Ranchi Encounter: रांची के रेस्टोरेंट मर्डर केस का बड़ा खुलासा, धनबाद में मुठभेड़ के बाद प्रिंस खान गैंग के 4 शूटर गिरफ्तार
रांची के "द टीटोस रेस्टोरेंट" में हुए सनसनीखेज मनीष गोप हत्याकांड का खुलासा हो गया है। धनबाद में हुई खूनी मुठभेड़ के बाद पुलिस ने प्रिंस खान और सुजीत सिन्हा गैंग के 4 गुर्गों को दबोच लिया है। अपराधियों और पुलिस के बीच चली गोलियों की पूरी इनसाइड रिपोर्ट यहाँ देखें।
रांची/धनबाद, 17 मार्च 2026 – झारखंड की राजधानी रांची के एयरपोर्ट थाना क्षेत्र में स्थित “द टीटोस रेस्टोरेंट” में घुसकर होटल स्टाफ की सरेआम हत्या करने वाले दुस्साहसी अपराधियों का अंत शुरू हो गया है। रांची पुलिस ने महज 9 दिनों के भीतर इस हाई-प्रोफाइल मर्डर मिस्ट्री का पर्दाफाश करते हुए खूंखार प्रिंस खान गैंग के चार शूटरों को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी कोई साधारण कार्रवाई नहीं थी, बल्कि धनबाद के खंडहरों में पुलिस और अपराधियों के बीच हुई भीषण मुठभेड़ का नतीजा है। सिटी एसपी पारस राणा ने खुलासा किया कि यह हत्या वर्चस्व की जंग का हिस्सा थी, जिसे प्रिंस खान और सुजीत सिन्हा गिरोह ने मिलकर अंजाम दिया था।
खूनी मुठभेड़: जब धनबाद के खंडहरों में गूंजी गोलियां
तफ्तीश के दौरान पुलिस को खबर मिली कि हत्याकांड को अंजाम देने वाले शूटर धनबाद के बोरागढ़-भागाबांध इलाके में छिपे हैं।
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घेराबंदी और फायरिंग: 16 मार्च की सुबह जब रांची और धनबाद पुलिस की संयुक्त टीम ने अपराधियों को घेरा, तो उन्होंने सरेंडर करने के बजाय पुलिस पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी।
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जवाबी कार्रवाई: पुलिस की जवाबी फायरिंग में कुबेर सिंह और विक्की डोम के पैर में गोली लगी, जबकि अफजल अमन उर्फ 'विराट कोहली' भागने की कोशिश में जख्मी हो गया।
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बरामदगी: मौके से पुलिस ने अवैध हथियार, जिंदा कारतूस, एक पल्सर बाइक और दो मोबाइल फोन जब्त किए हैं। मुठभेड़ इतनी जबरदस्त थी कि पुलिस की गश्ती गाड़ी भी क्षतिग्रस्त हो गई।
गिरफ्तार अपराधियों की कुंडली: 'विराट कोहली' से 'डॉक्टर' तक
पुलिस ने जिन चार मुख्य किरदारों को सलाखों के पीछे भेजा है, उनके नाम और नेटवर्क ने सुरक्षा एजेंसियों को चौंका दिया है:
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कुबेर उर्फ मनीष सिंह: यह पलामू का रहने वाला है और गैंग का मुख्य शूटर माना जाता है।
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अफजल अमन उर्फ बाबर उर्फ विराट कोहली: धनबाद का रहने वाला यह अपराधी कोड नेम के जरिए पुलिस को चकमा देता था।
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पप्पू भुइया और मो. शद्दाब आलम उर्फ डॉक्टर: ये दोनों अपराधियों को लॉजिस्टिक और पनाह देने का काम करते थे।
प्रिंस खान और सुजीत सिन्हा—झारखंड का नया 'क्राइम सिंडिकेट'
झारखंड में गैंगवार और रंगदारी का इतिहास पुराना है, लेकिन 'द टीटोस' रेस्टोरेंट की घटना ने एक नए और खतरनाक गठजोड़ की तस्दीक की है।
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प्रिंस खान का उदय: धनबाद के 'वासेपुर' से शुरू हुआ प्रिंस खान का आतंक अब डिजिटल हो चुका है। वह खाड़ी देशों में बैठकर वीडियो जारी कर व्यापारियों को धमकाने के लिए जाना जाता है।
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सुजीत सिन्हा का नेटवर्क: पलामू और लातेहार बेल्ट में सक्रिय सुजीत सिन्हा गैंग लंबे समय से जेल के भीतर से अपना साम्राज्य चला रहा है। इतिहास गवाह है कि पहले ये गैंग आपस में भिड़ते थे, लेकिन पिछले एक साल में 'प्रिंस-सुजीत गठजोड़' ने रांची के व्यवसायियों के लिए बड़ी चुनौती पेश की है।
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7 मार्च की वो रात: 7 मार्च को रेस्टोरेंट स्टाफ मनीष गोप की हत्या महज एक संदेश थी—दहशत फैलाने की। रांची पुलिस के रिकॉर्ड बताते हैं कि 2010 के दशक में जैसे 'फहाद खान' और 'अमन सिंह' गैंग का आतंक था, ठीक वैसे ही अब यह नया गठजोड़ पुलिस के रडार पर है। 9 दिन में इस केस का खुलासा होना पुलिस की साख के लिए एक ऐतिहासिक जीत मानी जा रही है।
सिटी एसपी का दावा: अभी और होंगी गिरफ्तारियां
रांची के सिटी एसपी पारस राणा ने स्पष्ट कर दिया है कि यह तो बस शुरुआत है।
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नेटवर्क का खात्मा: पुलिस को पूछताछ में प्रिंस खान के कई स्लीपर सेल्स और मददगारों की जानकारी मिली है।
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एसआईटी की मुस्तैदी: एसएसपी राकेश रंजन के निर्देश पर बनी एसआईटी अभी भी छापेमारी कर रही है। पुलिस का लक्ष्य इस सिंडिकेट की आर्थिक कमर तोड़ना है।
"द टीटोस रेस्टोरेंट" में मनीष गोप की हत्या ने रांची को डरा दिया था, लेकिन धनबाद की मुठभेड़ ने अपराधियों को साफ संदेश दे दिया है कि कानून के हाथ उनके गिरेबान तक पहुँच चुके हैं। प्रिंस खान और सुजीत सिन्हा का गठजोड़ भले ही मजबूत दिख रहा हो, लेकिन पुलिस की गोलियों ने उनके गुर्गों के हौसले पस्त कर दिए हैं। क्या यह कार्रवाई झारखंड की राजधानी को इन 'गैंगस्टरों' के साये से मुक्त करा पाएगी?
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