Chakulia Sand Mafia: थाना के सामने से गुजर रहे बालू लदे ट्रैक्टर, प्रशासन अनजान
श्यामसुंदरपुर थाना के सामने से बेधड़क हो रहा अवैध बालू परिवहन, प्रशासन की चुप्पी पर सवाल, ग्रामीणों में रोष।
Chakulia Shocker: चाकुलिया प्रखंड में प्रशासन डाल-डाल तो बालू माफिया पात-पात पर चल रहे हैं। बालू माफिया प्रशासन के नाक के नीचे से बेधड़क बालू का परिवहन कर मालामाल हो रहे हैं। श्यामसुंदरपुर थाना के ठीक सामने से गुजरते हुए ट्रैक्टर बालू लादकर चाकुलिया पहुंच रहे हैं, फिर भी पुलिस और स्थानीय प्रशासन अनजान बने हुए हैं।
बालिजुड़ी और चंदनपुर घाटों पर धड़ल्ले से हो रहा अवैध उत्खनन
प्रखंड क्षेत्र के श्यामसुंदरपुर थाना क्षेत्र के बालिजुड़ी और चंदनपुर समेत अन्य नदी घाटों से बालू का अवैध उत्खनन धड़ल्ले से जारी है। यहाँ दिन में तय समय पर ट्रैक्टरों में बालू लादा जाता है। फिर उन ट्रैक्टरों को थाना के सामने से गुजारा जाता है। सुबह सात बजे से पहले और शाम छह से आठ बजे के बीच यह परिवहन चरम पर होता है।
सुबह-शाम का खेल, प्रशासन की नींद
बालू माफिया सुबह सात बजे के पूर्व और शाम छह से आठ बजे तक ट्रैक्टरों से बालू का परिवहन करते हैं। इस समय प्रशासनिक अधिकारी अपने घरों में होते हैं या ड्यूटी से मुक्ति पा चुके होते हैं। पुलिस थाना स्थित तो है, लेकिन गश्त नदारद रहती है। बालू लदे ट्रैक्टर थाना के सामने से गुजरते हुए चाकुलिया शहर तक पहुंच जाते हैं।
कधी-कभार की कार्रवाई, कोरम पूरा करने का खेल
प्रशासन कभी-कभी कार्रवाई का कोरम पूरा करने के लिए बालू लदे ट्रैक्टर जब्त कर लेता है। यह जब्ती भी बिना किसी बड़े अभियान के होती है। माफिया जानते हैं कि कुछ ट्रैक्टर जब्त होने भर से व्यवस्था को कोई फर्क नहीं पड़ता। हजारों रुपये का बालू हर दिन निकल रहा है और प्रशासन की आंखों पर धूल छिड़की जा रही है।
बालू का खजाना और राजनीतिक संरक्षण
चाकुलिया का इलाका ऐतिहासिक रूप से प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध रहा है। यहाँ नदी घाटों से बालू आसानी से मिल जाता है, जो निर्माण के लिए बेहद कीमती होता है। कहा जाता है कि बालू माफियाओं का स्थानीय स्तर पर राजनीतिक संरक्षण भी है। पिछले कुछ वर्षों में अवैध बालू उत्खनन ने यहाँ के भू-जल स्तर और पारिस्थितिकी को बहुत नुकसान पहुंचाया है, लेकिन यह खेल अब भी जारी है। श्यामसुंदरपुर थाना इसी बालू क्षेत्र के मुख्य चौराहे पर स्थित है। इसके सामने बालू लदे ट्रैक्टर का गुजरना साफ दर्शाता है कि प्रशासन या तो अनजान है या जानबूझकर आंखें मूंदे बैठा है।
कहां से कहां तक पहुंचता है बालू?
बालिजुड़ी और चंदनपर घाटों से निकाला गया बालू विभिन्न सड़क मार्गों से होता हुआ चाकुलिया पहुंचता है। यहाँ से फिर छोटे-बड़े निर्माण ठेकेदारों को सप्लाई किया जाता है। माफिया ट्रैक्टरों पर झंडी बांधकर या ट्रॉली ढककर बालू को छुपाने की कोशिश करते हैं। लेकिन लदी हुई बालू को छुपा पाना आसान नहीं है। फिर भी पुलिस उन्हें रोकने की कोशिश नहीं करती।
प्रशासन की मिलीभगत पर ग्रामीणों में आक्रोश
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह मामला सिर्फ चोर-उचक्कों का नहीं है, बल्कि इसमें प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत साफ दिखती है। एक बुजुर्ग ग्रामीण ने बताया, “थाने से सौ मीटर दूर ट्रैक्टरों का काफिला गुजरता है, सिपाही मूंछों पर ताव देते हुए देखते रहते हैं। बस जब कभी अखबार में खबर छपती है तो दो-चार ट्रैक्टर जब्त कर लिए जाते हैं। कुछ दिन बाद सब वैसा का वैसा हो जाता है।”
थाना प्रभारी ने क्या कहा?
जब श्यामसुंदरपुर थाना से इस विषय पर बात की गई तो प्रतिक्रिया में उनका कहना है कि समय-समय पर छापेमारी की जाती है और ट्रैक्टर जब्त भी किए जाते हैं। लेकिन स्थानीय मानते हैं कि यह कार्रवाई सिर्फ दिखावा है। असली माफिया कभी पकड़ में नहीं आते। ट्रैक्टर जब्त हो जाने के बाद उन्हें जल्द ही छोड़ भी दिया जाता है।
अब क्या होगा?
प्रशासन के सामने अब सवाल है कि आखिर थाने के सामने से गुजरने वाले बालू लदे ट्रैक्टरों को कोई देख क्यों नहीं रहा है? क्या बालू माफिया इतने ताकतवर हो गए हैं? या प्रशासन के कुछ लोग ही इस खेल में भागीदार हैं? यह जांच का विषय है। फिलहाल स्थानीय लोग और पर्यावरण प्रेमी प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
आपकी राय क्या है – क्या थाना के सामने से बालू लदे ट्रैक्टर गुजरने का मतलब पुलिस की मिलीभगत है या लापरवाही? कमेंट में बताएं।
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