Jemco Summer Camp: कालीमाटी आजाद बस्ती स्कूल में बच्चों ने मचाया धमाल, 'सीखें, खेलें और सृजन करें' के मंत्र से निखरा हुनर

जमशेदपुर के जेम्को कालीमाटी आजाद बस्ती स्कूल में चल रहे तीन दिवसीय समर कैंप के दूसरे दिन बच्चों ने योग, पोस्टर मेकिंग और स्वदेशी खेलों में अपना अद्भुत हुनर दिखाया है। प्रधानाध्यापक धनंजय श्रीवास्तव की अनूठी पहल की पूरी लाइव रिपोर्ट यहाँ देखें।

May 20, 2026 - 17:27
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Jemco Summer Camp: कालीमाटी आजाद बस्ती स्कूल में बच्चों ने मचाया धमाल, 'सीखें, खेलें और सृजन करें' के मंत्र से निखरा हुनर
Jemco Summer Camp: कालीमाटी आजाद बस्ती स्कूल में बच्चों ने मचाया धमाल, 'सीखें, खेलें और सृजन करें' के मंत्र से निखरा हुनर

जमशेदपुर, 20 मई 2026 – लौहनगरी जमशेदपुर के औद्योगिक और घनी आबादी वाले क्षेत्र जेम्को आजाद बस्ती स्थित उत्क्रमित उच्च विद्यालय, कालीमाटी में बच्चों की छिपी हुई प्रतिभा को तराशने के लिए आयोजित तीन दिवसीय 'स्पेशल समर कैंप' (Summer Camp) के दूसरे दिन बुधवार को स्कूली बच्चों का अभूतपूर्व और जादुई उत्साह देखने को मिला। 'सीखें, खेलें और सृजन करें' के मुख्य विजन और क्रांतिकारी मंत्र पर आधारित इस समर कैंप का मूल उद्देश्य केवल बच्चों को छुट्टियों में व्यस्त रखना नहीं, बल्कि खेल-खेल में उनके भीतर छुपे हुनर, शारीरिक फिटनेस और मानसिक एकाग्रता को एक नया आसमान देना है। कैंप के दूसरे दिन छात्र-छात्राओं ने सुबह के सत्र में जहां कठिन शारीरिक अभ्यास और योग के जरिए अपनी फिटनेस को मजबूत किया, वहीं दोपहर के रचनात्मक सत्र में पोस्टर मेकिंग, स्वदेशी खेल प्रतिभा और अपनी पारंपरिक कला-संस्कृति से जुड़ी विभिन्न लाइव प्रतियोगिताओं में रिकॉर्ड तोड़ भागीदारी दर्ज की। इस दौरान तपती गर्मी से दूर बच्चों ने कैरम बोर्ड, लूडो और दिमागी खेल शतरंज जैसे चुनिंदा इंडोर गेम्स का भी जमकर आनंद उठाया।

कैंप की ग्राउंड रिपोर्ट: पोस्टर मेकिंग में उकेरा भविष्य, इंडोर गेम्स और बाल संसद का शानदार मैनेजमेंट

विद्यालय प्रबंधन और स्थानीय शिक्षा विभाग के सहयोग से चल रहे इस अनूठे कैंप के दूसरे दिन का शेड्यूल बच्चों के सर्वांगीण विकास (Holistic Development) को ध्यान में रखकर बेहद वैज्ञानिक तरीके से तैयार किया गया था।

  • रचनात्मकता का लाइव प्रदर्शन: पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता के दौरान जेम्को आजाद बस्ती के इन प्रतिभावान बच्चों ने पर्यावरण संरक्षण, जल संचयन और डिजिटल इंडिया जैसे विषयों पर अपनी कूची से ऐसे जीवंत रंग बिखेरे कि देखने वाले दंग रह गए।

  • स्वदेशी खेलों की लौटी रौनक: डिजिटल स्क्रीन और मोबाइल गेम्स की लत के इस आधुनिक दौर में इस कैंप के जरिए बच्चों को भारतीय पारंपरिक और स्वदेशी इनडोर खेलों जैसे शतरंज और कैरम बोर्ड से दोबारा जोड़ा गया, जिससे बच्चों की क्रिटिकल थिंकिंग (तार्किक सोच) को बढ़ावा मिल रहा है।

  • बाल संसद ने संभाली कमान: इस पूरे समर कैंप की सबसे खूबसूरत बात इसका जमीनी प्रबंधन है। विद्यालय की 'बाल संसद' की कमान संभाल रहे छात्र सोनू रजक और नंदनी कुमारी ने सीनियर वॉलेंटियर्स के रूप में छोटे बच्चों की प्रतियोगिताओं का ऐसा शानदार संचालन किया, जिसने सबको प्रभावित किया।

प्रधानाध्यापक का संदेश: खेल और कला ही बच्चों के मानसिक विकास का असली मंच

कालीमाटी जेम्को विद्यालय के दूरदर्शी प्रधानाध्यापक धनंजय श्रीवास्तव ने बच्चों के इस अद्भुत प्रदर्शन को देखकर उनका हौसला बढ़ाया और एक बड़ा संदेश दिया।

  1. मानसिक और शारीरिक संतुलन: प्रधानाध्यापक धनंजय श्रीवास्तव ने कहा, "किताबी ज्ञान के साथ-साथ यह समर कैंप बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए एक बेहतरीन और अनिवार्य मंच है। यहाँ खेल-खेल में उनकी रचनात्मकता निखर रही है और उनमें टीम वर्क (सामूहिक भावना) की भावना पैदा हो रही है।"

  2. शिक्षकों की समर्पित टीम: इस पूरे कैंप को सफल बनाने में विद्यालय की वरिष्ठ शिक्षिका कंचन कुमारी, एंजेलिना टीगा और करनदीप सिंह की कोर टीम लगातार ग्राउंड पर डटी हुई है, जो बच्चों को हर विधा की बारीकियां सिखा रहे हैं।

सरकारी स्कूलों में ऐसे समर कैंपों का परमानेंट मॉडल लागू करना समय की मांग

उत्क्रमित उच्च विद्यालय, कालीमाटी जेम्को आजाद बस्ती के प्रधानाध्यापक धनंजय श्रीवास्तव और उनकी पूरी टीम द्वारा आयोजित यह तीन दिवसीय समर कैंप राज्य के बाकी सभी सरकारी स्कूलों के लिए एक बेहतरीन और अनुकरणीय मॉडल (Role Model) है। अमूमन गर्मियों की छुट्टियों में सरकारी स्कूलों के बच्चे बिना किसी मार्गदर्शन के अपना समय गंवा देते हैं या मोबाइल स्क्रीन में खो जाते हैं। ऐसे में 'सीखें, खेलें और सृजन करें' की यह लाइव एक्टिविटी बच्चों के भीतर के आत्मविश्वास को जगाने का काम करती है। झारखंड शिक्षा विभाग को चाहिए कि वे बजट आवंटित कर राज्य के सभी दूर-दराज के ग्रामीण और शहरी सरकारी स्कूलों में इस तरह के कैंपों को परमानेंट वार्षिक कैलेंडर का हिस्सा बनाएं, ताकि हमारे देश का भविष्य खेल और कला के क्षेत्र में भी वैश्विक पटल पर चमके।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।