Palamu Murder: खौफनाक साजिश, बेंगलुरु में पलामू के संदीप का गला रेता, लाश पहुंचते ही दहला गांव

पलामू के पोलपोल निवासी संदीप सिंह की बेंगलुरु में हुई निर्मम हत्या ने सबको झकझोर दिया है। पैसे के लेनदेन में कॉन्ट्रैक्टर द्वारा रची गई इस खूनी साजिश और घर के इकलौते चिराग के बुझने की पूरी दर्दनाक रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी परदेस में काम करने वाले झारखंडी मजदूरों के साथ हो रहे इस बड़े अपराध से बेखबर रह जाएंगे।

Dec 29, 2025 - 15:14
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Palamu Murder: खौफनाक साजिश, बेंगलुरु में पलामू के संदीप का गला रेता, लाश पहुंचते ही दहला गांव
Palamu Murder: खौफनाक साजिश, बेंगलुरु में पलामू के संदीप का गला रेता, लाश पहुंचते ही दहला गांव

पलामू, 29 दिसंबर 2025 – रोजी-रोटी की तलाश में सात समंदर पार नहीं, बल्कि सात राज्य दूर गए झारखंड के एक और लाल की परदेस में बली चढ़ गई। पलामू जिले के पोलपोल गांव में आज सन्नाटा पसरा है और हवाओं में केवल परिजनों की चीखें सुनाई दे रही हैं। बेंगलुरु की एक निजी कंपनी में मजदूरी करने गए 28 वर्षीय संदीप सिंह की बेरहमी से गला रेतकर हत्या कर दी गई। 25 दिसंबर को बेंगलुरु के कोलार इलाके में हुई इस वारदात ने प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और ठेकेदारों की मनमानी पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। सोमवार को जब संदीप का शव गांव पहुँचा, तो कोई ऐसा ग्रामीण नहीं था जिसकी आंखें नम न हों।

क्रिसमस की काली रात: परदेस में लहूलुहान हुआ संदीप

संदीप सिंह अपने परिवार का एकमात्र सहारा था। वह बेंगलुरु में मेहनत-मजदूरी कर घर पैसे भेजता था ताकि बूढ़े माता-पिता और भाई-बहनों का पेट भर सके।

  • निर्मम हत्या: 25 दिसंबर की रात कोलार इलाके में अज्ञात हमलावरों ने संदीप का गला रेत दिया।

  • साजिश का शक: संदीप के परिजनों का सीधा आरोप है कि यह कोई साधारण लूटपाट या हमला नहीं था, बल्कि एक सोची-समझी हत्या थी।

  • पैसे का विवाद: परिजनों के अनुसार, कंपनी के कॉन्ट्रैक्टर नूर सईद पाशा के साथ संदीप का काफी समय से पैसे के लेनदेन को लेकर विवाद चल रहा था। संदीप ने अपनी मेहनत की कमाई मांगी थी, जिसके बदले उसे मौत मिली।

शव पहुँचा घर: पोलपोल में मचा कोहराम

बेंगलुरु में पोस्टमार्टम की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद संदीप का पार्थिव शरीर विमान से रांची और फिर वहां से एम्बुलेंस द्वारा पलामू लाया गया।

  1. अंतिम विदाई: जैसे ही शव गांव की सीमा में दाखिल हुआ, संदीप की मां और पत्नी के करुण क्रंदन से पूरा इलाका दहल उठा। सैकड़ों ग्रामीणों की भीड़ ने नम आंखों से संदीप को अंतिम विदाई दी।

  2. टूट गया सहारा: संदीप ही घर का इकलौता कमाने वाला सदस्य था। उसकी मौत के साथ ही इस गरीब परिवार की आर्थिक रीढ़ टूट गई है।

पलामू प्रवासी मजदूर हत्या: मुख्य विवरण (Case Snapshot)

विवरण जानकारी
मृतक का नाम संदीप सिंह (28 वर्ष)
निवासी पोलपोल गांव, पलामू (झारखंड)
घटना स्थल कोलार इलाका, बेंगलुरु (कर्नाटक)
मुख्य आरोपी (आरोपित) कॉन्ट्रैक्टर नूर सईद पाशा
विवाद की वजह मजदूरी के पैसे का लेनदेन

इतिहास और विस्थापन: झारखंडी मजदूरों का दर्द

पलामू और गढ़वा जैसे जिलों से हर साल हजारों युवा पलायन कर दक्षिण भारत के शहरों में जाते हैं। इतिहास गवाह है कि सुरक्षा और कानूनी जानकारी के अभाव में ये मजदूर अक्सर 'लेबर कॉन्ट्रैक्टर्स' के चंगुल में फंस जाते हैं। संदीप की हत्या ने साल 2021 में हुए उस मामले की याद दिला दी जब झारखंड के एक अन्य मजदूर की भी इसी तरह बकाया पैसे मांगने पर हत्या कर दी गई थी। यह विस्थापन की वह कड़वी सच्चाई है जहाँ मजदूर पसीने की जगह अपना खून बहाने को मजबूर है।

न्याय की गुहार: "हमें इंसाफ चाहिए"

संदीप के भाई और ग्रामीणों ने अब सरकारों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

  • निष्पक्ष जांच: परिवार ने झारखंड सरकार और कर्नाटक सरकार से मांग की है कि मामले की जांच सीबीआई या उच्च स्तरीय टीम से कराई जाए।

  • कठोर सजा: परिजनों का कहना है कि कॉन्ट्रैक्टर नूर सईद पाशा को जब तक गिरफ्तार कर फांसी की सजा नहीं दी जाती, संदीप की आत्मा को शांति नहीं मिलेगी।

  • सुरक्षा की मांग: ग्रामीणों ने केंद्र सरकार से मांग की है कि प्रवासी मजदूरों के लिए एक राष्ट्रीय हेल्पडेस्क बनाई जाए ताकि किसी विवाद की स्थिति में उनकी जान बचाई जा सके।

कब सुरक्षित होंगे मजदूर?

संदीप सिंह की गला रेतकर हुई हत्या केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि उन हजारों प्रवासियों के विश्वास की हत्या है जो अपने राज्य से दूर उम्मीदों की तलाश में जाते हैं। पलामू प्रशासन को चाहिए कि वे कर्नाटक पुलिस के साथ समन्वय बिठाकर जल्द से जल्द आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजें।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।