Seraikela Fire: सरायकेला में धू-धू कर जला मालवाहक ऑटो, पेंट और तारपीन के धमाकों से दहला पठानमारा, लाखों का सामान राख और ड्राइवर ने कूदकर बचाई जान
सरायकेला के पठानमारा में तारपीन और पेंट से लदे ऑटो में लगी भीषण आग की पूरी रिपोर्ट यहाँ मौजूद है। बीच सड़क पर धू-धू कर जलते वाहन और शॉर्ट सर्किट से मची इस तबाही की इनसाइड स्टोरी विस्तार से पढ़िए वरना आप ज्वलनशील पदार्थों के परिवहन में होने वाली इस बड़ी लापरवाही और जानलेवा खतरे को जानने से चूक जाएंगे।
सरायकेला, 25 जनवरी 2026 – सरायकेला-खरसावां जिले के सरायकेला थाना क्षेत्र स्थित पठानमारा गांव के पास रविवार दोपहर करीब 2:00 बजे मौत का तांडव देखने को मिला। चाईबासा मार्ग पर एक मालवाहक ऑटो अचानक 'चलता-फिरता आग का गोला' बन गया। ऑटो में पेंट और अत्यधिक ज्वलनशील तारपीन तेल लदा होने के कारण लपटें इतनी ऊंची उठीं कि आसमान काले धुएं से भर गया। गनीमत रही कि चालक ने समय रहते जलते हुए वाहन से छलांग लगा दी, वरना एक बड़ा हादसा हो सकता था। इस घटना में लाखों रुपये का माल और ऑटो पूरी तरह जलकर खाक हो गया है।
सड़क पर बिछ गई आग की चादर: तारपीन ने मचाया गदर
जमशेदपुर के एमजीएम थाना क्षेत्र के रहने वाले बबन सिंह अपने मालवाहक ऑटो में पेंट के डिब्बे और तारपीन के गैलन लादकर डिलीवरी के लिए चाईबासा की ओर जा रहे थे।
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अचानक लगी आग: जैसे ही ऑटो पठानमारा गांव के पास पहुँचा, इंजन से धुआं निकलने लगा। देखते ही देखते आग ने पूरे वाहन को अपनी चपेट में ले लिया।
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विस्फोटक स्थिति: ऑटो पर भारी मात्रा में तारपीन लदा था, जो पेट्रोल की तरह तेजी से आग पकड़ता है। इससे आग ने विकराल रूप ले लिया और सड़क पर यातायात पूरी तरह थम गया।
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बाल-बाल बचा ड्राइवर: चालक बबन सिंह ने सूझबूझ दिखाई और जैसे ही आग की तपिश महसूस की, वे चलती ऑटो से बाहर कूद गए।
रेस्क्यू ऑपरेशन: मिट्टी और बालू से बुझाई गई लपटें
सड़क पर आग का तांडव देख आसपास के ग्रामीणों में दहशत फैल गई।
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पुलिस की मुस्तैदी: सरायकेला थाना प्रभारी विनय कुमार सूचना मिलते ही दलबल के साथ मौके पर पहुँचे और तुरंत दमकल विभाग को अलर्ट किया।
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देसी जुगाड़ और दमकल: दमकल की गाड़ी पहुँचने से पहले ही पुलिस और स्थानीय लोगों ने बालू और मिट्टी का छिड़काव शुरू किया। रासायनिक आग होने के कारण इसे बुझाना बेहद चुनौतीपूर्ण था।
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नुकसान का आकलन: काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू तो पा लिया गया, लेकिन तब तक वाहन का ढांचा ही बचा था। लाखों का पेंट और कीमती सामान राख के ढेर में तब्दील हो चुका था।
पठानमारा ऑटो अग्निकांड: मुख्य विवरण (Fire Incident Log)
| विवरण | प्रमुख जानकारी (Key Stats) |
| वाहन मालिक/चालक | बबन सिंह (निवासी: एमजीएम, जमशेदपुर) |
| सामान का विवरण | पेंट और तारपीन तेल (ज्वलनशील) |
| घटनास्थल | पठानमारा गांव के समीप, सरायकेला |
| आग का कारण | प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट (संभावित) |
| नुकसान | लाखों रुपये का माल और वाहन नष्ट |
जांच का घेरा: क्या थी लापरवाही?
पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या ज्वलनशील पदार्थों के परिवहन के लिए जरूरी सुरक्षा उपायों का पालन किया गया था या नहीं।
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शॉर्ट सर्किट या गर्मी: पुलिस और अग्निशमन विभाग का मानना है कि वाहन में वायरिंग की खराबी या अत्यधिक गर्मी की वजह से तारपीन के गैलन ने आग पकड़ी होगी।
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खतरनाक सामान: पेंट और तारपीन जैसे पदार्थों को ले जाने के लिए विशेष अनुमति और अग्निशमन यंत्र का होना अनिवार्य है, जिसकी जांच की जा रही है।
सुलगती सड़क और सुरक्षा के सवाल
पठानमारा की इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सुरक्षा के प्रति जरा सी लापरवाही लाखों के नुकसान और जान के जोखिम का कारण बन सकती है। बबन सिंह तो बच गए, लेकिन उनका रोजगार राख हो गया।
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