Potka Kidnapper Suspicion: बच्चा चोर? पोटका में विक्षिप्त को घेरकर ग्रामीणों ने मचाया हड़कंप, झोले से निकले बच्चों के कपड़े
पोटका के शंकरदा गांव में बच्चा चोर के संदेह में ग्रामीणों ने एक विक्षिप्त व्यक्ति को पकड़ लिया। झोले में बच्चों के कपड़े मिलने से सनसनी फैल गई। भीड़ जुटने के बावजूद ग्रामीणों की समझदारी से अनहोनी टल गई। मुखिया और पुलिस ने मौके पर पहुँचकर मामले को शांत कराया। पूरी खबर यहाँ देखें।
पोटका/पूर्वी सिंहभूम, 11 मार्च 2026 – झारखंड के ग्रामीण इलाकों में एक बार फिर 'बच्चा चोर' की अफवाह ने दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। ताजा मामला पोटका प्रखंड के शंकरदा गांव का है, जहाँ बुधवार को एक विक्षिप्त व्यक्ति को ग्रामीणों ने बच्चा चोर समझकर पकड़ लिया। गनीमत यह रही कि भीड़ ने कानून हाथ में नहीं लिया और समय रहते स्थानीय जनप्रतिनिधि और पुलिस ने हस्तक्षेप कर एक निर्दोष की जान बचा ली।
झोले में क्या था? संदेह की असली वजह
पकड़ा गया व्यक्ति मानसिक रूप से विक्षिप्त (Mentally Ill) लग रहा था, लेकिन उसकी वेशभूषा और उसके पास मौजूद एक झोले ने ग्रामीणों का माथा ठनका दिया।
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बच्चों के कपड़े: जब ग्रामीणों ने व्यक्ति के झोले की तलाशी ली, तो उसमें विभिन्न प्रकार के बच्चों के कपड़े पाए गए।
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वेशभूषा और खामोशी: विक्षिप्त होने के कारण वह व्यक्ति अपना परिचय देने में असमर्थ था। न तो वह अपना नाम बता पा रहा था और न ही यह कि वह कहाँ से आया है।
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भीड़ का जमावड़ा: देखते ही देखते पूरे शंकरदा गांव में यह खबर फैल गई कि एक बच्चा चोर पकड़ा गया है। लोग लाठी-डंडों के साथ जुटने लगे, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
मुखिया की समझदारी: उग्र भीड़ को ऐसे रोका
घटना की सूचना मिलते ही पंचायत के मुखिया सारजोम मार्डी तुरंत मौके पर पहुँचे। उन्होंने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए कमान संभाली।
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संवाद की कोशिश: मुखिया ने पकड़े गए व्यक्ति से पूछताछ की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिलने पर उन्होंने ग्रामीणों को समझाया कि यह व्यक्ति बच्चा चोर नहीं बल्कि मानसिक रूप से बीमार है।
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अहिंसक रुख: पोटका के ग्रामीणों ने इस बार गजब की समझदारी दिखाई। अतीत में झारखंड में बच्चा चोर की अफवाहों पर हुई मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं से सबक लेते हुए, ग्रामीणों ने विक्षिप्त के साथ मारपीट नहीं की।
पुलिस की एंट्री: पोटका थाना प्रभारी ने संभाली कमान
मुखिया सारजोम मार्डी ने तत्काल इस घटना की जानकारी पोटका थाना प्रभारी सन्नी टोप्पो को दी। सूचना मिलते ही सब इंस्पेक्टर कुंदन वर्मा पुलिस बल के साथ शंकरदा गांव पहुँचे।
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हिरासत में विक्षिप्त: पुलिस ने भीड़ के चंगुल से विक्षिप्त व्यक्ति को अपनी सुरक्षा में लिया और उसे थाने ले आई।
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जांच जारी: पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह व्यक्ति कहाँ का रहने वाला है और उसके झोले में बच्चों के कपड़े कहाँ से आए। संभावना जताई जा रही है कि किसी ने दान में उसे ये कपड़े दिए होंगे या उसने कहीं से उठा लिए होंगे।
सतर्कता जरूरी: अफवाहों का न बनें शिकार
झारखंड के कई जिलों में पिछले कुछ हफ्तों से बच्चा चोरी की खबरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जो अक्सर फर्जी होते हैं।
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कानून न लें हाथ में: पोटका पुलिस ने अपील की है कि यदि कोई संदिग्ध व्यक्ति नजर आता है, तो तुरंत पुलिस को सूचना दें। कानून अपने हाथ में लेना भारी पड़ सकता है।
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विक्षिप्तों पर खतरा: अक्सर बेघर और मानसिक रूप से बीमार लोग इन अफवाहों की चपेट में आ जाते हैं। शंकरदा गांव के ग्रामीणों ने जो धैर्य दिखाया, वह पूरे जिले के लिए एक मिसाल है।
पोटका की इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जागरूकता ही अफवाहों का सबसे बड़ा इलाज है। यदि मुखिया और ग्रामीणों ने सूझबूझ न दिखाई होती, तो आज एक बड़ी अनहोनी हो सकती थी। फिलहाल वह व्यक्ति पुलिस की सुरक्षा में है और उसके परिजनों की तलाश की जा रही है।
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