Lohardaga Rescue: बड़ी कामयाबी, अकेला मासूम और अनजान शहर, लोहरदगा स्टेशन पर 6 साल के निखिल का खौफनाक सफर

रांची से गलती से ट्रेन में सवार होकर लोहरदगा पहुंचे 6 साल के मासूम निखिल को आरपीएफ ने सूझबूझ से सुरक्षित बचा लिया है। स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर अकेले बैठे बच्चे और चाइल्ड हेल्पलाइन को सौंपे जाने तक की पूरी भावुक कहानी यहाँ दी गई है वरना आप भी रेलवे सुरक्षा बल के इस सराहनीय 'ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते' की हकीकत नहीं जान पाएंगे।

Dec 29, 2025 - 14:56
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Lohardaga Rescue: बड़ी कामयाबी, अकेला मासूम और अनजान शहर, लोहरदगा स्टेशन पर 6 साल के निखिल का खौफनाक सफर
Lohardaga Rescue: बड़ी कामयाबी, अकेला मासूम और अनजान शहर, लोहरदगा स्टेशन पर 6 साल के निखिल का खौफनाक सफर

रांची/लोहरदगा, 29 दिसंबर 2025 – रेलवे स्टेशन की भीड़भाड़ और तेज रफ्तार ट्रेनों के बीच एक 6 साल का मासूम बच्चा जब अपनों से बिछड़ जाए, तो मंजर कितना डरावना हो सकता है, इसकी कल्पना मात्र से रूह कांप जाती है। झारखंड के लोहरदगा रेलवे स्टेशन पर रविवार को एक ऐसा ही मामला सामने आया, जहाँ आरपीएफ (RPF) की सतर्कता ने एक बड़ी अनहोनी को टाल दिया। रांची से रास्ता भटक कर ट्रेन में सवार हुआ एक मासूम बच्चा जब लोहरदगा पहुँचा, तो वह पूरी तरह सहमा हुआ था। आरपीएफ के जवानों ने न केवल उसे सुरक्षित रेस्क्यू किया, बल्कि उसे नया जीवनदान देते हुए सुरक्षित हाथों में सौंप दिया।

गलती से चढ़ा ट्रेन में: 70 किलोमीटर का अनजान सफर

यह कहानी 6 वर्षीय निखिल कुमार साहू की है, जो अनजाने में एक ऐसी ट्रेन पर सवार हो गया जिसने उसे उसके घर से कोसों दूर पहुँचा दिया।

  • रांची से शुरुआत: निखिल रांची में ही कहीं से भटक कर ट्रेन संख्या 68037 (रांची-लोहरदगा पैसेंजर) में सवार हो गया।

  • अकेला मासूम: जब ट्रेन लोहरदगा पहुँची, तो प्लेटफॉर्म संख्या 1 पर वह बच्चा बिल्कुल अकेला और परेशान बैठा था। 28 दिसंबर की शाम आरपीएफ की नियमित चेकिंग के दौरान सुरक्षाकर्मियों की नजर उस पर पड़ी।

  • शालीन पूछताछ: आरपीएफ कर्मियों ने बच्चे के पास जाकर बड़े प्यार से उसका नाम पूछा। डरे हुए निखिल ने बताया कि वह गलती से ट्रेन में चढ़ गया था और अब उसे पता नहीं कि वह कहाँ है।

चाइल्ड हेल्पलाइन की एंट्री: रेस्क्यू ऑपरेशन का दूसरा चरण

आरपीएफ ने बिना समय गंवाए यह सुनिश्चित किया कि बच्चा किसी गलत हाथ में न पड़ जाए।

  1. त्वरित सूचना: लोहरदगा आरपीएफ पोस्ट के अधिकारियों ने तत्काल मोबाइल के जरिए चाइल्ड हेल्पलाइन लोहरदगा को इस मामले की जानकारी दी।

  2. प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर का सहयोग: सूचना मिलते ही चाइल्ड हेल्पलाइन के प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर रवि कुमार सक्रिय हुए।

  3. सुरक्षित सुपुर्दगी: सभी कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद, आरपीएफ ने निखिल को चाइल्ड हेल्पलाइन के सुपरवाइजर नितीश कुमार को सौंप दिया। अब इस नन्हे फरिश्ते को उसके माता-पिता से मिलाने की प्रक्रिया युद्ध स्तर पर जारी है।

लोहरदगा चाइल्ड रेस्क्यू: मुख्य विवरण (Rescue Report Snapshot)

विवरण जानकारी
बच्चे का नाम निखिल कुमार साहू (6 वर्ष)
ट्रेन संख्या 68037 (रांची-लोहरदगा पैसेंजर)
रेस्क्यू का स्थान प्लेटफॉर्म संख्या 1, लोहरदगा
बचाव दल आरपीएफ लोहरदगा पोस्ट
वर्तमान स्थिति चाइल्ड हेल्पलाइन की देखरेख में सुरक्षित

ऐतिहासिक संदर्भ: 'ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते' और आरपीएफ

भारतीय रेलवे में आरपीएफ द्वारा चलाया जा रहा "ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते" पिछले कुछ वर्षों में हजारों बच्चों के लिए उम्मीद की किरण बना है। अकेले झारखंड के रांची और चक्रधरपुर रेल मंडल में हर महीने दर्जनों ऐसे बच्चे मिलते हैं जो या तो घर से भागकर आते हैं या मानव तस्करी (Human Trafficking) का शिकार होने वाले होते हैं। 6 साल के निखिल का मामला यह दर्शाता है कि रेलवे स्टेशनों पर आरपीएफ की मौजूदगी केवल टिकट चेकिंग या सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा के लिए भी कितनी महत्वपूर्ण है। लोहरदगा जैसे स्टेशनों पर बढ़ती सतर्कता ने अपराधियों के मंसूबों पर पानी फेर दिया है।

अभिभावकों के लिए बड़ी सीख

निखिल की यह घटना उन सभी माता-पिता के लिए एक चेतावनी है जो भीड़भाड़ वाले इलाकों में बच्चों की निगरानी में चूक कर देते हैं।

  • सतर्कता जरूरी: रांची जैसे बड़े स्टेशन पर 6 साल का बच्चा अकेला ट्रेन में चढ़ गया, यह सुरक्षा के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाता है।

  • पहचान पत्र: बच्चों की जेब में या गले में उनके घर का पता और फोन नंबर वाला कोई कार्ड रखना ऐसे समय में बहुत मददगार साबित हो सकता है।

मानवता की जीत

आरपीएफ और चाइल्ड हेल्पलाइन के साझा प्रयासों ने निखिल को एक अंधेरी खाई में गिरने से बचा लिया। फिलहाल निखिल को सुरक्षित आश्रय गृह में रखा गया है और रांची पुलिस की मदद से उसके परिजनों की तलाश की जा रही है। लोहरदगा आरपीएफ की इस शालीनता और मुस्तैदी की हर तरफ तारीफ हो रही है।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।