Delivery Strike: बड़ी बंदी, नए साल पर नहीं आएगा खाना, स्विगी-जोमैटो और अमेजन के लाखों डिलीवरी बॉयज की हड़ताल, 31 दिसंबर को पूरा देश रहेगा हलाकान
नए साल के जश्न से ठीक पहले स्विगी, जोमैटो और ब्लिंकइट समेत तमाम ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के डिलीवरी वर्कर्स ने 31 दिसंबर को देशव्यापी हड़ताल का ऐलान कर दिया है। 10 मिनट डिलीवरी मॉडल के विरोध और घटती कमाई को लेकर होने वाली इस बड़ी बंदी की पूरी हकीकत यहाँ दी गई है वरना आपकी न्यू ईयर पार्टी का जायका पूरी तरह बिगड़ सकता है।
नई दिल्ली, 27 दिसंबर 2025 – अगर आप नए साल के जश्न के लिए घर बैठे पिज्जा, बिरयानी या ऑनलाइन शॉपिंग का मन बना रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकइट, जेप्टो, अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी दिग्गज कंपनियों के लाखों डिलीवरी और गिग वर्कर्स ने 31 दिसंबर को काम ठप करने का कड़ा फैसला लिया है। अपनी मांगों को लेकर अड़े इन कर्मियों ने 'ब्लैकआउट' का ऐलान किया है, जिससे देश के प्रमुख शहरों में होम डिलीवरी सेवाएं पूरी तरह चरमरा सकती हैं। त्योहारों के पीक सीजन में ग्राहकों को लगने वाला यह अब तक का सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है।
जश्न के बीच 'ब्लैकआउट': क्यों सड़कों पर हैं डिलीवरी बॉय?
त्योहारों और छुट्टियों के दौरान जब आप अपनों के साथ खुशियाँ मनाते हैं, तब ये डिलीवरी वर्कर्स 14-16 घंटे सड़कों पर होते हैं। लेकिन इस बार उन्होंने अपनी 'अदृश्य बेड़ियों' को तोड़ने का फैसला किया है।
-
अमानवीय काम के घंटे: तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) का कहना है कि पीक ऑवर्स में उनसे जानवरों की तरह काम लिया जाता है, लेकिन बदले में मिलने वाला मेहनताना लगातार कम हो रहा है।
-
कमाई में भारी कटौती: डिलीवरी रेट्स में बदलाव और बढ़ते पेट्रोल के दामों ने इन वर्कर्स की कमर तोड़ दी है। जोमैटो और स्विगी के कई राइडर्स का कहना है कि अब घर चलाना भी मुश्किल हो गया है।
10 मिनट का 'डेथ ट्रैप': जान की कीमत पर डिलीवरी
हड़ताल पर जा रहे वर्कर्स की सबसे बड़ी नाराजगी '10 मिनट डिलीवरी मॉडल' को लेकर है।
-
असुरक्षित टारगेट: गिग वर्कर्स का आरोप है कि 10 मिनट में सामान पहुँचाने के दबाव में उन्हें ट्रैफिक नियमों को तोड़ना पड़ता है, जिससे उनकी जान हमेशा जोखिम में रहती है।
-
आईडी ब्लॉकिंग का डर: बिना किसी ठोस वजह के कंपनी द्वारा आईडी ब्लॉक कर देना एक आम समस्या बन गई है। मामूली शिकायत पर भी वर्कर की आजीविका छीन ली जाती है, जिसका कोई कानूनी समाधान उनके पास नहीं है।
हड़ताल का प्रभाव और मुख्य मांगें (Quick Status Report)
| प्रभावित सेवाएं | मुख्य मांगें |
| स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकइट | 10 मिनट डिलीवरी मॉडल का अंत |
| अमेजन, फ्लिपकार्ट, जेप्टो | पारदर्शी और बढ़ा हुआ वेतन ढांचा |
| ई-कॉमर्स होम डिलीवरी | दुर्घटना बीमा और पेंशन सुरक्षा |
| शहर: दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, रांची | आईडी ब्लॉकिंग पर तत्काल रोक |
गिग इकोनॉमी का काला सच: इतिहास और संघर्ष
भारत में 'गिग इकोनॉमी' पिछले एक दशक में तेजी से बढ़ी है, लेकिन इसके पीछे छिपे मजदूरों के अधिकारों का इतिहास काफी धुंधला रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ऐप-बेस्ड वर्कर्स ने अपने अधिकारों के लिए लंबी लड़ाई लड़ी है। भारत में IFAT (Indian Federation of App-based Transport Workers) जैसे संगठन अब इन असंगठित कामगारों को एक मंच पर ला रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि टेक कंपनियां समय रहते संवाद नहीं करतीं, तो 'डिजिटल लेबर' का यह विद्रोह ई-कॉमर्स इंडस्ट्री की नींव हिला सकता है।
ग्राहकों के लिए चेतावनी: न्यू ईयर की प्लानिंग पर पानी
31 दिसंबर को होने वाली इस हड़ताल का असर महानगरों के साथ-साथ अब जमशेदपुर और रांची जैसे शहरों में भी दिखने की आशंका है।
-
ऑर्डर रिजेक्शन: उस दिन ऐप पर आपको 'No Riders Available' या 'Delivery Delayed' के संदेश देखने को मिल सकते हैं।
-
रेस्टोरेंट का संकट: रेस्टोरेंट मालिकों को भी डर है कि अगर डिलीवरी नहीं हुई, तो उनका तैयार भोजन बर्बाद हो जाएगा।
-
सुरक्षा और बीमा: वर्कर्स की मांग है कि उन्हें केवल 'पार्टनर' न कहा जाए, बल्कि एक कर्मचारी की तरह स्वास्थ्य बीमा और दुर्घटना कवरेज दिया जाए।
समाधान या लंबा संघर्ष?
स्विगी और जोमैटो जैसे प्लेटफॉर्म्स के लिए यह हड़ताल प्रतिष्ठा का विषय बन गई है। जहां एक ओर कंपनियां प्रॉफिट के लिए डिलीवरी समय घटा रही हैं, वहीं दूसरी ओर ग्रास-रूट पर काम करने वाले लोग अब 'सम्मान और सुरक्षा' की मांग कर रहे हैं। 31 दिसंबर की यह बंदी न केवल एक हड़ताल है, बल्कि यह भविष्य की डिजिटल लेबर व्यवस्था को तय करने वाला एक बड़ा आंदोलन है। फिलहाल, आप अपनी पार्टी के लिए खाने-पीने का इंतजाम पहले से कर लें, क्योंकि उस रात आपका पसंदीदा ऐप शायद 'Offline' मिले।
What's Your Reaction?


