Cuttack Tragedy : कटक के SCB अस्पताल में लगी भीषण आग, 10 मरीजों की दर्दनाक मौत, आईसीयू बना श्मशान

ओडिशा के सबसे बड़े अस्पताल SCB मेडिकल कॉलेज के आईसीयू में सोमवार तड़के भीषण आग लगने से 10 मरीजों की मौत हो गई। शॉर्ट सर्किट की वजह से भड़की लपटों के बीच रेस्क्यू के दौरान 11 कर्मचारी भी झुलस गए। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को 25 लाख की सहायता राशि देने का ऐलान किया है। पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।

Mar 16, 2026 - 15:47
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Cuttack Tragedy : कटक के SCB अस्पताल में लगी भीषण आग, 10 मरीजों की दर्दनाक मौत, आईसीयू बना श्मशान
Cuttack Tragedy : कटक के SCB अस्पताल में लगी भीषण आग, 10 मरीजों की दर्दनाक मौत, आईसीयू बना श्मशान

कटक/ओडिशा, 16 मार्च 2026 – ओडिशा के कटक स्थित राज्य के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान, एससीबी (SCB) मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल से सोमवार तड़के एक रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई। अस्पताल के ट्रॉमा केयर विभाग के आईसीयू (ICU) में अचानक भड़की भीषण आग ने 10 गंभीर मरीजों की जिंदगी छीन ली। सुबह करीब 2:30 बजे जब पूरा अस्पताल गहरी नींद में था, तब वेंटिलेटर और लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर टिके मरीजों के लिए मौत ने दस्तक दी। धुएं के गुबार और आग की लपटों के बीच मची चीख-पुकार ने कटक को झकझोर कर रख दिया है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इसे राज्य के इतिहास की सबसे दुखद अस्पताल दुर्घटनाओं में से एक बताया है।

मौत का सन्नाटा और आग का तांडव: तड़के 3 बजे क्या हुआ?

हादसे की शुरुआत अस्पताल के सबसे संवेदनशील हिस्से यानी ट्रॉमा केयर यूनिट से हुई।

  • अचानक भड़की आग: अधिकारियों के अनुसार, शॉर्ट सर्किट की वजह से आईसीयू में चिंगारी उठी और चंद मिनटों में आग ने विकराल रूप ले लिया।

  • शिफ्टिंग के दौरान मौतें: आग लगने के बाद जब मरीजों को दूसरे वार्डों में ले जाया जा रहा था, तब ऑक्सीजन और बिजली कटने के कारण 7 मरीजों ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। बाद में तीन और मरीजों की इलाज के दौरान मृत्यु हो गई।

  • कर्मचारियों का साहस: मरीजों की जान बचाने की कोशिश में अस्पताल के 11 कर्मचारी गंभीर रूप से झुलस गए। उन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए 23 मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाला।

सरकारी सहायता और जांच के आदेश

घटना की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री मुकेश महालिंग मौके पर पहुँचे और पीड़ितों का हाल जाना।

  1. मुआवजे का ऐलान: राज्य सरकार ने इस अग्निकांड में जान गंवाने वाले प्रत्येक मृतक के परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक मदद देने की घोषणा की है।

  2. हाई-लेवल जांच: मुख्यमंत्री ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने साफ किया कि शॉर्ट सर्किट शुरुआती कारण लग रहा है, लेकिन फायर ऑडिट में चूक की भी गहराई से जांच होगी।

  3. घायलों का मुफ्त इलाज: हादसे में झुलसे कर्मचारियों और अन्य मरीजों के इलाज का पूरा खर्च राज्य सरकार उठाएगी।

SCB अस्पताल और ओडिशा के 'मेडिकल फायर' हादसों का काला अतीत

एससीबी मेडिकल कॉलेज (श्री रामचंद्र भंज मेडिकल कॉलेज) का इतिहास 1944 से भी पुराना है। यह पूर्वी भारत के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में गिना जाता है।

  • विरासत और जिम्मेदारी: राजा रामचंद्र भंज देव के दान से बने इस अस्पताल ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भी चिकित्सा सेवा दी थी। लेकिन ऐतिहासिक रूप से, इतने पुराने बुनियादी ढांचे में नई मशीनों और बिजली के बढ़ते लोड ने हमेशा 'फायर सेफ्टी' के लिए चुनौती पेश की है।

  • पुराने जख्म: ओडिशा के अस्पताल अग्निकांडों का इतिहास काफी डरावना रहा है। 2016 में भुवनेश्वर के सम (SUM) हॉस्पिटल में लगी आग ने 22 लोगों की जान ली थी, जिसने पूरे देश को हिला दिया था। एससीबी की आज की घटना ने उस पुराने जख्म को फिर से कुरेद दिया है। कटक जैसे घनी आबादी वाले शहर में इतने बड़े संस्थान में आग बुझाने के पर्याप्त संसाधन होने के बावजूद, समय रहते काबू न पाना सिस्टम की पुरानी कमियों को उजागर करता है। क्या इतिहास से हमने कुछ नहीं सीखा? यह सवाल आज हर कटक वासी पूछ रहा है।

रेस्क्यू ऑपरेशन: जब देवदूत बने दमकल कर्मी

दमकल की कई गाड़ियों ने सुबह 4 बजे तक आग पर पूरी तरह काबू पा लिया था।

  • अंधेरे में संघर्ष: अस्पताल की बिजली कट जाने के कारण टॉर्च की रोशनी में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया।

  • दहशत का माहौल: मरीजों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। कई लोग अपने मरीजों को गोद में उठाकर बाहर भागते नजर आए। अस्पताल परिसर में अब भी भारी पुलिस बल और राहत टीमें तैनात हैं।

कटक के एससीबी अस्पताल में हुई यह त्रासदी केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक बड़ी चेतावनी है। जो अस्पताल जीवन देने के लिए बने हैं, अगर वहीं मौत का तांडव होने लगे, तो भरोसा किस पर किया जाए? 10 परिवारों का उजड़ना और 25 लाख का मुआवजा किसी की कमी पूरी नहीं कर सकता। जरूरत है राज्य के सभी बड़े अस्पतालों के फायर सेफ्टी सिस्टम का दोबारा ऑडिट करने की, ताकि भविष्य में कोई और आईसीयू 'गैस चैंबर' न बन सके।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।