Gautam Gambhir Deepfake Case : टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर का डीपफेक शिकार, दिल्ली हाई कोर्ट में 2.5 करोड़ का मानहानि केस
भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच गौतम गंभीर डीपफेक और AI तकनीक के जरिए फर्जीवाड़े का शिकार हुए हैं। उनके नाम पर इस्तीफा देने और सीनियर खिलाड़ियों पर विवादित टिप्पणी के वायरल वीडियो के खिलाफ उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस कानूनी लड़ाई और 2.5 करोड़ के हर्जाने की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।
नई दिल्ली, 19 मार्च 2026 – भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच और विश्व कप विजेता गौतम गंभीर ने डिजिटल दुनिया के सबसे बड़े खतरे यानी 'डीपफेक' (Deepfake) के खिलाफ आर-पार की जंग छेड़ दी है। अपनी साफगोई के लिए मशहूर गंभीर ने उनकी पहचान, आवाज और चेहरे का गलत इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में एक सिविल सूट दाखिल किया है। मामला इतना गंभीर है कि गंभीर ने अपनी छवि को हुए नुकसान के लिए 2.5 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है। एआई (AI) और वॉयस क्लोनिंग के जरिए फैलाए गए इस जाल ने न केवल खेल जगत बल्कि कानूनी गलियारों में भी हड़कंप मचा दिया है।
फेक वीडियो का मायाजाल: क्या था वो 'इस्तीफा' वाला सच?
यह पूरा विवाद साल 2025 के अंत में शुरू हुआ, जब सोशल मीडिया पर गौतम गंभीर के दो वीडियो जंगल की आग की तरह फैल गए।
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पहला फर्जी वीडियो: एआई तकनीक के जरिए गंभीर को हेड कोच के पद से इस्तीफा देते दिखाया गया। इस वीडियो को 20 लाख से ज्यादा लोगों ने देखा और इसे सच मान लिया।
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दूसरा विवादित क्लिप: एक अन्य वीडियो में गंभीर को भारतीय टीम के दिग्गज खिलाड़ियों पर आपत्तिजनक और विवादित टिप्पणी करते दिखाया गया। इसे 17 लाख व्यूज मिले, जिससे खिलाड़ियों के बीच और सोशल मीडिया पर भारी तनाव पैदा हो गया।
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तकनीक का वार: इन वीडियो में फेस-स्वैपिंग और वॉयस क्लोनिंग का ऐसा सटीक इस्तेमाल किया गया था कि आम इंसान के लिए असली और नकली में फर्क करना लगभग नामुमकिन था।
16 संस्थाओं पर आरोप: मेटा से लेकर गूगल तक रडार पर
गौतम गंभीर ने इस मामले में केवल वीडियो बनाने वालों को ही नहीं, बल्कि उन प्लेटफॉर्म्स को भी घेरा है जहाँ यह सामग्री परोसी गई।
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बड़ी टेक कंपनियां: गंभीर ने अपनी याचिका में Meta (Facebook/Instagram), X (Twitter) और Google को पक्षकार बनाया है ताकि अदालत के आदेश का पालन सुनिश्चित हो सके।
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ई-कॉमर्स का नाम: चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें अमेजॉन और फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियों का भी उल्लेख है, ताकि उनके प्लेटफॉर्म पर भी पर्सनैलिटी राइट्स का उल्लंघन न हो सके।
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गंभीर की मांग: उन्होंने स्पष्ट कहा है कि उनकी अनुमति के बिना उनके नाम, चेहरे या आवाज का व्यावसायिक उपयोग तुरंत रोका जाए और सभी फर्जी कंटेंट इंटरनेट से हटाए जाएं।
गंभीर की चिंता: "यह पैसे नहीं, गरिमा का सवाल है"
अदालत में गंभीर ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उनकी पहचान का इस्तेमाल न केवल पैसे कमाने के लिए, बल्कि गलत सूचना (Misinformation) फैलाकर समाज में वैमनस्य पैदा करने के लिए किया जा रहा है। उनके अनुसार, यह उनकी निजी प्रतिष्ठा के साथ-साथ कानून की गरिमा से जुड़ा मुद्दा है।
गौतम गंभीर का दिल्ली हाई कोर्ट पहुँचना एआई के अनियंत्रित दौर में एक चेतावनी की तरह है। जब एक हेड कोच के नाम पर फर्जी इस्तीफा और विवाद गढ़े जा सकते हैं, तो कोई भी सुरक्षित नहीं है। 2.5 करोड़ का यह मानहानि केस उन लोगों के लिए कड़ा सबक होगा जो 'क्रिएटिविटी' के नाम पर दूसरों की पहचान से खिलवाड़ करते हैं। क्या दिल्ली हाई कोर्ट इस मामले में ऐसा फैसला सुनाएगा जो भविष्य में डीपफेक बनाने वालों की रूह कंपा देगा?
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