Jharkhand Budget: 5508 करोड़ का अनुपूरक बजट पेश, जानिए कौन-कौन से विभाग हुए मालामाल!
झारखंड सरकार ने 5508 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश किया! जानिए किस विभाग को कितनी राशि मिली और 3 मार्च के बजट में क्या हो सकते हैं बड़े ऐलान?

रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में एक बड़ा अपडेट आया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए 5508 करोड़ रुपये का तृतीय अनुपूरक बजट पेश किया। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सदन में इस बजट को पेश करते हुए कहा कि सरकार की प्राथमिकता शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सुरक्षा और ग्रामीण विकास पर केंद्रित होगी। इस बजट से झारखंड के विकास की दिशा और दशा तय होगी।
कौन-कौन से विभाग हुए मालामाल?
इस अनुपूरक बजट में मुख्य रूप से 14 बड़े विभागों को भारी भरकम धनराशि दी गई है। इसमें सबसे अधिक 873.29 करोड़ रुपये ग्रामीण कार्य विभाग को दिए गए हैं, जिससे गांवों में सड़कों और आधारभूत ढांचे का विकास किया जाएगा।
अन्य महत्वपूर्ण आवंटन इस प्रकार हैं:
- ऊर्जा विभाग: 971.80 करोड़ रुपये
- कृषि और पशुपालन सहकारिता विभाग: 176.48 करोड़ रुपये
- पशुपालन विभाग: 241.34 करोड़ रुपये
- स्वास्थ्य विभाग: 142.89 करोड़ रुपये
- उद्योग विभाग: 274.54 लाख रुपये
- स्कूली शिक्षा: 188.50 करोड़ रुपये
- महिला सुरक्षा: 266.68 करोड़ रुपये
महिला सुरक्षा और शिक्षा पर सरकार की खास नजर!
इस बजट में महिला सुरक्षा को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। महिला सुरक्षा के लिए 266.68 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जिससे राज्य में महिला हेल्पलाइन, सुरक्षा उपाय और महिला सशक्तिकरण योजनाओं को मजबूत किया जाएगा।
वहीं, शिक्षा के क्षेत्र में भी सरकार ने कुल 58,143 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसमें स्कूली शिक्षा के लिए 188.50 करोड़ और प्राथमिक शिक्षा के लिए 392.93 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।
आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट और बजट पर सभी की नजर!
28 फरवरी को झारखंड विधानसभा में आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट पेश की जाएगी, जिससे राज्य की मौजूदा आर्थिक स्थिति का खुलासा होगा। वहीं, 3 मार्च को झारखंड का पूर्ण बजट पेश किया जाएगा। चूंकि यह हेमंत सोरेन सरकार के नए कार्यकाल का पहला बजट होगा, इसलिए इसे लेकर जनता और विशेषज्ञों की निगाहें टिकी हुई हैं।
क्या कहती है झारखंड की बजट इतिहास?
झारखंड का बजट इतिहास देखे तो राज्य का पहला बजट 2001 में पेश किया गया था। तब से लेकर अब तक हर बजट में खनिज संपदा पर आधारित विकास मॉडल को प्राथमिकता दी गई है। हालांकि, शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत संरचना पर खर्च की मांग लगातार बढ़ती रही है। पिछले कुछ वर्षों में ग्रामीण विकास, महिला सुरक्षा और शिक्षा पर खर्च को बढ़ाने की जरूरत महसूस की गई थी, जिसे इस बार के बजट में प्राथमिकता दी गई है।
क्या इस बजट से जनता को राहत मिलेगी?
सरकार के दावों के अनुसार, इस बजट से ग्रामीण विकास, महिला सुरक्षा, शिक्षा और आधारभूत संरचना को मजबूती मिलेगी। लेकिन असल सवाल यह है कि क्या सरकार बजट को सही से लागू कर पाएगी? झारखंड में पहले भी कई योजनाएं बनीं, लेकिन भ्रष्टाचार और लापरवाही के चलते जनता तक पूरा लाभ नहीं पहुंच सका।
क्या कह रहे हैं राजनीतिक विशेषज्ञ?
विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार ने चुनाव से पहले बड़े बजट का ऐलान कर जनता को लुभाने की कोशिश की है। भाजपा के नेताओं का कहना है कि पहले सरकार यह साबित करे कि पिछले बजट का पैसा कहां खर्च हुआ। वहीं, झामुमो और कांग्रेस का दावा है कि यह बजट झारखंड के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
अब जनता की नजर 3 मार्च को पेश होने वाले पूर्ण बजट पर!
अब सभी की निगाहें 3 मार्च को पेश होने वाले पूर्ण बजट पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस बजट में किस वर्ग को कितनी राहत देती है और झारखंड के विकास के लिए कौन-कौन सी योजनाएं लागू की जाएंगी।
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