Jawara Puja 2026: सोनारी में जँवारा पूजा का भव्य विसर्जन, माँ बम्लेश्वरी के जयघोष से गूँजा जमशेदपुर, उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
जमशेदपुर के सोनारी में श्री श्री सार्वजनिक नवरात्रि जँवारा पूजा का भव्य समापन हो गया है। माँ बम्लेश्वरी की कृपा से आयोजित नौ दिवसीय महोत्सव, विसर्जन शोभायात्रा और आज होने वाले 'बालक भोग' की पूरी भक्तिमय रिपोर्ट यहाँ देखें।
जमशेदपुर/सोनारी, 28 मार्च 2026 – लौहनगरी जमशेदपुर का सोनारी क्षेत्र पिछले नौ दिनों से भक्ति और आध्यात्म के जिस उल्लास में डूबा था, आज उसका विधिवत समापन होने जा रहा है। उपकार संघ कमल चौक, बुधराम मोहल्ला (सोनारी) द्वारा आयोजित श्री श्री सार्वजनिक नवरात्रि जँवारा पूजा माँ बम्लेश्वरी की असीम अनुकंपा से सफलतापूर्वक संपन्न हुई। चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर आयोजित इस महोत्सव ने न केवल धार्मिक अनुष्ठानों की भव्यता दिखाई, बल्कि सामाजिक एकता की भी मिसाल पेश की। विसर्जन शोभायात्रा के दौरान महिलाओं के सिर पर रखे ज्योति कलश और भक्तों के उत्साह ने पूरे सोनारी को शक्ति पीठ में तब्दील कर दिया था।
कलश से विसर्जन तक: नौ दिनों की दिव्य यात्रा
महोत्सव की शुरुआत 19 मार्च को भव्य उद्घाटन के साथ हुई थी, जिसके बाद से ही क्षेत्र का वातावरण भक्तिमय हो गया था।
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अखंड ज्योति का प्रताप: 20 मार्च को कलश स्थापना के साथ प्रज्वलित की गई अखंड ज्योति ने नौ दिनों तक भक्तों का मार्ग प्रशस्त किया। माँ शैलपुत्री से लेकर माँ सिद्धिदात्री तक, हर स्वरूप की विशेष पूजा-अर्चना की गई।
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गर्भ गृह के पट: महाष्टमी (26 मार्च) को पूर्णाहुति के बाद माँ महागौरी के पूजन के साथ ही महिलाओं के लिए गर्भ गृह के द्वार खोल दिए गए। इसके बाद शुरू हुआ 'महाभोग' का वितरण, जो देर रात तक अनवरत चलता रहा।
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विशाल शोभायात्रा: 27 मार्च (महानवमी) को कपाली नदी की ओर निकली विसर्जन शोभायात्रा की भव्यता देखते ही बन रही थी। हजारों की संख्या में शहरवासी इस यात्रा का हिस्सा बने, जिसमें पारंपरिक जँवारा और ज्योति कलश आकर्षण का केंद्र रहे।
आज 'बालक भोग' और दशमी जुलूस: समापन की तैयारी
आज, 28 मार्च (दशमी) को इस महोत्सव का अंतिम चरण संपन्न हो रहा है, जिसमें भारी भीड़ जुटने की संभावना है।
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बालक भोग: आज दोपहर 1:00 बजे से विशेष 'बालक भोग' का आयोजन किया जा रहा है। मान्यता है कि नौ कन्याओं के पूजन के बाद बटुक भैरव के रूप में बालकों को जिमाने से पूजा पूर्ण होती है।
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भव्य विदाई: शाम 4:00 बजे से दशमी जुलूस का स्वागत किया जाएगा। इसके साथ ही इस वर्ष की जँवारा पूजा का विधिवत समापन होगा और माँ अगले वर्ष पुनः आने के वादे के साथ विदा होंगी।
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कन्या पूजन: इससे पूर्व नवमी को नौ कुंवारी कन्याओं का विधि-विधान से पूजन कर उन्हें उपहारों के साथ विदा किया गया, जो देवी के साक्षात स्वरूप का प्रतीक माना जाता है।
जमशेदपुर में जँवारा पूजा और छत्तीसगढ़ी संस्कृति का इतिहास
जमशेदपुर की जँवारा पूजा यहाँ की बहुसांस्कृतिक पहचान का एक अभिन्न हिस्सा है, जिसका गहरा नाता छत्तीसगढ़ की परंपराओं से है।
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माँ बम्लेश्वरी की महिमा: डोंगरगढ़ (छत्तीसगढ़) स्थित माँ बम्लेश्वरी के प्रति यहाँ के लोगों की अगाध श्रद्धा है। उपकार संघ द्वारा आयोजित यह पूजा दशकों से उसी परंपरा को जीवित रखे हुए है।
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जँवारा का महत्व: जँवारा (जौ के छोटे पौधे) को खुशहाली और हरियाली का प्रतीक माना जाता है। इसे बोने और नौ दिनों तक इसकी सेवा करने की परंपरा जमशेदपुर के सोनारी और अन्य इलाकों में बहुत प्राचीन है।
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सामुदायिक एकता: कमल चौक का यह आयोजन केवल एक मोहल्ले तक सीमित नहीं रहता, बल्कि साकची, बिष्टुपुर और कदमा से भी लोग यहाँ माता का आशीर्वाद लेने पहुँचते हैं। 19 मार्च से शुरू हुआ यह उत्सव हर साल अपनी भव्यता के नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।
समिति का योगदान: सफल आयोजन के पीछे के नायक
पूजा समिति के अध्यक्ष सतपाल साहू के नेतृत्व में इस वर्ष का आयोजन ऐतिहासिक रहा।
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समर्पित टीम: उपाध्यक्ष उमाशंकर शर्मा, महासचिव विश्वकर्मा वर्मा और सचिव राजीव वर्मा (छोटू) ने प्रशासन के साथ मिलकर सुरक्षा और अनुशासन की कमान संभाली।
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आर्थिक प्रबंधन: कोषाध्यक्ष नरेंद्र साहू (बंटी), सह-कोषाध्यक्ष बालकृष्ण साहू और साहिल शर्मा ने पूरे नौ दिनों के खर्च और दान की पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित की।
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सेवादारों का आभार: समिति ने स्थानीय जनता और समर्पित सेवादारों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि माँ के आशीर्वाद के बिना यह संभव नहीं था।
सोनारी के बुधराम मोहल्ला में संपन्न हुई जँवारा पूजा श्रद्धा और विश्वास का वह संगम है जो शहर को नई ऊर्जा देता है। विसर्जन के दौरान आँखों में नमी और जुबां पर 'जय माता दी' का उद्घोष यह बताता है कि माँ बम्लेश्वरी के प्रति लोगों का जुड़ाव कितना गहरा है। आज होने वाला 'बालक भोग' इस महोत्सव की अंतिम मधुर याद होगी। क्या आप भी आज दोपहर माँ का महाप्रसाद ग्रहण करने सोनारी पहुँच रहे हैं? फिलहाल, माँ की विदाई के साथ ही भक्तों ने अगले वर्ष के इंतजार की तैयारी शुरू कर दी है।
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