Potka Sendra Alert: शिकार पर्व के दौरान वन विभाग की सख्ती, हाता में चला विशेष जांच अभियान
सेंदरा शिकार पर्व पर वन विभाग का हाता में बड़ा अभियान, जमशेदपुर जा रहे वाहनों की तलाशी, शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध की चेतावनी।
Potka Forest Action: सेंदरा शिकार पर्व के मद्देनजर वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वन विभाग पूरी तरह सतर्क है। सोमवार सुबह हाता स्थित वन विभाग कार्यालय के समीप विशेष जांच अभियान चलाया गया। जमशेदपुर की ओर जाने वाले यात्री वाहनों और संदिग्ध व्यक्तियों की सघन तलाशी ली गई।
सेंदरा शिकार पर्व क्या है?
सेंदरा (या सेंदुरा) झारखंड के आदिवासी समुदायों का एक परंपरागत शिकार पर्व है, जो आमतौर पर फाल्गुन (फरवरी-मार्च) या चैत्र (मार्च-अप्रैल) के महीने में मनाया जाता है। इस अवसर पर ग्रामीण और आदिवासी समुदाय के लोग सामूहिक रूप से जंगलों में शिकार करते हैं। हालाँकि, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत अधिकतर वन्यजीवों का शिकार पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद कुछ इलाकों में परंपरा के नाम पर अवैध शिकार जारी है। पोटका क्षेत्र में दलमा वन्यजीव अभयारण्य स्थित है, जहाँ बाघ, तेंदुआ, सांभर, चीतल और कई पक्षियों की प्रजातियाँ पाई जाती हैं। इस अभयारण्य से सटे इलाकों में सेंदरा के दौरान अक्सर शिकार की घटनाएं होती रही हैं, इसलिए वन विभाग हर साल विशेष सतर्कता बरतता है।
हाता में सघन जांच, संदिग्धों से पूछताछ
परंपरा के नाम पर शिकार को बर्दाश्त न करने की मंशा से वन विभाग की टीम हाता में जमशेदपुर की ओर जाने वाले मार्ग पर सक्रिय थी। वाहनों को रोक कर तलाशी ली गई। खास तौर पर उन लोगों पर नजर रखी गई जिनके दलमा जंगल की ओर जाने की संभावना थी। संदिग्धों से पूछताछ की गई और उन्हें स्पष्ट चेतावनी दी गई कि सेंदरा पर्व के दौरान शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध है। किसी भी प्रकार का शिकार करते पाए जाने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
वन्यजीवों को नुकसान न पहुंचाने की अपील
वन विभाग के अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा कि परंपरा का निर्वाह वन्यजीवों को नुकसान पहुँचाकर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपनी सांस्कृतिक परंपराओं का पालन करें लेकिन इसके लिए वन्यजीवों की जान न लें। वन विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि पारंपरिक शिकार वैध नहीं है और इस बार कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जंगलों में गश्त बढ़ाई, कर्मी तैनात
सेंदरा के दौरान पोटका और दलमा जंगलों में सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता कर दी गई है। वनकर्मियों की गश्ती तेज कर दी गई है। वन विभाग के कर्मचारी जंगल के अंदर और आसपास के गांवों में जागरूकता फैलाने में जुटे हैं। लोगों से यह भी अपील की गई है कि यदि वे किसी को अवैध शिकार करते देखें तो तुरंत वन विभाग को सूचित करें।
रेंज ऑफिसर शंकर भगत के नेतृत्व में हुआ अभियान
इस अभियान का नेतृत्व रेंज ऑफिसर शंकर भगत ने किया। उनके साथ हेड सब बीट ऑफिसर तन्मय चटर्जी, दशरथ सोरेन, किष्णु मुर्मू, हिमांशु कुमार, रुद्र नारायण दास, दुखुरम मुर्मू, अमल कुमार मुर्मू, सुजाता सहित वन विभाग के कई अधिकारी और कर्मी मौजूद रहे। सभी टीमों को जिले के विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में पैनी नजर रखने के निर्देश दिए गए।
वन्यजीवों के संरक्षण की जरूरत
दलमा वन्यजीव अभयारण्य जैव विविधता का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यहाँ कई लुप्तप्राय प्रजातियां पाई जाती हैं। अवैध शिकार से इन प्रजातियों के अस्तित्व पर खतरा बना रहता है। वन विभाग के इस अभियान से उन लोगों में हड़कंप मच गया है जो परंपरा के नाम पर शिकार करने का इरादा रखते थे।
आगे क्या होगा?
वन विभाग ने सेंदरा पर्व के समाप्त होने तक इस तरह के जांच अभियान जारी रखने का निर्णय लिया है। विशेष गश्ती दल बनाए गए हैं। साथ ही, स्थानीय ग्रामीणों के साथ बैठकें आयोजित कर उन्हें वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है। विभाग ने यह भी कहा है कि यह अभियान भविष्य में भी इसी तरह जारी रहेगा।
आपकी राय क्या है – क्या सेंदरा जैसे परंपरागत शिकार पर्व पर पूर्ण प्रतिबंध लगना चाहिए या इसे सीमित एवं प्रतीकात्मक रूप में मनाने देना चाहिए? कमेंट में बताएं।
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