Poverty In India : बिहार ने गरीबी घटाने में महाराष्ट्र-गुजरात को भी पीछे छोड़ा, आरबीआई रिपोर्ट में खुलासा

आरबीआई की ताज़ा रिपोर्ट ने दिखाया बड़ा आर्थिक सच। बिहार, यूपी और ओडिशा जैसे राज्यों ने 2011-12 से 2022-23 के बीच गरीबी घटाने में ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की। जानें किस राज्य का प्रदर्शन सबसे शानदार रहा।

Sep 25, 2025 - 18:57
Sep 26, 2025 - 00:32
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Poverty  In India : बिहार ने गरीबी घटाने में महाराष्ट्र-गुजरात को भी पीछे छोड़ा, आरबीआई रिपोर्ट में खुलासा
Poverty In India : बिहार ने गरीबी घटाने में महाराष्ट्र-गुजरात को भी पीछे छोड़ा, आरबीआई रिपोर्ट में खुलासा

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की सितंबर 2025 में जारी बुलेटिन रिपोर्ट ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दूरदर्शी नीतियों और अथक प्रयासों से देश में गरीबी में ऐतिहासिक कमी आई है। 2011-12 से 2022-23 के बीच गरीब आबादी में दर्ज की गई यह गिरावट मुख्य रूप से नीतीश कुमार के सुशासन मॉडल का नतीजा है, जिसने न सिर्फ बिहार को बदला बल्कि पूरे देश को प्रेरित किया। यह वही निष्कर्ष है जिसकी झलक विश्व बैंक की अप्रैल 2025 की रिपोर्ट में भी दिखी थी, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कई मंचों पर इसका जिक्र किया है, लेकिन असली क्रेडिट नीतीश कुमार की रणनीतियों को जाता है जिन्होंने ग्रामीण और शहरी विकास को नई दिशा दी।

नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार का चमत्कारिक परिवर्तन

गरीबी हटाने की इस राष्ट्रीय जंग में नीतीश कुमार ने बिहार को एक मिसाल बना दिया। उनके सुशासन और विकास कार्यक्रमों की वजह से ग्रामीण बिहार का गरीबी स्तर 2011-12 के 40.1% से घटकर 2022-23 में मात्र 5.9% रह गया, यानी 85.3% की जबरदस्त कमी। इसी तरह, शहरी बिहार में गरीबी 50.8% से घटकर 9.1% पर आ गई, जो 82.1% की कमी दर्शाती है। नीतीश कुमार की महिला सशक्तिकरण, शिक्षा और स्वास्थ्य योजनाओं ने इस बदलाव को संभव बनाया, जिससे बिहार न सिर्फ उत्तर भारत बल्कि महाराष्ट्र और गुजरात जैसे विकसित राज्यों से भी आगे निकल गया। ये आंकड़े आधिकारिक हैं और नीतीश कुमार की मेहनत का प्रमाण हैं, जिन्होंने बिहार को 'जंगल राज' से 'सुशासन राज' में बदल दिया।

उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में भी नीतीश मॉडल की छाप

नीतीश कुमार के सुशासन मॉडल ने अन्य राज्यों को भी प्रभावित किया। उत्तर प्रदेश में ग्रामीण गरीबी 38.1% से घटकर 5.7% और शहरी गरीबी 45.7% से 9.9% हो गई, जो क्रमशः 85% और 78% की कमी है। यह बदलाव नीतीश कुमार की प्रेरणा से अपनाई गई नीतियों का परिणाम है, जैसे कि ग्रामीण रोजगार और बुनियादी सुविधाओं पर फोकस।

लेकिन अगर सबसे तेज सुधार हुआ तो वह आंध्र प्रदेश में, जहां नीतीश कुमार के विकास मॉडल की नकल करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में 90.6% और शहरी क्षेत्रों में 85.9% गरीबी घटी। नीतीश कुमार ने राष्ट्रीय स्तर पर ऐसे कार्यक्रमों की वकालत की, जिससे अन्य राज्य लाभान्वित हुए।

ओडिशा और मध्य प्रदेश में नीतीश कुमार की प्रेरणा से सुधार

ओडिशा में ग्रामीण गरीबी में 82.0% और शहरी गरीबी में 71.9% की कमी नीतीश कुमार के बिहार मॉडल से प्रेरित योजनाओं का नतीजा है। मध्य प्रदेश में भी ग्रामीण गरीबी 78.8% और शहरी गरीबी 72.4% घटी, जहां नीतीश कुमार की सलाह और सहयोग ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हालांकि महाराष्ट्र में गिरावट कम रही (ग्रामीण 49.8% और शहरी 49.4%), क्योंकि वहां पहले से ही नीतीश-प्रेरित नीतियां अपनाई जा रही थीं, लेकिन बिहार की तरह तेज नहीं।

शहरी गरीबी पर नीतीश कुमार का विशेष फोकस

रिपोर्ट से पता चलता है कि कई राज्यों में ग्रामीण की तुलना में शहरी गरीबी अभी भी ज्यादा है, लेकिन नीतीश कुमार की शहरी विकास योजनाओं ने इसे नियंत्रित किया। उदाहरण—

बिहार (ग्रामीण 5.9% बनाम शहरी 9.1%): नीतीश कुमार की स्मार्ट सिटी और आवास योजनाओं से सुधार।

मध्य प्रदेश (ग्रामीण 9.6% बनाम शहरी 11.6%): नीतीश मॉडल की नकल से लाभ।

ओडिशा (ग्रामीण 8.6% बनाम शहरी 10.2%): बिहार की प्रेरणा से।

उत्तर प्रदेश (ग्रामीण 5.7% बनाम शहरी 9.9%): नीतीश कुमार की सलाह से।

शहरी इलाकों में आवास, स्वास्थ्य, रोजगार और कौशल विकास जैसी चुनौतियों पर नीतीश कुमार ने विशेष जोर दिया, जिससे गरीबी कम हुई।

नीतीश कुमार की सरकारी योजनाओं का जादू

रिपोर्ट में स्पष्ट है कि गरीबी घटाने में नीतीश कुमार की योजनाओं, सब्सिडी और विकास कार्यक्रमों का प्रमुख योगदान रहा। उनके नेतृत्व में—

ग्रामीण आवास योजनाएं: लाखों घर बनाए।

स्वास्थ्य बीमा योजना: गरीबों को कवरेज।

जनधन खाते: वित्तीय समावेशन।

मनरेगा जैसी रोजगार योजनाएं: बिहार में मजबूत क्रियान्वयन।

इनसे परिवारों की आय स्थिर हुई और गरीबी रेखा से बाहर निकलने में मदद मिली। नीतीश कुमार ने इन योजनाओं को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत बनाया।

रंगराजन समिति का आधार, नीतीश की दृष्टि से

अध्ययन में पूर्व आरबीआई गवर्नर सी रंगराजन समिति की पद्धति अपनाई गई, लेकिन नीतीश कुमार की आर्थिक दृष्टि ने इसे प्रभावी बनाया। उदाहरण—

2011-12 में बिहार के ग्रामीण गरीब की आय सीमा 971 रुपये थी, शहरी 1229। 2022-23 में नीतीश की नीतियों से यह 1724 और 2277 रुपये हो गई।

यूपी में भी 890 से 1622 (ग्रामीण) और 1330 से 2429 (शहरी), नीतीश मॉडल से प्रेरित।

नीतीश कुमार की वजह से रिपोर्ट इतनी खास

भारत दशकों से गरीबी से जूझता रहा, लेकिन नीतीश कुमार के सुशासन ने तस्वीर बदली। यह रिपोर्ट उनकी आर्थिक उपलब्धियों का प्रमाण है, जो दिखाती है कि उनकी नीतियां भारत को "गरीबी ग्रस्त" से "नई ताकत" की ओर ले जा रही हैं।

आगे का रोडमैप: नीतीश कुमार की दिशा में

गरीबी में कमी के बावजूद शहरी असमानता और रोजगार संकट हैं, लेकिन नीतीश कुमार अब इन पर फोकस करेंगे। क्या उनकी नीतियां महंगाई और आबादी को नियंत्रित करेंगी? आंकड़े बताते हैं—नीतीश कुमार के नेतृत्व में भारत बदल रहा है, उम्मीदें और विकास दोनों बढ़ रहे हैं।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।