Ranchi Action : नामकुम हाजत मौत मामले में 5 पुलिसकर्मी सस्पेंड, SSP ने सौंपी दूसरे इंस्पेक्टर को जांच, लापरवाही पर गिरेगी गाज
रांची के नामकुम थाने में आरोपी जगाई मुंडा की मौत के बाद एसएसपी राकेश रंजन ने बड़ी कार्रवाई की है। एएसआई समेत पांच पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है। निष्पक्ष जांच के लिए दूसरे क्षेत्र के इंस्पेक्टर को कमान सौंपी गई है। पूरी खबर यहाँ पढ़ें।
रांची/नामकुम, 5 मार्च 2026 – झारखंड की राजधानी रांची के नामकुम थाना हाजत में हुए सनसनीखेज कांड के बाद पुलिस महकमे में बड़ी सर्जरी शुरू हो गई है। 12 साल के मासूम की हत्या के आरोपी जगाई मुंडा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत (कस्टोडियल डेथ) को रांची के एसएसपी राकेश रंजन ने बेहद गंभीरता से लिया है। इस मामले में प्रथम दृष्टया लापरवाही पाए जाने पर एक एएसआई समेत पांच पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
बदले की आग और मासूम का कत्ल: क्या था मामला?
शुरुआती जांच में यह पूरा मामला 'प्रतिशोध' की एक खौफनाक दास्तां के रूप में सामने आया है।
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सनसनीखेज अपहरण: आरोपी जगाई मुंडा ने पुरानी रंजिश और बदले की भावना में 12 साल के एक बच्चे का अपहरण किया था।
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साक्ष्य मिटाने की साजिश: पकड़े जाने के डर से उसने न केवल बच्चे की जान ली, बल्कि साक्ष्य छुपाने की नीयत से शव को ठिकाने लगा दिया था। इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था और पुलिस पर आरोपी को कड़ी सजा दिलाने का भारी दबाव था।
निष्पक्षता के लिए SSP का मास्टरस्ट्रोक
नामकुम थाने के भीतर हुई इस मौत ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। मामले की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए एसएसपी राकेश रंजन ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है:
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बाहरी जांच: इस मामले की जांच का जिम्मा नामकुम पुलिस से हटाकर दूसरे क्षेत्र के इंस्पेक्टर को सौंप दिया गया है।
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लापरवाही की पड़ताल: जांच टीम यह पता लगाएगी कि जब आरोपी हाजत में बंद था, तो उसकी सुरक्षा और निगरानी में चूक कैसे हुई? क्या संतरी की तैनाती में कोई कमी थी या ड्यूटी पर मौजूद अधिकारी सो रहे थे?
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मानवाधिकार का पालन: पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पूरी जांच राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) द्वारा तय किए गए कड़े मानकों के आधार पर की जाएगी।
इतिहास के पन्नों में पुलिस हिरासत और जवाबदेही
हिरासत में मौत का मामला हमेशा से भारतीय न्याय व्यवस्था के लिए चुनौती रहा है।
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कानूनी जवाबदेही: भारत के कानूनी इतिहास में 1990 के दशक के बाद से पुलिस कस्टडी को लेकर नियम काफी सख्त हुए हैं। थानों में सीसीटीवी कैमरा लगाना और हर दो घंटे में कैदी की स्थिति की रिपोर्ट देना अनिवार्य किया गया है।
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नामकुम का काला दिन: नामकुम थाने में हुई यह घटना उस भरोसे को तोड़ती है जो जनता पुलिस पर करती है। इतिहास गवाह है कि जब भी हिरासत में कोई अप्रिय घटना होती है, तो पूरी व्यवस्था की जवाबदेही तय करने के लिए 'विभागीय जांच' (Departmental Inquiry) एक अहम हथियार बनती है।
निलंबन की गाज: कौन-कौन चढ़ा भेंट?
एसएसपी की इस कार्रवाई के बाद नामकुम थाने में हड़कंप मचा हुआ है। निलंबित होने वाले अधिकारियों और कर्मियों की सूची इस प्रकार है:
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एएसआई प्रभुवन कुमार: ड्यूटी के दौरान लापरवाही का प्राथमिक आरोप।
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दो हवलदार: हाजत की सीधी निगरानी के लिए जिम्मेदार।
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दो आरक्षी (कॉन्स्टेबल): सुरक्षा चक्र में शामिल जवान।
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थाना प्रभारी पर तलवार: नामकुम थाना प्रभारी के खिलाफ भी कड़े अनुशासनिक एक्शन की तैयारी की जा रही है।
कार्रवाई का संक्षिप्त विवरण: एक नजर में
| विवरण | प्रमुख जानकारी |
| निलंबित पुलिसकर्मी | 05 (1 ASI, 2 हवलदार, 2 आरक्षी) |
| जांच का नेतृत्व | दूसरे क्षेत्र के स्वतंत्र इंस्पेक्टर |
| आरोपी का नाम | जगाई मुंडा (मृतक) |
| जुर्म | 12 वर्षीय बच्चे का अपहरण और हत्या |
| मानक | मानवाधिकार आयोग (NHRC) की गाइडलाइंस |
न्याय की दोहरी चुनौती
रांची पुलिस के सामने इस वक्त दोहरी चुनौती है। एक तरफ उस मासूम बच्चे को न्याय दिलाना जिसकी हत्या जगाई मुंडा ने की थी, और दूसरी तरफ अपनी ही कस्टडी में हुई मौत के दाग को धोना। एसएसपी राकेश रंजन की इस त्वरित कार्रवाई ने यह संदेश दिया है कि वर्दी की आड़ में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब रिम्स की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और नए जांच अधिकारी की फाइल ही तय करेगी कि असली दोषी कौन है।
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