Ranchi Cyber: रांची में लिंक छूते ही उड़े 2 लाख, सीआरपीएफ जवान भी ठगी के शिकार, खाली हुए बैंक खाते
रांची में साइबर ठगों ने आरटीओ लिंक और ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर लाखों की ठगी की है। ओरमांझी के युवक और सीआरपीएफ जवान के साथ हुई इस डिजिटल लूट की पूरी इनसाइड रिपोर्ट और ठगी के नए पैंतरे यहाँ देखें।
रांची/झारखंड, 08 मई 2026 – झारखंड की राजधानी रांची अब साइबर अपराधियों का नया 'कुरुक्षेत्र' बनती जा रही है। ताज़ा मामलों में ठगों ने सुरक्षा और सतर्कता के तमाम दावों को धता बताते हुए दो अलग-अलग वारदातों में करीब 4 लाख रुपये पार कर दिए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इस बार ठगी का शिकार न केवल एक साधारण युवक हुआ है, बल्कि देश की सुरक्षा में तैनात एक सीआरपीएफ (CRPF) जवान को भी झांसे में ले लिया गया। साइबर थाना पुलिस ने दोनों मामलों में प्राथमिकी दर्ज कर जांच की कमान संभाल ली है।
केस 1: "एक क्लिक और सवा दो लाख गायब"
पहला मामला ओरमांझी के बबन वर्मा से जुड़ा है, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया के रहने वाले हैं।
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आरटीओ का जाल: बबन के मोबाइल पर एक मैसेज आया जो देखने में बिल्कुल आधिकारिक आरटीओ (RTO) नोटिफिकेशन जैसा था। उसमें एक लिंक दिया गया था।
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पलक झपकते सफाई: जैसे ही बबन ने उस लिंक को ओपन किया, उनके मोबाइल का एक्सेस शायद ठगों के पास चला गया। देखते ही देखते एक्सिस बैंक और पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के खातों से 1 लाख 93 हजार रुपये उड़ गए। उन्हें संभलने तक का मौका नहीं मिला।
केस 2: "मुनाफे का लालच और जवान से ठगी"
दूसरा मामला गुमला निवासी चंदन कुमार का है, जो धुर्वा स्थित सीआरपीएफ झारखंड सेक्टर कार्यालय में कार्यरत हैं।
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टेलीग्राम से शुरुआत: ठगों ने पहले उन्हें एक टेलीग्राम ग्रुप में जोड़ा और 'ऑनलाइन ट्रेडिंग' के जरिए मोटा पैसा कमाने का लालच दिया।
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व्हाट्सएप पर जाल: बाद में उन्हें एक व्हाट्सएप नंबर पर शिफ्ट किया गया। भरोसा जीतने के लिए पहले छोटे निवेश की बात कही गई।
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स्टेप-बाय-स्टेप लूट: चंदन ने पहले 50 हजार जमा किए। ठगों ने 'प्रोसेसिंग फीस' और 'ज्यादा प्रॉफिट' का झांसा देकर उनसे फिर 70 हजार और अंत में 80 हजार रुपये ऐंठ लिए। कुल 2 लाख रुपये गंवाने के बाद जब कोई पैसा वापस नहीं मिला, तब उन्हें ठगी का अहसास हुआ।
सावधानी ही बचाव: पुलिस की कड़ी चेतावनी
साइबर थाना पुलिस ने दोनों मामलों में केस दर्ज कर लिया है और तकनीकी सेल के जरिए ठगों के लोकेशन को ट्रैक करने की कोशिश की जा रही है।
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लिंक से रहें दूर: पुलिस ने अपील की है कि किसी भी अनजान नंबर से आए लिंक को 'क्लिक' न करें, चाहे वह कितना ही जरूरी क्यों न दिखे।
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ट्रेडिंग का सच: बिना किसी रजिस्टर्ड संस्था के, सोशल मीडिया ग्रुप्स के जरिए निवेश करना सीधे तौर पर पैसों को आग लगाने जैसा है।
रांची में हुई ये घटनाएं साबित करती हैं कि साइबर ठग अब किसी को नहीं छोड़ रहे, चाहे वह आम आदमी हो या वर्दीधारी जवान। आरटीओ लिंक और टेलीग्राम ट्रेडिंग के नाम पर हो रही यह 'डिजिटल डकैती' आने वाले समय में और भी खतरनाक हो सकती है। सवा दो लाख और दो लाख रुपये की ये चपत केवल आर्थिक नुकसान नहीं है, बल्कि एक नागरिक की मेहनत की कमाई पर प्रहार है। अब जरूरत केवल पुलिसिया कार्रवाई की नहीं, बल्कि 'डिजिटल साक्षरता' की भी है, ताकि कोई और बबन या चंदन इन शातिर ठगों का शिकार न बने।
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