Khunti Accident: खूंटी में काल बनी बाइक-ऑटो की भिड़ंत, जीजा-साले की मौके पर मौत, साप्ताहिक हाट जा रहे थे दोस्त
खूंटी के कर्रा में चेरवादाग मोड़ पर हुए दर्दनाक सड़क हादसे में जीजा और साले की जान चली गई है। साप्ताहिक हाट जाने के दौरान बाइक और ऑटो की सीधी टक्कर में दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हैं। पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।
खूंटी/कर्रा, 5 मार्च 2026 – झारखंड के खूंटी जिले के कर्रा थाना क्षेत्र में बुधवार को एक हृदयविदारक सड़क हादसे ने दो परिवारों के चिराग बुझा दिए। चेरवादाग मोड़ के पास एक तेज रफ्तार बाइक और ऑटो के बीच हुई आमने-सामने की भीषण टक्कर में जीजा और साले की घटनास्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे में दो अन्य लोग जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। साप्ताहिक बाजार (हाट) जाने की खुशी पल भर में चीख-पुकार और मातम में बदल गई।
हाट जाने की तैयारी और रास्ते में खड़ा था 'यमराज'
मृतकों की पहचान रांची जिले के नगड़ी थाना क्षेत्र के पांडू टोली निवासी मुन्ना उरांव और उनके जीजा रमेश (चिउर छापरा निवासी) के रूप में हुई है।
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रिश्तेदारी और मुलाक़ात: मुन्ना उरांव अपने दोस्त राजू कच्छप के साथ अपने जीजा रमेश के घर चिउर छापरा आया हुआ था।
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अंतिम सफर: बुधवार को तीनों एक ही बाइक पर सवार होकर जलटंडा साप्ताहिक हाट जाने के लिए निकले थे। उन्हें क्या पता था कि घर से चंद किलोमीटर दूर चेरवादाग मोड़ उनके जीवन का अंतिम पड़ाव साबित होगा।
टक्कर इतनी जबरदस्त कि बाइक के परखच्चे उड़ गए
विपरीत दिशा से आ रहे ऑटो और बाइक के बीच टक्कर इतनी भयानक थी कि आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण सहम गए।
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तत्काल मौत: बाइक चला रहे रमेश और पीछे बैठे उनके साले मुन्ना उरांव ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
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गंभीर घायल: मुन्ना का दोस्त राजू कच्छप और ऑटो चालक अनिल (पेपीर टोली निवासी) बुरी तरह घायल हो गए। ग्रामीणों की सक्रियता से दोनों को तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कर्रा पहुँचाया गया, जहाँ उनका इलाज चल रहा है।
खूंटी का कर्रा मार्ग: हादसों का पुराना इतिहास
खूंटी जिला अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन कर्रा-जलटंडा मार्ग अपनी संकरी सड़कों और अंधे मोड़ों के लिए कुख्यात रहा है।
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ऐतिहासिक संदर्भ: खूंटी और रांची के बीच का यह ग्रामीण बेल्ट साप्ताहिक हाट (बाजारों) के लिए जाना जाता है। अंग्रेजों के जमाने से ही यहाँ के हाट ग्रामीणों की अर्थव्यवस्था की रीढ़ रहे हैं।
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ट्रैफिक का बढ़ता दबाव: पिछले कुछ वर्षों में इन संकरी सड़कों पर ऑटो और दोपहिया वाहनों की संख्या कई गुना बढ़ गई है, लेकिन सड़कों का चौड़ीकरण उस गति से नहीं हुआ। चेरवादाग जैसे खतरनाक मोड़ अक्सर 'ब्लैक स्पॉट' साबित होते हैं, जहाँ रफ्तार पर नियंत्रण खोना जानलेवा बन जाता है।
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सुरक्षा की अनदेखी: एक ही बाइक पर तीन लोगों का सवार होना (ट्रिपल लोडिंग) अक्सर संतुलन बिगाड़ने का मुख्य कारण बनता है, जो इस मामले में भी दिखाई दे रहा है।
पुलिस की कार्रवाई और पोस्टमार्टम
सूचना मिलते ही कर्रा पुलिस की टीम घटनास्थल पर पहुँची। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर कागजी कार्रवाई पूरी की और पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल खूंटी भेज दिया। गुरुवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए हैं।
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जांच जारी: पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या ऑटो की रफ्तार अधिक थी या बाइक सवार ने मोड़ पर नियंत्रण खो दिया था।
हादसे का संक्षिप्त विवरण: एक नजर में
| विवरण | प्रमुख जानकारी |
| मृतकों के नाम | रमेश (जीजा) और मुन्ना उरांव (साला) |
| घायलों की संख्या | 02 (राजू कच्छप और ऑटो चालक अनिल) |
| हादसे का स्थान | चेरवादाग मोड़, कर्रा (खूंटी) |
| गंतव्य | जलटंडा साप्ताहिक हाट |
| थाना क्षेत्र | कर्रा पुलिस स्टेशन |
गाँव में पसरा सन्नाटा: परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
मुन्ना उरांव और रमेश की मौत की खबर जैसे ही उनके पैतृक गाँवों में पहुँची, वहां मातम पसर गया। होली के खुमार के बीच इस खबर ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया है। ग्रामीण सड़कों पर बढ़ती रफ्तार और अनियंत्रित ऑटो चालकों के खिलाफ प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
सावधानी ही बचाव है
खूंटी की यह घटना एक बार फिर चेतावनी दे रही है कि मोड़ पर रफ्तार और ट्रिपल लोडिंग का नतीजा कितना भयानक हो सकता है। साप्ताहिक हाट की खुशियाँ अब उन परिवारों के लिए ताउम्र का दर्द बन गई हैं। प्रशासन को चाहिए कि चेरवादाग जैसे मोड़ों पर गति अवरोधक और संकेत बोर्ड लगाए जाएं।
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