Seraikela Accident: सरायकेला में दो ट्रकों की रेस में पीस गया बाइक सवार, बेलचे से बटोरना पड़ा शव
सरायकेला-टाटा मार्ग पर कोलाबिरा के पास दो ट्रकों की ओवरटेकिंग में जमशेदपुर के रमण कुमार दास की दर्दनाक मौत हो गई है। क्षत-विक्षत शव को बेलचे से समेटने की नौबत आ गई, जिसके बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने चक्का जाम कर दिया। पुलिस कार्रवाई और इस खौफनाक हादसे की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।
सरायकेला/झारखंड, 18 मार्च 2026 – सरायकेला-टाटा मुख्य मार्ग पर स्थित कोलाबिरा बुधवार की शाम एक ऐसी वीभत्स घटना का गवाह बना, जिसने प्रत्यक्षदर्शियों की रूह कपा दी। दो भारी ट्रकों के बीच 'ओवरटेकिंग' की जानलेवा होड़ ने एक निर्दोष बाइक सवार की जिंदगी को पल भर में कुचल कर रख दिया। हादसा इतना भयावह था कि मृतक का शरीर पूरी तरह क्षत-विक्षत होकर सड़क पर बिखर गया, जिसे पुलिस को बेलचे (Shovel) की मदद से बटोरकर उठाना पड़ा। इस दर्दनाक मंजर को देखकर स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने दोनों ट्रकों को पकड़कर सड़क जाम कर दिया। पुलिस की टीम मौके पर पहुंचकर उग्र भीड़ को शांत करने की कोशिश में जुटी है।
ओवरटेकिंग का खूनी खेल: बाइक सवार बना शिकार
हादसा बुधवार देर शाम कोलाबिरा के पास हुआ, जब सरायकेला की ओर से बाइक (JH05DE-3738) सवार अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहा था।
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ट्रकों की रेस: प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रक संख्या JH02AZ-3519 और JH05AC-9403 एक-दूसरे से आगे निकलने की कोशिश में बेहद तेज रफ्तार से दौड़ रहे थे।
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मौत की टक्कर: कोलाबिरा के निकट इन दोनों ट्रकों ने बाइक सवार को अपनी चपेट में ले लिया। बाइक सवार दोनों भारी वाहनों के बीच इस कदर पिसा कि उसकी मौके पर ही मौत हो गई। शरीर के टुकड़े सड़क पर फैल जाने के कारण मंजर काफी विचलित करने वाला था।
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शनाख्त: मृतक के पास मिले आधार कार्ड के आधार पर उसकी पहचान जमशेदपुर के बिरसानगर निवासी रमण कुमार दास के रूप में हुई है।
सड़क पर संग्राम: आक्रोशित ग्रामीणों ने किया चक्का जाम
घटना के तुरंत बाद कोलाबिरा के स्थानीय लोगों ने बहादुरी दिखाते हुए दोनों ट्रकों को रोक लिया और सड़क पर बैठ गए।
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मांग और प्रदर्शन: लोगों का आरोप है कि इस मार्ग पर भारी वाहनों की बेलगाम रफ्तार हर दिन जानलेवा साबित हो रही है। आक्रोशित भीड़ मुआवजे और ट्रक ड्राइवरों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रही है।
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पुलिस की मशक्कत: सरायकेला थाना पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। फिलहाल पुलिस अधिकारी ग्रामीणों को समझाने और यातायात सुचारू करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन खबर लिखे जाने तक जाम जारी है।
टाटा-सरायकेला मार्ग—विकास का पथ या 'किलर हाईवे'?
टाटा-सरायकेला मार्ग का इतिहास पिछले कुछ दशकों में 'औद्योगिक जीवनरेखा' से 'मौत के गलियारे' में तब्दील हो गया है।
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औद्योगिक दबाव: आदित्यपुर इंडस्ट्रियल हब और सरायकेला जिला मुख्यालय को जोड़ने वाला यह मार्ग 1990 के दशक के बाद से बेहद व्यस्त हो गया। यहाँ से रोजाना हजारों की संख्या में लौह अयस्क और भारी मालवाहक गाड़ियां गुजरती हैं।
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कोलाबिरा का खूनी रिकॉर्ड: कोलाबिरा मोड ऐतिहासिक रूप से 'ब्लैक स्पॉट' रहा है। इतिहास गवाह है कि यहाँ की घुमावदार सड़क और ट्रकों की अनियंत्रित गति ने पिछले 5 सालों में दर्जनों लोगों की जान ली है। 2022 में भी इसी क्षेत्र में एक साथ तीन लोगों की ट्रक की चपेट में आने से मौत हुई थी।
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प्रशासनिक विफलता: लंबे समय से इस मार्ग पर 'स्पीड ब्रेकर' और 'भारी वाहनों के लिए अलग लेन' की मांग की जा रही है, लेकिन 1980 के दशक के पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ते ट्रैफिक के बोझ ने इसे एक 'डेथ ट्रैप' बना दिया है। रमण कुमार दास की यह वीभत्स मौत उसी प्रशासनिक अनदेखी का नतीजा है, जहाँ सड़क सुरक्षा के नियम केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं।
वर्तमान स्थिति: बिरसानगर में मातम
जमशेदपुर के बिरसानगर इलाके में रमण कुमार दास की मौत की खबर पहुँचते ही परिवार में कोहराम मच गया है।
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कानूनी कार्रवाई: पुलिस ने दोनों ट्रकों को जब्त कर लिया है और फरार ड्राइवरों की तलाश की जा रही है।
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सुरक्षा पर सवाल: स्थानीय निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि इस मार्ग पर भारी वाहनों की गति सीमा तय नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे।
सरायकेला का यह हादसा हमें याद दिलाता है कि सड़कों पर 'जल्दबाजी' और 'ओवरटेकिंग' का अंत कितना खौफनाक हो सकता है। एक परिवार का चिराग बुझ गया और पीछे छूट गए केवल सड़क पर बिखरे लहूलुहान निशान। क्या बेलचे से बटोरा गया वह शव प्रशासन की आंखें खोलने के लिए काफी है, या टाटा-सरायकेला मार्ग पर मौतों का यह सिलसिला ऐसे ही जारी रहेगा?
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