Sahibganj Raid: साहिबगंज में नकली कीटनाशक का साढ़े 3 करोड़ का खेल खत्म, ब्रांडेड कंपनी के नाम पर मौत बेच रहा था सिंडिकेट
साहिबगंज के मिर्जाचौकी में इंडोफिल कंपनी की नकली कीटनाशक दवा 'एलेक्टो' बनाने वाले एक बड़े कारखाने का भंडाफोड़ हुआ है। भारी मात्रा में नकली डिब्बे और 25 हजार से ज्यादा स्टीकर बरामद हुए हैं। किसानों की फसल बर्बाद करने वाले इस साढ़े 3 करोड़ के घोटाले की पूरी इनसाइड रिपोर्ट यहाँ देखें।
साहिबगंज/झारखंड, 19 मार्च 2026 – झारखंड के साहिबगंज जिले से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसने अन्नदाताओं की चिंता बढ़ा दी है। मिर्जा चौकी थाना क्षेत्र के महादेवरण गांव में चल रहे एक हाई-प्रोफाइल 'नकली कीटनाशक' कारखाने का प्रशासन ने पर्दाफाश किया है। यहाँ एक घर की आड़ में नामी कंपनी के लेबल लगाकर जहरीला खेल खेला जा रहा था। एसडीओ और एसडीपीओ के नेतृत्व में हुई इस छापेमारी में साढ़े तीन करोड़ रुपये मूल्य के नकली कीटनाशक तैयार करने की सामग्री जब्त की गई है। इस कार्रवाई ने साहिबगंज से लेकर बिहार के दरभंगा तक फैले एक संगठित अपराधी सिंडिकेट की पोल खोल दी है।
कंपनी की 'सीक्रेट टिप' और पुलिस का धावा
इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब इंडोफिल इंडस्ट्रीज लिमिटेड के अधिकारियों को पता चला कि उनकी मशहूर कीटनाशक दवा “एलेक्टो” की हूबहू नकल बाजार में बिक रही है।
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संयुक्त टीम का एक्शन: दरभंगा के गोपाल कुमार झा और कंपनी के अधिकारियों ने साहिबगंज प्रशासन से संपर्क किया। इसके बाद एसडीओ अमर जान आइंद और एसडीपीओ किशोर तिर्की के नेतृत्व में पुलिस ने शंभु पंडित की पत्नी पुतुल देवी के घर पर अचानक दबिश दी।
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बरामदगी का पहाड़: तलाशी के दौरान पुलिस की आंखें फटी रह गई। मौके से 1610 भरे हुए नकली डिब्बे, 25,272 नकली स्टीकर और हजारों की संख्या में खाली डिब्बे बरामद हुए।
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करोड़ों का खेल: एक असली डिब्बे की कीमत करीब 1350 रुपये है। अधिकारियों का अनुमान है कि अगर यह खेप बाजार में खप जाती, तो किसानों को साढ़े तीन करोड़ रुपये का चूना लगना तय था।
मजदूरी के नाम पर 'मौत की पैकिंग'
हिरासत में ली गई पुतुल देवी ने पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
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ऑटो चालक का जाल: महिला का दावा है कि एक अज्ञात ऑटो चालक उसके पास यह सारा सामान लेकर आया था। उसे लालच दिया गया था कि हर डिब्बे की पैकिंग पर उसे 2 रुपये मिलेंगे।
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संगठित नेटवर्क: पुलिस को शक है कि पुतुल देवी तो महज एक मोहरा है; असली मास्टरमाइंड कोई और है जो ग्रामीण महिलाओं की मजबूरी का फायदा उठाकर यह काला कारोबार चला रहा है।
साहिबगंज का मिर्जा चौकी और 'डुप्लीकेट' सामानों का पुराना दाग
साहिबगंज का मिर्जा चौकी इलाका ऐतिहासिक रूप से झारखंड और बिहार की सीमा पर स्थित होने के कारण एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र रहा है।
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तस्करी का गेटवे: 1980 के दशक से ही यह क्षेत्र अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण शराब और खनिजों की अवैध ढुलाई के लिए चर्चा में रहा है। इतिहास गवाह है कि साहिबगंज के गंगा तटीय इलाकों का उपयोग नकली सामानों को पश्चिम बंगाल और बिहार भेजने के लिए 'ट्रांजिट पॉइंट' के रूप में किया जाता रहा है।
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खेती और जहर का मेल: साहिबगंज और आसपास के राजमहल क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सब्जियां और धान उगाया जाता है। 2010 के बाद जब खेती में रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग बढ़ा, तभी से यहाँ नकली खाद और दवाओं का 'समानांतर बाजार' तैयार हो गया। 2018 में भी इसी तरह का एक मामला राजमहल में सामने आया था जहाँ नकली बीज बेचे जा रहे थे।
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एलेक्टो का दबदबा: इंडोफिल कंपनी की 'एलेक्टो' दवा का ऐतिहासिक रूप से किसानों के बीच गहरा भरोसा रहा है। इसी भरोसे को भुनाने के लिए जालसाजों ने मिर्जा चौकी के शांत महादेवरण गांव को अपना 'पैकिंग हब' बनाया। यह घटना याद दिलाती है कि जब तक प्रशासन इन 'अंडरग्राउंड यूनिट्स' को जड़ से नहीं मिटाएगा, तब तक संथाल परगना के किसानों की मेहनत इसी तरह मिट्टी में मिलती रहेगी।
प्रशासन सख्त: अब रडार पर 'किंगपिन'
इस बड़ी कार्रवाई में सदर सीओ बासुकीनाथ टुडू, मिर्जा चौकी थाना प्रभारी रूपेश कुमार और जिला कृषि पदाधिकारी प्रमोद एक्का की अहम भूमिका रही।
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सप्लाई चेन की जांच: पुलिस अब उन दुकानों और डीलरों की सूची खंगाल रही है जहाँ यह नकली जहर पहले ही सप्लाई किया जा चुका है।
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ऑटो चालक की तलाश: उस रहस्यमयी ऑटो चालक की पहचान के लिए क्षेत्र के सीसीटीवी फुटेज और इनपुट पर काम किया जा रहा है।
साहिबगंज में साढ़े तीन करोड़ के नकली कीटनाशक का पकड़ा जाना कृषि विभाग के लिए एक बड़ी चेतावनी है। यह केवल एक कंपनी के मुनाफे की बात नहीं है, बल्कि उन हजारों किसानों के भविष्य का सवाल है जिनकी फसल इन नकली दवाओं के छिड़काव से बर्बाद हो सकती थी। क्या साहिबगंज पुलिस अब उस असली सरगना को पकड़ पाएगी जिसने एक महिला को 2 रुपये का लालच देकर करोड़ों का साम्राज्य खड़ा कर लिया?
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