Jamtara Raid: जामताड़ा में साइबर अपराधियों का बड़ा साम्राज्य ध्वस्त, 6 शातिर गिरफ्तार, एनीडेस्क के जरिए खाली करते थे खाते
जामताड़ा पुलिस ने करमाटांड़ थाना क्षेत्र में छापेमारी कर 6 शातिर साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। गूगल पर फर्जी कस्टमर केयर नंबर डालकर और AnyDesk ऐप के जरिए बैंक खाते उड़ाने वाले इस गिरोह के पास से 13 मोबाइल और 18 सिम कार्ड बरामद हुए हैं। ठगी के इस नए पैटर्न की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।
जामताड़ा/झारखंड, 18 मार्च 2026 – 'साइबर ठगी' के लिए पूरी दुनिया में कुख्यात हो चुके झारखंड के जामताड़ा जिले में पुलिस ने एक बार फिर अपराधियों की कमर तोड़ दी है। पुलिस अधीक्षक राजकुमार मेहता के निर्देश पर चलाए गए एक विशेष सर्च ऑपरेशन में करमाटांड़ थाना क्षेत्र से 6 शातिर साइबर अपराधियों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया है। ये अपराधी खेतों और झाड़ियों (टॉड) में बैठकर देश के अलग-अलग राज्यों के लोगों को अपनी बातों के जाल में फंसा रहे थे। पुलिस ने इनके पास से भारी मात्रा में फर्जी सिम कार्ड, मोबाइल और मोटरसाइकिलें जब्त की हैं। इस कार्रवाई से जामताड़ा के 'डिजिटल ठगों' के बीच दहशत का माहौल है।
झाड़ियों में चल रहा था 'कॉल सेंटर': ऐसे बिछाया पुलिस ने जाल
साइबर थाना प्रभारी अमृत कुमार राम के नेतृत्व में पुलिस की टीम ने करमाटांड़ के पदमडीह गांव के पास घेराबंदी की।
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गुप्त सूचना: पुलिस को पुख्ता जानकारी मिली थी कि कुछ युवक खुले मैदान में बैठकर लैपटॉप और मोबाइल के जरिए संदिग्ध गतिविधियां कर रहे हैं।
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छापेमारी: पुलिस ने जैसे ही टॉड़ इलाके में दबिश दी, अपराधियों ने भागने की कोशिश की, लेकिन मुस्तैद जवानों ने उज्जवल कुमार शाही, राजेन्द्र मंडल, राजकिशोर शाही, अजीत कुमार मंडल, अमित कुमार शाही और कुन्दन कुमार मंडल को धर दबोचा।
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बरामदगी: इनके पास से 13 स्मार्टफोन, 18 फर्जी सिम कार्ड, 1 लैपटॉप और 4 मोटरसाइकिल बरामद हुई है। ये मोटरसाइकिलें ठगी के पैसों से खरीदी गई थीं।
नया 'AnyDesk' फार्मूला: गूगल के जरिए मौत का जाल
पुलिस की पूछताछ में इन ठगों ने अपने काम करने के शातिर तरीके (Modus Operandi) का खुलासा किया है, जो पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक है:
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फर्जी कस्टमर केयर: ये अपराधी गूगल पर बैंक, ई-कॉमर्स (Amazon/Flipkart) और कुरियर कंपनियों के नाम पर अपने फर्जी मोबाइल नंबर डाल देते थे।
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सॉफ्टवेयर का खेल: जब कोई पीड़ित मदद के लिए इन नंबरों पर कॉल करता, तो ये खुद को कंपनी का बड़ा अधिकारी बताते। मदद के नाम पर ये ग्राहकों से Quick Support या AnyDesk जैसे रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड करवाते थे।
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खाता साफ: जैसे ही पीड़ित ऐप डाउनलोड करता, उसका मोबाइल इन ठगों के नियंत्रण में आ जाता। इसके बाद ये चुपके से ओटीपी और बैंकिंग डिटेल्स निकालकर पलक झपकते ही पूरा बैंक खाता खाली कर देते थे।
'फिशिंग' से 'रिमोट एक्सेस' तक—जामताड़ा का काला सफर
जामताड़ा का साइबर अपराध से नाता दो दशक से भी ज्यादा पुराना है।
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शुरुआती दौर (2010-2015): जामताड़ा का करमाटांड़ इलाका तब चर्चा में आया जब यहाँ के युवाओं ने साधारण मोबाइल फोन से 'लॉटरी' और 'केबीसी' के नाम पर लोगों को ठगना शुरू किया। उस समय इसे 'फिशिंग' कहा जाता था।
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नेटफ्लिक्स और जामताड़ा: इस जिले की बदनामी इतनी बढ़ी कि इस पर वेब सीरीज तक बन गई। इतिहास गवाह है कि जामताड़ा के अपराधियों ने दिल्ली, मुंबई और बैंगलोर जैसे बड़े शहरों के हाई-प्रोफाइल लोगों को भी नहीं बख्शा।
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बदलता पैटर्न: 2020 के बाद जब लोगों ने बैंक अधिकारियों के फोन पर भरोसा करना बंद किया, तो इन ठगों ने अपना तरीका बदल लिया। अब वे 'सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन' (SEO) का सहारा लेकर गूगल पर फर्जी नंबर डाल रहे हैं। करमाटांड़ का पदमडीह और नारायणपुर बेल्ट ऐतिहासिक रूप से इन गतिविधियों का गढ़ रहा है। आज की यह 6 गिरफ्तारियां साबित करती हैं कि तकनीकी दौर में अपराधी पुलिस से दो कदम आगे रहने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जामताड़ा पुलिस का मुखबिर तंत्र भी अब डिजिटल हो चुका है।
देशव्यापी नेटवर्क: झारखंड से केरल तक शिकार
पुलिस की प्राथमिक जांच में यह सामने आया है कि इस गिरोह ने केवल झारखंड ही नहीं, बल्कि दक्षिण भारत और दिल्ली-एनसीआर के लोगों को भी करोड़ों का चूना लगाया है।
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फर्जी सिम का सोर्स: पुलिस अब यह पता लगा रही है कि इन अपराधियों को 18 फर्जी सिम कार्ड कहाँ से और किस एजेंट ने उपलब्ध कराए थे।
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मदर गिरोह की तलाश: गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस अब उन बड़े 'मास्टरमाइंड्स' तक पहुँचने की कोशिश कर रही है जो इन लड़कों को ट्रेनिंग और डेटा मुहैया कराते हैं।
जामताड़ा में हुई यह कार्रवाई साइबर ठगी के खिलाफ युद्ध में एक बड़ी जीत है। एनीडेस्क और क्विक सपोर्ट जैसे ऐप्स का गलत इस्तेमाल आज के समय का सबसे बड़ा डिजिटल खतरा है। पुलिस ने 6 अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजकर एक बड़े सिंडिकेट को अस्थायी रूप से रोक दिया है। लेकिन क्या यह गिरफ्तारी जामताड़ा के उस दाग को धो पाएगी जो सालों से इस जिले की पहचान बन चुका है?
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