Chaibasa Tragedy : चाईबासा में खाना बनाते समय चूल्हे में गिरा युवक, छाती और पेट बुरी तरह झुलसे
चाईबासा के बरकेला गांव में एक दर्दनाक हादसा हुआ है। 19 वर्षीय गणेश बोयपाई खाना बनाते समय अचानक चक्कर आने से धधकते चूल्हे में गिर गए। गंभीर रूप से झुलसने के बाद अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस दुखद घटना ने पूरे मानकी साई मोहल्ले को झकझोर कर रख दिया है। पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।
चाईबासा/पश्चिम सिंहभूम, 13 मार्च 2026 – चाईबासा जिले के मुफ्फसिल थाना क्षेत्र अंतर्गत बरकेला गांव से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ के मानकी साई मोहल्ला में रहने वाले 19 वर्षीय युवक गणेश बोयपाई की जलते हुए चूल्हे में गिर जाने से मौत हो गई। यह हादसा उस वक्त हुआ जब गणेश घर में अकेले खाना बना रहे थे। गंभीर रूप से झुलसी अवस्था में उन्हें सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। गुरुवार की देर रात इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया, जिससे पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।
चक्कर आया और जलती आग बन गई काल
हादसे की जानकारी देते हुए गणेश के पिता दिलीप बोयपाई ने बताया कि बुधवार की सुबह यह खौफनाक मंजर देखने को मिला।
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अकेले थे गणेश: सुबह के समय परिवार के सभी सदस्य तालाब की ओर गए थे। घर में गणेश अकेले थे और लकड़ी के चूल्हे पर खाना पका रहे थे।
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अचानक बिगड़ी तबीयत: दिलीप ने बताया कि उस दिन गणेश की तबीयत कुछ ठीक नहीं थी। खाना बनाने के बाद वह चूल्हे की आग के पास बैठकर शरीर सेंक रहे थे। इसी दौरान उन्हें संभवतः चक्कर (Epilepsy or Dizziness) आ गया और वह अपना संतुलन खोकर सीधे धधकती आग में गिर पड़े।
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मदद की पुकार: जब परिजन वापस लौटे, तो उन्हें घर के भीतर से कराहने की हल्की आवाज सुनाई दी। अंदर जाकर देखा तो गणेश आग की लपटों के बीच बुरी तरह झुलस रहे थे।
सदर अस्पताल में संघर्ष और अंतिम विदा
ग्रामीणों की मदद से झुलसे हुए गणेश को तुरंत चाईबासा सदर अस्पताल ले जाया गया।
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गंभीर जख्म: आग में गिरने के कारण गणेश की छाती और पेट का हिस्सा सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ था। डॉक्टरों के अनुसार उनका शरीर काफी हद तक जल चुका था।
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इलाज के दौरान मौत: अस्पताल में विशेषज्ञों की टीम ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन घाव इतने गहरे थे कि गुरुवार की रात उनकी सांसें थम गईं।
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पुलिस की कार्रवाई: मुफ्फसिल और सदर थाना पुलिस को घटना की जानकारी दी गई है। पुलिस ने शव का पंचनामा कर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की कानूनी जांच शुरू कर दी है।
पश्चिम सिंहभूम के ग्रामीण अंचलों में 'ओपन फायर' और सुरक्षा
चाईबासा और कोल्हान का यह इलाका ऐतिहासिक रूप से अपनी जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के लिए जाना जाता है।
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पारंपरिक चूल्हे: बरकेला जैसे गाँवों में आज भी मिट्टी के चूल्हों और लकड़ी के ईंधन का उपयोग प्राथमिक तौर पर किया जाता है। यहाँ की वास्तुकला में रसोई घर अक्सर घर का केंद्र होता है।
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सावधानी की कमी: ग्रामीण क्षेत्रों के इतिहास में ऐसी कई घटनाएं दर्ज हैं जहाँ 'ओपन फायर' (खुली आग) के कारण बच्चे या बुजुर्ग हादसों का शिकार हुए हैं। विशेषकर सर्दियों और भोर के समय आग के पास बैठने की परंपरा यहाँ आम है, लेकिन वेंटिलेशन और सुरक्षा घेरे की कमी अक्सर जानलेवा साबित होती है। गणेश की मौत ने एक बार फिर इन बुनियादी सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सादगी भरा जीवन, दुखद अंत
गणेश के बारे में बताते हुए उनके पिता भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि उनका बेटा किसी भी तरह का नशा नहीं करता था और बहुत ही सरल स्वभाव का था।
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शिक्षा: गणेश ने आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की थी और घर के कामों में हाथ बंटाता था।
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गांव में सन्नाटा: गणेश की मौत के बाद मानकी साई मोहल्ले में किसी के घर चूल्हा नहीं जला। ग्रामीणों ने पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया है और प्रशासन से सहायता की उम्मीद जताई है।
चाईबासा की यह घटना एक चेतावनी है कि घर के भीतर की छोटी सी लापरवाही भी कितनी भयानक हो सकती है। लकड़ी के चूल्हों के पास बैठते समय विशेष सावधानी की जरूरत है, खासकर तब जब आपकी तबीयत ठीक न हो। गणेश की मौत ने बरकेला गांव को एक ऐसा जख्म दिया है जिसे भरने में लंबा समय लगेगा।
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