं।
अगर जल्द ही सरकार और प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो यह हादसा एक बड़े जनआंदोलन की चिंगारी बन सकता है।
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