Giridih Crash: गरुड़ पुराण सुनकर लौट रहे थे घर, पुल के पास नदी की खाई में गिरी कार, सुकर मंडल की दर्दनाक मौत
गिरिडीह के भरकट्टा में समधिन के श्राद्धकर्म से लौट रहे सुकर मंडल की कार नदी की खाई में जा गिरी। घर से महज कुछ दूरी पर हुए इस भीषण हादसे और परिवार में मचे कोहराम की पूरी रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी श्रद्धा और मौत के इस अजीब संयोग की हकीकत जानने से चूक जाएंगे।
गिरिडीह, 19 जनवरी 2026 – नियति का खेल भी बड़ा अजीब होता है। गिरिडीह के भरकट्टा ओपी क्षेत्र में एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ जीवन की नश्वरता का पाठ (गरुड़ पुराण) सुनकर घर लौट रहे एक व्यक्ति की खुद की जीवनलीला समाप्त हो गई। रविवार रात करीब 9 बजे, चिताखारो-खेदवारा नदी पुल के समीप एक अनियंत्रित कार खाई में जा गिरी। इस भीषण हादसे में कार मालिक सह चालक सुकर मंडल (58 वर्ष) की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके साथ सवार दो अन्य युवक जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। घर से महज पौन किलोमीटर पहले हुई इस मौत ने पूरे इलाके को सन्न कर दिया है।
श्राद्धकर्म से लौटते वक्त 'काल' बनी नदी की खाई
हादसा उस वक्त हुआ जब सड़कों पर सन्नाटा पसरा था और लोग कड़ाके की ठंड में अपने घरों में दुबके थे।
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अंतिम यात्रा का संयोग: मृतक सुकर मंडल अपने समधी चुरामन मंडल की पत्नी के श्राद्धकर्म में शामिल होने खेदवारा गए थे। वहां गरुड़ पुराण का पाठ सुनकर वे अपनी कार (JH 10C 9569) से वापस चिताखारो लौट रहे थे।
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जोरदार आवाज और चीख-पुकार: जैसे ही कार पुल के समीप पहुँची, संतुलन बिगड़ गया और वाहन सीधे खाई में जा गिरा। सन्नाटे को चीरती हुई कार गिरने की आवाज सुनकर ग्रामीण घरों से बाहर निकले।
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बचाव कार्य: अंधेरी खाई में कार के भीतर से केवल चीखने की आवाजें आ रही थीं। ग्रामीणों ने तुरंत भरकट्टा ओपी प्रभारी अमन सिंह और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को सूचना दी। कड़ी मशक्कत के बाद तीनों को कार से बाहर निकाला गया।
अस्पताल पहुँचने से पहले थमी सांसें: उजड़ गया सुकर का संसार
हादसे के बाद घायलों और सुकर मंडल को तुरंत निजी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन विधि का विधान कुछ और ही था।
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डॉक्टर की घोषणा: अस्पताल पहुँचते ही चिकित्सकों ने सुकर मंडल को मृत घोषित कर दिया। वहीं घायलों में वेराहीटांड निवासी मनोज मरांडी (40) और उनके एक रिश्तेदार का इलाज जारी है।
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बेसुध हुई पत्नी: सुकर मंडल अपने पीछे तीन पुत्र और एक पुत्री का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनकी पत्नी जसिया देवी की चीखों से पूरा गांव गमगीन है। वे बार-बार बेहोश हो जा रही हैं, क्योंकि किसी ने सोचा भी नहीं था कि गरुड़ पुराण सुनने गया व्यक्ति खुद ही अनंत यात्रा पर निकल जाएगा।
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पुलिस कार्रवाई: पुलिस ने सोमवार को शव का पोस्टमार्टम सदर अस्पताल में कराया और कागजी प्रक्रिया पूरी की।
गिरिडीह सड़क हादसा: मुख्य विवरण (Accident Snapshot)
| विवरण | जानकारी (Details) |
| हादसे का स्थान | चिताखारो-खेदवारा नदी पुल, भरकट्टा |
| मृतक का नाम | सुकर मंडल (58 वर्ष, चिताखारो) |
| वाहन संख्या | JH 10C 9569 (कार) |
| घायलों की पहचान | मनोज मरांडी एवं अन्य |
| घटना का संदर्भ | श्राद्धकर्म से वापसी के दौरान |
इतिहास का पन्ना: भरकट्टा और खेदवारा का भौगोलिक 'डेथ ट्रैप'
गिरिडीह का भरकट्टा क्षेत्र अपनी ऊबड़-खाबड़ भौगोलिक संरचना और संकरी सड़कों के लिए जाना जाता है। 19वीं शताब्दी में यहाँ के रास्ते बैलगाड़ियों के लिए बनाए गए थे, जिन्हें बाद में बिना किसी बड़े तकनीकी बदलाव के पक्की सड़कों में तब्दील कर दिया गया। इतिहास गवाह है कि चिताखारो-खेदवारा मार्ग पर स्थित नदी पुल के समीप सुरक्षा घेरे (Guard Rails) की कमी हमेशा से बड़ी समस्या रही है। साल 2014 और 2019 में भी इसी पुल के पास अंधेरे के कारण गाड़ियाँ असंतुलित होकर खाई में गिरी थीं। गरुड़ पुराण की परंपरा सनातनी समाज में मृत्यु के बाद शांति के लिए पढ़ी जाती है, और गिरिडीह के ग्रामीण अंचलों में यह एक महत्वपूर्ण सामाजिक अनुष्ठान है। लेकिन 2026 की यह घटना एक कड़वा ऐतिहासिक अध्याय बन गई है, जहाँ एक पुल की रेलिंग न होने की वजह से एक अनुभवी चालक अपनी जान गंवा बैठा।
प्रशासन और ग्रामीणों की मुस्तैदी
इस दुखद घड़ी में स्थानीय लोगों और पुलिस ने जिस तरह तालमेल दिखाया, उसकी सराहना हो रही है।
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रात भर गश्त: ओपी प्रभारी अमन सिंह ने रात को ही शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी थी।
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ब्लैक स्पॉट की मांग: ग्रामीणों ने मांग की है कि इस नदी पुल के समीप पर्याप्त रोशनी और मजबूत रेलिंग लगाई जाए ताकि भविष्य में सुकर मंडल जैसा हश्र किसी और का न हो।
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परिजनों का दुख: सुकर मंडल के सभी बच्चे बालिग हैं, लेकिन पिता का साया अचानक उठ जाने से घर के भविष्य पर सवालिया निशान लग गए हैं।
घर की दहलीज से कुछ कदम दूर थी मौत
पौन किलोमीटर—यही वह दूरी थी जिसे तय करने से पहले सुकर मंडल का सफर हमेशा के लिए थम गया। यह हादसा हमें याद दिलाता है कि हाईवे और ग्रामीण पुलों पर रात का सफर कितना जोखिम भरा हो सकता है।
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