Chaibasa Verdict: दरिंदे निरंजन को 21 साल की जेल, नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म पर चाईबासा कोर्ट का कड़ा प्रहार
चाईबासा कोर्ट ने नाबालिग से दरिंदगी करने वाले निरंजन शर्मा को 21 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। वैज्ञानिक साक्ष्यों और कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले की पूरी रिपोर्ट यहाँ मौजूद है वरना आप न्याय की इस सबसे बड़ी मिसाल से अनजान रह जाएंगे।
चाईबासा, 11 फरवरी 2026 – पश्चिमी सिंहभूम जिला मुख्यालय चाईबासा की एक अदालत ने समाज को झकझोर देने वाले एक मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। नाबालिग बच्ची के साथ अपहरण और दुष्कर्म के दोषी निरंजन शर्मा को पोक्सो (POCSO) एक्ट के तहत 21 साल की कठोर जेल की सजा सुनाई गई है। चाईबासा न्यायालय के सत्र न्यायाधीश द्वितीय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए न केवल लंबी जेल बल्कि 30 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। यह फैसला उन दरिंदों के लिए एक कड़ी चेतावनी है जो मासूमों की अस्मत से खिलवाड़ करते हैं।
अपहरण, दरिंदगी और फिर हत्या की धमकी
यह मामला 20 जुलाई 2020 का है, जब जगन्नाथपुर थाना क्षेत्र के जैतगढ़ निवासी निरंजन शर्मा ने एक नाबालिग बच्ची का अपहरण कर लिया था।
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जबरदस्ती का शिकार: आरोपी ने बच्ची को सुनसान जगह ले जाकर उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया।
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खौफ का जाल: वारदात के बाद आरोपी ने बच्ची को धमकी दी कि यदि उसने जुबान खोली, तो वह न केवल उसकी बल्कि उसके पूरे परिवार की हत्या कर देगा।
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हिम्मत की जीत: मासूम पीड़िता इस धमकी से सहम गई थी, लेकिन आखिरकार उसने अपने परिजनों को आपबीती सुनाई, जिसके बाद जगन्नाथपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
पुलिस की वैज्ञानिक जांच ने तोड़ा 'झूठ का किला'
इस केस में पुलिस की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने पारंपरिक जांच के बजाय वैज्ञानिक तरीके (Scientific Investigation) से साक्ष्य जुटाए।
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साक्ष्यों का संग्रह: पुलिस ने डीएनए और अन्य फोरेंसिक सबूतों को मजबूती से न्यायालय के सामने रखा।
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आरोप पत्र: वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर तैयार चार्जशीट इतनी मजबूत थी कि आरोपी निरंजन शर्मा चाहकर भी कोर्ट में खुद को निर्दोष साबित नहीं कर पाया।
चाईबासा पोक्सो कोर्ट फैसला: मुख्य विवरण (Verdict Snapshot)
| विवरण | प्रमुख जानकारी (Key Facts) |
| दोषी का नाम | निरंजन शर्मा (निवासी: जैतगढ़) |
| सजा की अवधि | 21 साल का कठोर कारावास |
| जुर्माना राशि | 30,000 रुपये |
| घटना की तारीख | 20 जुलाई 2020 |
| न्यायालय | सत्र न्यायाधीश द्वितीय, चाईबासा |
न्याय की जीत और परिवार को सांत्वना
बुधवार को जैसे ही न्यायाधीश ने सजा का ऐलान किया, पीड़िता के परिजनों की आंखों में आंसू आ गए। यह उनके 6 साल लंबे संघर्ष और धैर्य की जीत थी। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसे फैसलों से समाज में अपराधियों के भीतर कानून का डर पैदा होगा और पीड़ितों को न्याय की उम्मीद मिलेगी।
कानून के राज की बहाली
चाईबासा कोर्ट का यह फैसला महिला सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है। निरंजन शर्मा अब अगले 21 साल जेल की सलाखों के पीछे अपनी करतूतों का प्रायश्चित करेगा।
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