Latehar Food Poisoning : चाऊमिन से मचा हड़कंप: जतरा मेले में 35 बच्चों की तबीयत बिगड़ी, जानिए पूरा मामला
झारखंड के लातेहार में जतरा मेले के दौरान बड़ा हादसा होते-होते टल गया। चाऊमिन खाने के बाद 35 से ज्यादा बच्चे अचानक बीमार हो गए। क्या है इस मेले का इतिहास और कैसे टली बड़ी त्रासदी, पढ़िए पूरी खबर।
झारखंड के लातेहार जिले के टेमकी गांव में बुधवार की शाम कुछ ऐसा हुआ जिसने पूरे इलाके में अफरा-तफरी मचा दी। जतरा मेले का रौनक भरा माहौल अचानक चीख-पुकार में बदल गया, जब चाऊमिन खाने के बाद 35 से अधिक बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। उल्टी-दस्त की शिकायत से तड़पते बच्चों को देखकर परिजनों में हड़कंप मच गया।
लेकिन राहत की बात यह रही कि समय पर कदम उठाए गए और सभी बच्चों को आनन-फानन में लातेहार सदर अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने तत्काल इलाज शुरू किया और अब सभी बच्चे खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं।
जतरा मेले का इतिहास और महत्व
टेमकी गांव में हर साल जितिया पर्व के बाद जतरा मेले का आयोजन होता है। यह मेला न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि सामाजिक मेल-जोल और लोकसंस्कृति की झलक भी पेश करता है। स्थानीय लोग मानते हैं कि जतरा मेला गांव की एकजुटता का प्रतीक है, जहां लोग पूजा-पाठ, खेलकूद और खानपान के साथ उत्सव का आनंद लेते हैं।
इतिहास की बात करें तो जतरा मेलों का चलन सदियों पुराना है। ग्रामीण अंचलों में ऐसे मेले सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन की धड़कन माने जाते हैं। यही कारण है कि टेमकी गांव का यह मेला भी बच्चों और युवाओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहता है। लेकिन इस बार का मेला खाने-पीने की लापरवाही की वजह से भयावह याद बनकर रह गया।
कैसे बिगड़ी बच्चों की तबीयत?
गांव के बच्चे मेले में लगे खाने-पीने के स्टॉल पर उमड़े हुए थे। ज्यादातर बच्चों ने चाऊमिन खाई, जो उनके लिए स्वाद तो बना लेकिन सेहत पर भारी पड़ गया। कुछ ही देर में कई बच्चों को उल्टी-दस्त शुरू हो गई।
स्थिति इतनी बिगड़ गई कि गांव में हड़कंप मच गया। परिवारजन बच्चों को लेकर इधर-उधर भागते नजर आए। इसी बीच जिला परिषद सदस्य विनोद उरांव और पूर्व मुखिया राजेश उरांव ने तुरंत एम्बुलेंस की व्यवस्था कर बच्चों को अस्पताल पहुंचाया।
डॉक्टरों ने कैसे बचाई जान
लातेहार सदर अस्पताल में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. जय प्रकाश जायसवाल ने बताया कि शुरुआत में कुछ बच्चे गंभीर स्थिति में थे। डिहाइड्रेशन और लगातार उल्टी से उनकी हालत बिगड़ती जा रही थी। लेकिन समय पर इलाज मिलने से सभी बच्चों की जान बच गई। अब धीरे-धीरे सभी बच्चे स्वस्थ हो रहे हैं।
डॉ. जायसवाल ने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाएं अक्सर अस्वच्छ खानपान की वजह से होती हैं। मेले में खुले में बिकने वाले खाने-पीने के सामान बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं।
गांव में चिंता और प्रशासन पर सवाल
इस घटना के बाद गांव में चिंता का माहौल है। ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि आखिर मेले में बिकने वाले खाने की जांच क्यों नहीं की जाती। मेले में सुरक्षा और स्वास्थ्य विभाग की टीम की मौजूदगी क्यों नहीं रहती?
लोगों का कहना है कि अगर समय पर जनप्रतिनिधि मदद के लिए आगे नहीं आते तो यह हादसा बड़ा रूप ले सकता था। प्रशासन के लिए यह चेतावनी है कि आने वाले आयोजनों में खाद्य सामग्री और स्वास्थ्य सुविधाओं की पहले से निगरानी की जाए।
टला हादसा, लेकिन सीख जरूरी
लातेहार के टेमकी गांव का जतरा मेला इस बार खुशी से ज्यादा चिंता और डर की याद छोड़ गया। हालांकि सभी बच्चे अब खतरे से बाहर हैं, लेकिन इस घटना ने साफ कर दिया कि ऐसे आयोजनों में खाने-पीने की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना बेहद जरूरी है।
चाऊमिन से जुड़ा यह हादसा एक बड़ी चेतावनी है—मजे की भूख कभी भी खतरे में बदल सकती है।
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