Adityapur Election: आदित्यपुर में डिप्टी मेयर चुनाव का रोमांचक अंत, 1 वोट से पलटी बाजी, मलखान सिंह के भतीजे अंकुर सिंह ने मारी बाजी
आदित्यपुर नगर निगम के डिप्टी मेयर पद पर अंकुर सिंह ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। केवल 1 वोट के अंतर से अर्चना सिंह को हराकर उन्होंने सत्ता की कुर्सी संभाली। ईचागढ़ के पूर्व विधायक मलखान सिंह के भतीजे अंकुर सिंह की इस जीत और आदित्यपुर के राजनीतिक समीकरणों की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।
आदित्यपुर/सरायकेला-खरसावां, 16 मार्च 2026 – झारखंड की सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक नगर पालिकाओं में से एक, आदित्यपुर नगर निगम को सोमवार को अपना नया डिप्टी मेयर मिल गया है। एक बेहद कड़े और सांसें रोक देने वाले मुकाबले में वार्ड नंबर 18 के पार्षद अंकुर सिंह ने जीत का परचम लहराया है। यह चुनाव किसी फिल्म क्लाइमेक्स से कम नहीं था, जहाँ हार और जीत का फैसला महज एक वोट की पर्ची ने तय किया। अंकुर सिंह ने अपनी प्रतिद्वंद्वी अर्चना सिंह को मात देकर डिप्टी मेयर की कुर्सी पर कब्जा जमा लिया है। इस जीत के साथ ही आदित्यपुर के राजनीतिक गलियारों में एक नए युवा नेतृत्व का उदय माना जा रहा है।
17 बनाम 18 का मुकाबला: कैसे मिली जीत?
सोमवार सुबह से ही आदित्यपुर नगर निगम कार्यालय के बाहर गहमागहमी का माहौल था। पार्षदों के बीच गोलबंदी और रणनीति का दौर जारी था।
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कांटे की टक्कर: मतदान के बाद जब गिनती शुरू हुई, तो मुकाबला बराबरी पर चलता दिखा। अंततः अंकुर सिंह को 18 वोट मिले, जबकि उनकी मुख्य प्रतिद्वंद्वी वार्ड नंबर 29 की पार्षद अर्चना सिंह को 17 मतों से संतोष करना पड़ा।
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दावेदारी और जीत: हाल ही में हुए चुनाव में वार्ड पार्षद बनने के तुरंत बाद अंकुर सिंह ने डिप्टी मेयर पद के लिए अपनी मजबूत दावेदारी पेश की थी। युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता और कुशल रणनीतिक मेल-मिलाप ने उन्हें जीत की दहलीज तक पहुँचा दिया।
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जश्न का माहौल: परिणाम घोषित होते ही आदित्यपुर की सड़कों पर समर्थकों और युवाओं का हुजूम उमड़ पड़ा। ढोल-नगाड़ों और अबीर-गुलाल के साथ नए डिप्टी मेयर का स्वागत किया गया।
विरासत और समाज सेवा: कौन हैं अंकुर सिंह?
अंकुर सिंह का राजनीति से पुराना और गहरा नाता है। वह ईचागढ़ के दिग्गज नेता और पूर्व विधायक मलखान सिंह उर्फ अरविंद सिंह के भतीजे हैं।
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राजनीतिक पृष्ठभूमि: मलखान सिंह का कोल्हान की राजनीति में बड़ा रसूख रहा है। अंकुर ने अपनी शुरुआती राजनीतिक शिक्षा अपने चाचा के सानिध्य में ही प्राप्त की है।
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जमीनी जुड़ाव: चुनाव मैदान में उतरने से पहले अंकुर कई सालों से समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय थे। स्थानीय लोगों के बीच उनकी छवि एक ऐसे नेता की है जो संकट के समय हमेशा उपलब्ध रहते हैं।
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संकल्प: जीत के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया में अंकुर सिंह ने कहा, "आदित्यपुर की तरक्की ही मेरी पहली प्राथमिकता है। मैं नगर निगम के विकास कार्यों में अपना सर्वस्व योगदान दूँगा।"
आदित्यपुर नगर निगम और सत्ता का संघर्ष
आदित्यपुर का इतिहास केवल फैक्ट्रियों और उद्योगों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र राजनीतिक चेतना का केंद्र भी रहा है।
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नगर निगम का दर्जा: आदित्यपुर को नगर निगम का दर्जा मिलना यहाँ के विकास की दिशा में एक बड़ा मोड़ था। ऐतिहासिक रूप से यहाँ की राजनीति में हमेशा दो गुटों के बीच वर्चस्व की लड़ाई रही है।
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मलखान सिंह का प्रभाव: 90 के दशक और उसके बाद भी कोल्हान की राजनीति में मलखान सिंह के परिवार का एक विशेष प्रभाव रहा है। अंकुर सिंह की यह जीत उसी राजनीतिक विरासत की अगली कड़ी मानी जा रही है। पूर्व में हुए चुनावों का इतिहास देखें तो यहाँ 'निर्दलीय' और 'गठबंधन' की राजनीति ने कई बार बड़े उलटफेर किए हैं। 17-18 का यह आंकड़ा यह भी दर्शाता है कि निगम के भीतर पक्ष और विपक्ष के बीच कितना मामूली अंतर है, जो भविष्य के फैसलों में निर्णायक साबित होगा।
तरक्की का नया खाका: क्या बदलेगा आदित्यपुर?
नवनियुक्त डिप्टी मेयर के सामने चुनौतियों का अंबार है। आदित्यपुर की जर्जर सड़कें, जल निकासी की समस्या और साफ-सफाई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर जनता तुरंत समाधान चाहती है।
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युवा विजन: अंकुर सिंह के पास युवाओं की एक बड़ी टीम है। उनका लक्ष्य आदित्यपुर को एक 'स्मार्ट इंडस्ट्रियल टाउन' के रूप में विकसित करना है।
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विकास में योगदान: उन्होंने आश्वासन दिया है कि वे मेयर और पार्षदों के साथ मिलकर रुकी हुई योजनाओं को गति देंगे।
आदित्यपुर नगर निगम के इस चुनाव ने यह साबित कर दिया है कि राजनीति में एक-एक वोट की कीमत क्या होती है। अंकुर सिंह की जीत ने न केवल उनके परिवार की राजनीतिक साख को बढ़ाया है, बल्कि आदित्यपुर की जनता को एक युवा और ऊर्जावान प्रतिनिधि भी दिया है। अब देखना यह होगा कि अंकुर सिंह अपनी जीत के इस 'एक वोट' के अंतर को विकास के 'सौ फीसदी' काम में कैसे बदलते हैं।
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