Ranchi Drugs: रांची में स्पीड पोस्ट से नशे की तस्करी, आईफोन-15 प्रो मैक्स और 2 लाख का चरस बरामद
रांची की पंडरा पुलिस ने स्पीड पोस्ट के जरिए फर्जी पते पर चरस मंगवाने वाले शातिर तस्कर लाल वेदान्त नाथ शाहदेव को दबोच लिया है। आईफोन और लग्जरी लाइफ के पीछे छिपे नशे के इस काले कारोबार और जतरा मैदान में हुई छापेमारी की पूरी इनसाइड रिपोर्ट यहाँ देखें।
रांची/राजधानी, 18 मार्च 2026 – झारखंड की राजधानी रांची में नशे के सौदागरों ने अब तस्करी के लिए 'डिजिटल और डाक' का सहारा लेना शुरू कर दिया है। पंडरा पुलिस (सुखदेवनगर थाना) ने एक ऐसे ही हाई-टेक ड्रग तस्कर को गिरफ्तार किया है, जो जासूसी फिल्मों की तरह स्पीड पोस्ट के जरिए फर्जी नाम-पते पर चरस मंगवाता था। गिरफ्तार युवक की पहचान लाल वेदान्त नाथ शाहदेव (25) के रूप में हुई है। पुलिस ने उसके पास से करीब 2 लाख रुपये मूल्य की 10.92 ग्राम उच्च गुणवत्ता वाली चरस और एक आईफोन 15 प्रो मैक्स जब्त किया है। कोतवाली डीएसपी प्रकाश सोय के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई ने शहर के रईसजादों के बीच फैल रहे नशे के जाल को बेनकाब कर दिया है।
जतरा मैदान में 'ऑपरेशन चरस': रात के अंधेरे में घेराबंदी
एसएसपी राकेश रंजन को मिली एक गुप्त सूचना ने इस पूरे रैकेट का भंडाफोड़ कर दिया।
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सटीक टिप: सूचना मिली थी कि 17 मार्च की शाम जतरा मैदान इलाके में मादक पदार्थ की एक बड़ी डिलीवरी होने वाली है।
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पुलिस का जाल: सिटी एसपी पारस राणा के निर्देश पर बनी विशेष टीम ने शाम 6:30 बजे से ही मैदान के चारों ओर पोजिशन ले ली थी। रात करीब 8:25 बजे जब आरोपी वहां पहुँचा और पुलिस की आहट पाकर भागने लगा, तो जवानों ने उसे खदेड़कर दबोच लिया।
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जेब में 'आसमानी' लिफाफा: तलाशी के दौरान शाहदेव की जेब से एक आसमानी रंग का लिफाफा मिला, जिसमें कागज में लिपटा 10.92 ग्राम चरस और एक इनहेलर बरामद हुआ।
स्पीड पोस्ट का 'मास्टर प्लान': ऐसे बचता था कानून से
पूछताछ में आरोपी ने जो खुलासा किया, उसने पुलिस को भी हैरान कर दिया।
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फर्जी एड्रेस: वह सीधे किसी डीलर से मिलने के बजाय स्पीड पोस्ट का उपयोग करता था। पार्सल पर नाम और पता गलत होता था ताकि पकड़े जाने पर कोई सुराग न मिले।
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ऊंची कीमत: वह बाहर से थोक भाव में चरस मंगवाकर रांची के युवाओं और कॉलेजों के आसपास ऊंचे दामों पर बेचता था।
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लग्जरी गैजेट्स: उसके पास से बरामद आईफोन 15 प्रो मैक्स और ओपो मोबाइल यह दर्शाते हैं कि वह इस धंधे से मोटी कमाई कर रहा था।
रांची का 'नशा' और डाक सेवाओं का दुरुपयोग
रांची का इतिहास पिछले कुछ दशकों में 'शांतिपूर्ण शहर' से 'ड्रग्स ट्रांजिट हब' के रूप में बदला है।
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अफीम से चरस तक: 90 के दशक में रांची और आसपास के इलाकों (खूंटी-अड़की) में केवल अफीम की खेती का मुद्दा बड़ा था। लेकिन 2010 के बाद, सिंथेटिक ड्रग्स और चरस का चलन बढ़ा।
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डाक सेवा का काला इतिहास: इतिहास गवाह है कि रांची में 2018 और 2021 में भी ऐसे मामले सामने आए थे जहाँ कूरियर कंपनियों के जरिए डार्क वेब से नशा मंगवाया गया था। 'स्पीड पोस्ट' का इस्तेमाल इसलिए किया जाता है क्योंकि इसमें पार्सल की जांच निजी कूरियर के मुकाबले कम संदेहपूर्ण मानी जाती है।
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शाहदेव का पुराना रिकॉर्ड: पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, लाल वेदान्त नाथ शाहदेव का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है और वह पहले भी एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत जेल जा चुका है। यह दर्शाता है कि रांची में नशे के सौदागरों का एक ऐसा वर्ग तैयार हो गया है जो बार-बार पकड़े जाने के बावजूद तस्करी के नए और आधुनिक तरीके ढूंढ रहा है।
पुलिस टीम की मुस्तैदी: एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई
इस सफल छापेमारी में कोतवाली डीएसपी प्रकाश सोय के साथ पंडरा ओपी प्रभारी फैज रब्बानी, सहावीर उरांव और अन्य पुलिसकर्मियों की अहम भूमिका रही।
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कड़ी धाराएं: आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 21(बी) और 22 के तहत सुखदेवनगर थाने में मामला दर्ज किया गया है।
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अगला निशाना: पुलिस अब उन 'स्पीड पोस्ट' पार्सल्स के ओरिजिन (भेजने वाले का स्थान) की जांच कर रही है ताकि यह पता चल सके कि नशे की यह खेप किस राज्य से रांची भेजी जा रही थी।
रांची पुलिस की यह कार्रवाई शहर के युवाओं को नशे के दलदल से बचाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। स्पीड पोस्ट के जरिए चरस मंगवाने का यह मामला साबित करता है कि तस्कर अब तकनीक और सरकारी सेवाओं का गलत इस्तेमाल करने में माहिर हो गए हैं। लाल वेदान्त नाथ शाहदेव की गिरफ्तारी से एक बड़े नेटवर्क के तार सुलझने की उम्मीद है। क्या पुलिस उस मुख्य सप्लायर तक पहुँच पाएगी जो फर्जी नामों का सहारा लेकर राजधानी में जहर घोल रहा है?
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