Chatra Violence: खूनी जंग, चतरा में आधी रात को खूनी खेल, जमीन विवाद में दो की हत्या, TSPC कनेक्शन से दहला इलाका

चतरा के कुंदा में जमीन विवाद को लेकर हुए भीषण संघर्ष ने दो लोगों की जान ले ली है और दो अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। मारे गए लोगों का प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन TSPC से संबंध होने की खबर ने सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैं। इस खूनी रंजिश और गांव में फैली दहशत की पूरी रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप इस बड़ी साजिश के सच से अनजान रह जाएंगे।

Dec 29, 2025 - 15:06
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Chatra Violence: खूनी जंग, चतरा में आधी रात को खूनी खेल, जमीन विवाद में दो की हत्या, TSPC कनेक्शन से दहला इलाका
Chatra Violence: खूनी जंग, चतरा में आधी रात को खूनी खेल, जमीन विवाद में दो की हत्या, TSPC कनेक्शन से दहला इलाका

चतरा, 29 दिसंबर 2025 – झारखंड के चतरा जिले में जमीन की भूख एक बार फिर इंसानी खून से शांत हुई है। कुंदा थाना क्षेत्र के गेंदरा गांव में रविवार देर रात करीब 12 बजे जो हुआ, उसने पूरे इलाके को सन्न कर दिया है। घने अंधेरे के बीच जमीन के एक टुकड़े को लेकर शुरू हुआ विवाद अचानक खूनी संघर्ष में तब्दील हो गया, जिसमें दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना ने न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि इसके तार प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन TSPC (तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी) से जुड़े होने की आशंका ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है। फिलहाल पूरा गांव पुलिस छावनी में तब्दील है और ग्रामीण खौफ के साये में जीने को मजबूर हैं।

आधी रात का तांडव: गोलियों और हथियारों की गूँज

जब पूरा गांव गहरी नींद में सो रहा था, तभी गेंदरा गांव में चीख-पुकार मच गई। लंबे समय से चल रहा भूमि विवाद अचानक उग्र हो गया।

  • जानलेवा हमला: दो गुटों के बीच पहले कहासुनी हुई और फिर धारदार हथियारों और लाठी-डंडों से हमला शुरू हो गया।

  • दो की मौत: इस हिंसक झड़प में देवेंद्र गंझू और चुरामन गंझू की घटनास्थल पर ही मौत हो गई।

  • गंभीर घायल: गांव के ही गोपाल गंझू और श्याम गंझू हमले में बुरी तरह जख्मी हुए हैं। उन्हें तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहाँ उनकी हालत नाजुक लेकिन स्थिर बनी हुई है।

उग्रवादी कनेक्शन: कौन थे मृतक?

पुलिस की प्रारंभिक जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं।

  1. TSPC से जुड़ाव: पुलिस के अनुसार, मारे गए दोनों व्यक्ति देवेंद्र और चुरामन का संबंध प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन TSPC से रहा है। वे पहले भी कई आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहे हैं।

  2. पुरानी रंजिश: पुलिस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि क्या यह केवल जमीन का विवाद था या फिर लेवी (रंगदारी) और संगठन के भीतर की कोई आपसी रंजिश।

  3. घेराबंदी: घटना के बाद कुंदा थाना प्रभारी के नेतृत्व में पुलिस बल ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी है ताकि फरार आरोपी सीमा पार न कर सकें।

चतरा खूनी संघर्ष: मुख्य विवरण (Crime Snapshot)

विवरण जानकारी
स्थान गेंदरा गांव, कुंदा (चतरा)
मृतकों की संख्या 02 (देवेंद्र गंझू और चुरामन गंझू)
घायलों की संख्या 02 (गोपाल और श्याम गंझू)
संभावित कनेक्शन TSPC उग्रवादी संगठन
वजह लंबे समय से चला आ रहा भूमि विवाद

इतिहास और रंजिश: चतरा में जमीन का खूनी रिकॉर्ड

चतरा जिला दशकों से नक्सली और उग्रवादी गतिविधियों का केंद्र रहा है। यहाँ जमीन के विवाद अक्सर व्यक्तिगत न रहकर 'संगठनात्मक' रूप ले लेते हैं। इतिहास गवाह है कि कुंदा और चतरा के जंगलों में जमीन पर कब्जे को लेकर कई बार नरसंहार हो चुके हैं।

  • प्रशासनिक विफलता: विशेषज्ञों का मानना है कि जब राजस्व विभाग (Revenue Department) समय रहते जमीन के सीमांकन और निपटारे में ढिलाई बरतता है, तो ऐसे मामलों में उग्रवादी संगठन हस्तक्षेप करने लगते हैं और फिर फैसला 'अदालत' में नहीं, बल्कि 'हथियारों' से होता है। गेंदरा की यह घटना इसी तंत्र की विफलता का नतीजा है।

गांव में दहशत: घरों में दुबके लोग

रात 12 बजे हुई इस वारदात के बाद से गेंदरा गांव के लोग इतने डरे हुए हैं कि वे पुलिस के सामने भी मुँह खोलने को तैयार नहीं हैं।

  • सन्नाटा: सोमवार सुबह गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा रहा। लोग डर के कारण अपने खेतों पर जाने से भी कतरा रहे हैं।

  • अतिरिक्त बल तैनात: एसपी के निर्देश पर गांव में भारी संख्या में अतिरिक्त पुलिस बल और जैप (JAP) के जवानों को तैनात किया गया है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद कई और राज खुल सकते हैं।

समाधान की जरूरत

देवेंद्र और चुरामन की मौत ने एक बार फिर झारखंड में जमीन विवाद की भयावहता को उजागर कर दिया है। पुलिस अधिकारियों ने साफ किया है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा, चाहे उनका संबंध किसी भी संगठन से हो। लेकिन सवाल वही है—क्या चतरा की लाल माटी पर खून बहने का यह सिलसिला कभी थमेगा?

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।