Cyber Arrest: रांची में 10 लाख की बड़ी साइबर ठगी, बिहार के दरभंगा से दबोचा गया एजेंट, फर्जी सिम से बुना था 'अदृश्य' जेल का जाल

रांची में 'डिजिटल अरेस्ट' का खौफ दिखाकर एक व्यक्ति से 10 लाख रुपये से अधिक की ठगी की गई है। फर्जी सिम कार्ड के जरिए सरकारी अधिकारी बनकर डराने वाले इस गिरोह और बिहार के दरभंगा से हुई गिरफ्तारी की पूरी इनसाइट रिपोर्ट यहाँ देखें।

Mar 25, 2026 - 15:04
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Cyber Arrest:  रांची में 10 लाख की बड़ी साइबर ठगी, बिहार के दरभंगा से दबोचा गया एजेंट, फर्जी सिम से बुना था 'अदृश्य' जेल का जाल
Cyber Arrest: रांची में 10 लाख की बड़ी साइबर ठगी, बिहार के दरभंगा से दबोचा गया एजेंट, फर्जी सिम से बुना था 'अदृश्य' जेल का जाल

रांची, 25 मार्च 2026 – झारखंड की राजधानी रांची में साइबर अपराधियों ने ठगी का एक ऐसा मायाजाल बुना, जिसने एक आम नागरिक को 'डिजिटल कैद' में डालकर उसकी जीवनभर की कमाई लूट ली। खुद को सरकारी एजेंसी का बड़ा अधिकारी बताकर ठगों ने पीड़ित को इस कदर डराया कि उसने डर के मारे 10,00,047 रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए। रांची साइबर क्राइम थाना में मामला दर्ज होते ही पुलिस ने एक्शन मोड में आते हुए बिहार के दरभंगा से एक पॉइंट ऑफ सेल (POS) एजेंट को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी इस बड़े सिंडिकेट की पहली कड़ी मानी जा रही है, जो फर्जी सिम कार्ड के जरिए देश भर में अपना नेटवर्क चला रहे हैं।

वीडियो कॉल पर 'कैद' और 10 लाख की चपत: कैसे हुई ठगी?

'डिजिटल अरेस्ट' वर्तमान समय में साइबर ठगों का सबसे नया और घातक हथियार बन गया है।

  • अधिकारी बनकर कॉल: ठगों ने पीड़ित को फोन कर खुद को सीबीआई या पुलिस का अधिकारी बताया। उन्होंने दावा किया कि पीड़ित का नाम किसी गंभीर अंतरराष्ट्रीय अपराध या ड्रग मनी लॉन्ड्रिंग में आया है।

  • मानसिक दबाव: वीडियो कॉल के जरिए पीड़ित को एक कमरे में बंद रहने का आदेश दिया गया, जिसे ठग 'डिजिटल अरेस्ट' कहते हैं। उसे डराया गया कि अगर उसने कैमरा बंद किया या किसी को बताया, तो उसे तुरंत जेल भेज दिया जाएगा।

  • पैसों की उगाही: केस को रफा-दफा करने के नाम पर पीड़ित से 10 लाख रुपये से अधिक की मांग की गई। घबराहट में पीड़ित ने ठगों द्वारा दिए गए विभिन्न बैंक खातों में पूरी रकम ट्रांसफर कर दी।

दरभंगा से गिरफ्तारी: फर्जी सिम कार्ड का 'किंगपिन'

रांची पुलिस की विशेष टीम ने तकनीकी जांच के आधार पर इस गिरोह के फुटप्रिंट्स का पीछा किया, जो बिहार के दरभंगा तक जा पहुँचे।

  1. POS एजेंट गिरफ्तार: पुलिस ने दरभंगा से एक ऐसे एजेंट को दबोचा है जो फर्जी दस्तावेजों पर सिम कार्ड एक्टिवेट करता था।

  2. सिम का खेल: जांच में पता चला कि इन्हीं फर्जी सिम कार्डों का इस्तेमाल कर ठगों ने पीड़ित को कॉल किए थे और बैंक खाते ऑपरेट किए थे।

  3. नेटवर्क का विस्तार: पुलिस को अंदेशा है कि यह एजेंट जामताड़ा और मेवात जैसे साइबर ठगी के गढ़ों से जुड़े गिरोहों को 'कच्चा माल' (सिम और डेटा) सप्लाई कर रहा था।

डिजिटल अरेस्ट का इतिहास और कानूनी हकीकत

'डिजिटल अरेस्ट' जैसा शब्द भारतीय कानून की किसी भी किताब में मौजूद नहीं है, फिर भी लोग इसके शिकार हो रहे हैं।

  • कब शुरू हुआ यह खेल: भारत में पिछले दो वर्षों में डिजिटल अरेस्ट के मामलों में 300% की वृद्धि हुई है। इसकी शुरुआत छोटे स्तर पर केवाईसी अपडेट के नाम से हुई थी, जो अब 'अरेस्ट' के खौफनाक मोड़ पर पहुँच गई है।

  • कानून क्या कहता है: भारतीय दंड संहिता (IPC) या नई भारतीय न्याय संहिता (BNS) में किसी को भी वीडियो कॉल पर 'गिरफ्तार' रखने का कोई प्रावधान नहीं है। कोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर न तो गिरफ्तारी की धमकी देती है और न ही पैसे की मांग करती है।

  • जागरूकता की कमी: ठग अक्सर यूनिफॉर्म पहनकर या पीछे सरकारी दफ्तर जैसा बैकग्राउंड लगाकर लोगों को झांसे में लेते हैं, जिससे पढ़े-लिखे लोग भी भ्रमित हो जाते हैं।

पुलिस की चेतावनी: ठगी का शिकार होने पर क्या करें?

रांची साइबर पुलिस ने इस मामले के बाद एक सख्त एडवाइजरी जारी की है।

  • 1930 का सहारा: अगर आपके साथ कोई भी डिजिटल धोखाधड़ी होती है, तो बिना देरी किए 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें। शुरुआती 'गोल्डन ऑवर' में कॉल करने से पैसे वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

  • ऑनलाइन पोर्टल: आप सीधे www.cybercrime.gov.in पर जाकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

  • पहचान की पुष्टि: अगर कोई खुद को अधिकारी बताए, तो उसका आईडी कार्ड मांगें या नजदीकी थाने जाकर पुष्टि करें। कोई भी असली अधिकारी वीडियो कॉल पर आपकी 'अदालत' नहीं लगाएगा।

रांची में हुई 10 लाख की यह ठगी हमें चेतावनी देती है कि साइबर अपराधी अब तकनीक नहीं, बल्कि हमारी 'मनोवैज्ञानिक कमजोरी' और 'डर' से खेल रहे हैं। दरभंगा से हुई गिरफ्तारी ने यह साफ कर दिया है कि इन ठगों के जड़ें पड़ोसी राज्यों तक फैली हुई हैं। डिजिटल अरेस्ट महज एक कल्पना है, जिसका मकसद केवल आपकी मेहनत की कमाई लूटना है। क्या रांची पुलिस इस गिरोह के मास्टरमाइंड तक पहुँच पाएगी? फिलहाल, आरोपी एजेंट से पूछताछ जारी है और पुलिस की कई टीमें छापेमारी कर रही हैं। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।