Adani Land Controversy : अडानी को 1050 एकड़ जमीन ‘गिफ्ट’ देने का हंगामा, सरकार ने बताया सच क्या है
बिहार में अडानी को 1050 एकड़ जमीन ‘गिफ्ट’ देने के आरोप पर सियासी बवाल। कांग्रेस ने पटना में प्रदर्शन किया, सरकार ने बताया सच्चाई। पढ़ें पूरा मामला।
बिहार की राजनीति में जमकर बवाल मच गया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने अडानी ग्रुप को 1050 एकड़ जमीन गिफ्ट में दे दी है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर राजधानी पटना की सड़कों पर जमकर प्रदर्शन किया। लेकिन बिहार सरकार ने पलटवार करते हुए साफ कहा—“यह सब गलत जानकारी फैलाने की साज़िश है, जमीन मुफ्त में नहीं दी गई।”
कांग्रेस का बड़ा आरोप और प्रदर्शन
कांग्रेस के मीडिया विभाग प्रमुख पवन खेड़ा ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि भागलपुर में बनने वाले 2400 मेगावाट के पावर प्लांट के लिए अडानी ग्रुप को सिर्फ 1 रुपये प्रति वर्ष के हिसाब से जमीन दे दी गई। उनका कहना था कि बीजेपी बिहार चुनाव हारने वाली है, इसलिए जाते-जाते अडानी को फायदा पहुंचा रही है।
इसी आरोप को लेकर बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम के नेतृत्व में पटना में प्रदर्शन हुआ। पार्टी कार्यकर्ताओं ने नारेबाज़ी करते हुए कहा—“किसानों की ज़मीन की चोरी बर्दाश्त नहीं होगी।”
बिहार सरकार का पलटवार
उद्योग मंत्री नीतीश मिश्रा ने कांग्रेस के दावों को “झूठ और भ्रामक” बताया। उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया के तहत अडानी पावर लिमिटेड को सौंपा गया।
मिश्रा के अनुसार—
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बोली की प्रक्रिया में चार कंपनियों ने हिस्सा लिया।
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अडानी ने सबसे कम दर, यानी 6.075 रुपये प्रति किलोवाट घंटा बिजली सप्लाई करने का प्रस्ताव दिया।
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इसी आधार पर प्रोजेक्ट कंपनी को मिला।
मिश्रा ने कांग्रेस पर गलत सूचना फैलाकर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया।
अडानी ग्रुप की सफाई
अडानी ग्रुप ने भी 13 सितंबर को प्रेस रिलीज जारी कर कहा था कि आरोप पूरी तरह गलत हैं। कंपनी ने साफ किया कि जमीन मुफ्त में नहीं, बल्कि नियमों के तहत मिली है। साथ ही यह भी बताया गया कि 26,000 करोड़ रुपये का निवेश इस प्रोजेक्ट में होगा और अगले पांच साल में पावर प्लांट चालू कर दिया जाएगा।
इतिहास में ‘जमीन पर विवाद’
यह कोई पहला मौका नहीं है जब जमीन आवंटन को लेकर विवाद खड़ा हुआ हो। पहले भी देशभर में कई बार औद्योगिक प्रोजेक्ट्स को लेकर किसानों की जमीन देने पर राजनीति गरमाई है। 2006 में पश्चिम बंगाल के सिंगूर और नंदीग्राम में इसी तरह का बड़ा आंदोलन हुआ था, जिसने सरकार तक हिला दी थी। बिहार में भी चुनाव से पहले ऐसे मुद्दों पर राजनीति तेज होना आम बात रही है।
किसानों के नाम पर सियासत?
कांग्रेस का कहना है कि यह मामला किसानों की ज़मीन और उनके अधिकारों से जुड़ा है। वहीं सरकार और अडानी ग्रुप का दावा है कि यह सिर्फ पब्लिक को गुमराह करने के लिए उठाया गया मुद्दा है।
अब सवाल यह है कि—
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क्या कांग्रेस इस मुद्दे को चुनावी हथियार बनाएगी?
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क्या जनता सरकार की सफाई को स्वीकार करेगी?
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और सबसे अहम—क्या 26,000 करोड़ का यह प्रोजेक्ट वाकई बिहार की ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर पाएगा?
राजनीति और उद्योग के इस टकराव ने बिहार की सियासत को और भी दिलचस्प बना दिया है
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