Chandil Tribute: पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर नारायण आईटीआई में उमड़ा जनसैलाब, डॉ. जटाशंकर पांडे ने बताया 'अंत्योदय' का असली मतलब
चांडिल के नारायण आईटीआई में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर 'अंत्योदय' और 'एकात्म मानववाद' के संकल्प की पूरी कवरेज यहाँ मौजूद है वरना आप राष्ट्र निर्माण के उस महामंत्र और डॉ. जटाशंकर पांडे के ओजस्वी संबोधन से पूरी तरह अनजान रह जाएंगे।
चांडिल, 11 फरवरी 2026 – सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल स्थित नारायण प्राइवेट आईटीआई, लुपुंगडीह के प्रांगण में आज एक अलग ही ऊर्जा देखने को मिली। अवसर था महान राष्ट्रवादी विचारक और भारतीय जनसंघ के प्रखर स्तंभ पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि का। संस्थान में आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम में न केवल उन्हें श्रद्धांजलि दी गई, बल्कि उनके बताए 'एकात्म मानववाद' के मार्ग पर चलने का एक सामूहिक संकल्प भी लिया गया। छात्रों की भारी उपस्थिति और देशभक्ति के नारों के बीच यह कार्यक्रम किसी उत्सव से कम नहीं लग रहा था।
पुष्पांजलि से 'अंत्योदय' के संकल्प तक
कार्यक्रम का आगाज पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। वातावरण पूरी तरह राष्ट्रवाद के रंग में रंगा नजर आया।
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संस्थापक का संदेश: संस्थान के संस्थापक और भाजपा प्रदेश कार्य समिति सदस्य डॉ. जटाशंकर पांडे ने जब माइक संभाला, तो पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उन्होंने पंडित जी के जीवन के उन अनछुए पहलुओं को सामने रखा, जो आज के तकनीकी युग के युवाओं के लिए बेहद जरूरी हैं।
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अंतिम व्यक्ति का उदय: डॉ. पांडे ने जोर देकर कहा कि पंडित जी का 'अंत्योदय' केवल एक शब्द नहीं, बल्कि एक दर्शन है। इसका अर्थ है समाज की पंक्ति में खड़े सबसे अंतिम व्यक्ति तक विकास और सम्मान पहुँचाना।
एकात्म मानववाद: आज की जरूरत
संबोधन के दौरान डॉ. पांडे ने बताया कि दीनदयाल उपाध्याय जी ने भारतीय संस्कृति को केंद्र में रखकर 'एकात्म मानववाद' का जो सिद्धांत दिया, वह समाज के सर्वांगीण विकास का एकमात्र रास्ता है। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे केवल डिग्री न लें, बल्कि राष्ट्र निर्माण के योद्धा बनें। सादगी, सेवा और त्याग के बिना कोई भी पेशेवर सफलता अधूरी है।
नारायण आईटीआई कार्यक्रम: मुख्य विवरण (Event Snapshot)
| विवरण | प्रमुख जानकारी (Key Highlights) |
| आयोजन स्थल | नारायण प्राइवेट आईटीआई, लुपुंगडीह (चांडिल) |
| अवसर | पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि |
| मुख्य वक्ता | डॉ. जटाशंकर पांडे (संस्थापक सह भाजपा नेता) |
| प्रमुख संदेश | एकात्म मानववाद और अंत्योदय का संकल्प |
| उपस्थिति | शिक्षक, छात्र-छात्राएं और गणमान्य अतिथि |
छात्रों ने ली राष्ट्र सेवा की शपथ
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी छात्र-छात्राओं ने हाथ उठाकर संकल्प लिया कि वे पंडित जी के आदर्शों को अपने जीवन में उतारेंगे। कार्यक्रम में एडवोकेट निखिल कुमार, शांति राम महतो, प्रकाश महतो, देवाशीष मंडल, शुभम साहू और अन्य वरिष्ठ सदस्यों ने भी अपने विचार साझा किए।
इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति:
संस्थान के शिक्षक संजीत महतो, शशिभूषण महतो, गौरव महतो, कृष्णा पद महतो, शिशुमती दास, निमाई मंडल समेत भारी संख्या में कर्मचारी और प्रशिक्षु इस ऐतिहासिक पल के गवाह बने। कार्यक्रम का समापन सामूहिक राष्ट्रगान के साथ हुआ, जिससे पूरा वातावरण राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत हो गया।
विचारों की अमर ज्योति
चांडिल के नारायण आईटीआई में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिकता नहीं थी, बल्कि यह भविष्य के इंजीनियरों और तकनीशियनों को उनकी जड़ों से जोड़ने का एक सफल प्रयास था। पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने दशकों पहले थे।
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