Power Strike: कल गुल हो सकती है आपके शहर की बिजली, 27 लाख कर्मचारी उतरेंगे सड़कों पर
देशभर के 27 लाख बिजली कर्मी 12 फरवरी को महा-हड़ताल पर जा रहे हैं। इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल 2025 और निजीकरण के खिलाफ इस बड़े आंदोलन की पूरी रिपोर्ट यहाँ मौजूद है वरना आप कल होने वाली संभावित बिजली कटौती और पावर ग्रिड के इस बड़े संकट से अनजान रह जाएंगे।
नई दिल्ली, 11 फरवरी 2026 – कल यानी 12 फरवरी का दिन पूरे देश के लिए भारी पड़ सकता है। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (AIPEF) के आह्वान पर देशभर के लगभग 27 लाख बिजली कर्मचारी और इंजीनियर एक दिवसीय अखिल भारतीय हड़ताल पर जा रहे हैं। यह कोई सामान्य विरोध प्रदर्शन नहीं है, बल्कि केंद्र सरकार की नई नीतियों के खिलाफ बिजली क्षेत्र का अब तक का सबसे बड़ा 'शटडाउन' होने जा रहा है। चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो यह आंदोलन बिजली की सप्लाई व्यवस्था को पूरी तरह ठप कर सकता है।
क्यों थम सकती है देश की रफ्तार?
बिजली कर्मियों की यह हड़ताल तीन मुख्य मुद्दों पर केंद्रित है, जो सीधे तौर पर आम आदमी की जेब और सुविधा से जुड़े हैं:
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निजीकरण का विरोध: फेडरेशन का दावा है कि इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 और प्रस्तावित नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 के जरिए सरकार पूरे बिजली क्षेत्र को निजी हाथों में सौंपना चाहती है।
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पेंशन और रोजगार: कर्मचारियों की प्रमुख मांग पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करना और संविदा कर्मियों (Contract Workers) को स्थायी करना है।
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आउटसोर्सिंग पर चोट: आरोप है कि पावर सेक्टर के नियमित कार्यों को भी आउटसोर्स किया जा रहा है, जिससे स्थायी नौकरियां खत्म हो रही हैं और युवाओं का भविष्य अधर में है।
किसानों और ट्रेड यूनियनों का मिला 'महा-समर्थन'
इस बार बिजली कर्मियों की लड़ाई अकेली नहीं है। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और देश की 10 बड़ी केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने भी इस हड़ताल को अपना पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की है। शैलेन्द्र दुबे के अनुसार, जब किसान और बिजली कर्मी एक साथ सड़कों पर उतरेंगे, तो यह एक ऐतिहासिक औद्योगिक आंदोलन का रूप ले लेगा।
बिजली हड़ताल 2026: क्या हैं मुख्य मांगें? (Strike At A Glance)
| श्रेणी | प्रमुख मांगें (Key Demands) |
| नीतिगत | इलेक्ट्रिसिटी बिल 2025 और नई पॉलिसी 2026 की वापसी |
| वित्तीय | पुरानी पेंशन योजना (OPS) की तत्काल बहाली |
| रोजगार | आउटसोर्सिंग पर रोक और खाली पदों पर पक्की नियुक्ति |
| सामाजिक | निजीकरण को रोकना ताकि बिजली महंगी न हो |
| समर्थन | संयुक्त किसान मोर्चा और केंद्रीय ट्रेड यूनियन |
आम आदमी पर क्या होगा असर?
AIPEF का तर्क है कि उत्पादन, वितरण और ट्रांसमिशन का निजीकरण होने से बिजली की दरें आसमान छूने लगेंगी। इसका सबसे ज्यादा बुरा प्रभाव छोटे कारोबारियों, किसानों और गरीब वर्ग पर पड़ेगा। बिजली कर्मियों का कहना है कि वे न केवल अपने हक के लिए, बल्कि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए भी सड़कों पर उतर रहे हैं।
क्या झुकेगी सरकार?
12 फरवरी की यह हड़ताल केवल एक चेतावनी है या बिजली संकट की शुरुआत, यह कल शाम तक साफ हो जाएगा। फिलहाल, देशभर के सब-स्टेशनों और पावर हाउसों में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। यदि बातचीत का रास्ता नहीं निकला, तो कल रात करोड़ों घरों में अंधेरा छाने की आशंका प्रबल है।
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