Jamshedpur Suicide : निर्मलनगर में प्लंबर विजय दास ने फंदे से लटककर दी जान, पत्नी बच्चों को ट्यूशन छोड़ने गई थी और पीछे हो गया महा-हादसा
जमशेदपुर के सीतारामडेरा निर्मलनगर में 53 वर्षीय प्लंबर विजय दास ने मानसिक बीमारी के चलते फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। एमजीएम अस्पताल से छुट्टी मिलने के अगले ही दिन हुए इस खौफनाक हादसे और टीएमएच की लाइव ऑन-फील्ड विस्तृत रिपोर्ट यहाँ देखें।
जमशेदपुर, 27 मई 2026 – लौहनगरी जमशेदपुर के सीतारामडेरा थाना क्षेत्र से एक बेहद दुखद, सनसनीखेज और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ के निर्मलनगर अंचल में रहने वाले 53 वर्षीय स्थानीय निवासी विजय दास ने मंगलवार की शाम अपने ही घर में फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली है। जब यह खौफनाक वाकया घटित हुआ, उस वक्त मृतक की पत्नी अपने बच्चों को ट्यूशन छोड़ने गई हुई थी। घर लौटने पर जब बहुत देर तक दरवाजा नहीं खुला, तो पड़ोसियों के सहयोग से दरवाजा तोड़ा गया, जिसके बाद भीतर का दृश्य देखकर सबके होश उड़ गए। आनन-फानन में परिजन उन्हें फंदे से उतारकर इलाज के लिए टाटा मुख्य अस्पताल (TMH) लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने गहन जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। बुधवार को पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है, जिसके बाद से पूरे निर्मलनगर इलाके में भारी सन्नाटा और मातम पसरा हुआ है।
हादसे की लाइव इनसाइड स्टोरी: एमजीएम से मिली थी छुट्टी, पत्नी के बाहर जाते ही लगा लिया फंदा
सीतारामडेरा अंचल और टीएमएच सुरक्षा विंग के आंतरिक प्रशासनिक सूत्रों से मिली लाइव ऑन-फील्ड इनपुट के अनुसार, यह दर्दनाक हादसा पूरी तरह से मानसिक तनाव और अवसाद से जुड़ा हुआ है।
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अस्पताल से डिस्चार्ज होते ही हादसा: मृतक विजय दास पेशे से एक प्लंबर थे और पिछले काफी समय से उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं चल रही थी। उनका इलाज जमशेदपुर के प्रसिद्ध एमजीएम (MGM) अस्पताल में चल रहा था। बीते गुरुवार को ही उन्हें गंभीर स्थिति में एमजीएम में भर्ती कराया गया था, जहां से सोमवार को उन्हें छुट्टी (Discharge) दी गई थी।
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सूने घर में खौफनाक कदम: मंगलवार शाम को विजय दास घर पर अकेले थे। उनकी पत्नी बच्चों को पढ़ाने के लिए ट्यूशन छोड़ने बाहर गई हुई थी। इसी सूनेपन का फायदा उठाकर विजय ने कमरे के भीतर फांसी लगा ली।
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दरवाजा तोड़कर घुसे पड़ोसी: जब पत्नी वापस घर लौटी, तो मुख्य दरवाजा अंदर से पूरी तरह लॉक था। बहुत देर तक आवाज देने और कुंडी खटखटाने के बाद भी जब कोई हलचल नहीं हुई, तो महिला ने शोर मचाया। शोर सुनकर जुटे पड़ोसियों ने भारी मशक्कत के बाद जब दरवाजा तोड़ा, तो विजय फंदे से झूल रहे थे। तीन बच्चों के सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ चुका था।
सरकारी अस्पतालों में 'मानसिक स्वास्थ्य फॉलो-अप' और कम्युनिटी काउंसिलिंग ग्रिड समय की मांग
प्लंबर विजय दास की इस दर्दनाक मौत ने एक बार फिर जमशेदपुर के नागरिक समाज और स्वास्थ्य महकमे की आंखें खोल दी हैं। तीन मासूम बच्चों और एक बेसहारा पत्नी के आंसू कभी कम नहीं हो सकते, लेकिन इस घटना से सबक लेकर भविष्य में ऐसे डार्क हादसों को रोका जा सकता है। 2026 के इस आधुनिक युग में जब हम चिकित्सा विज्ञान की बड़ी बातें करते हैं, तब अवसाद के कारण एक हुनरमंद मजदूर का इस तरह चले जाना प्रशासनिक विफलता है। सीतारामडेरा थाना पुलिस और जिला स्वास्थ्य समिति को तुरंत संज्ञान लेते हुए एमजीएम जैसे बड़े अस्पतालों से डिस्चार्ज होने वाले मानसिक रूप से अस्वस्थ मरीजों के लिए 'कंपलसरी होम-फॉलो-अप' (Compulsory Home Follow-up Grid) और टेली-काउंसिलिंग की व्यवस्था अनिवार्य करनी चाहिए। इसके साथ ही, बस्तियों के स्तर पर सामाजिक संगठनों को सक्रिय करना होगा, तभी जमशेदपुर के इस ऐतिहासिक, श्रमिक बहुल और घनी आबादी वाले भूभाग को मानसिक बीमारी के इस जानलेवा और डार्क इतिहास से पूरी तरह मुक्त कराया जा सकेगा।
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