Giridih Conflict: गिरिडीह में गैरमजरुआ जमीन पर खूनी संघर्ष, जमकर चले पत्थर, जमुआ के घोरंजो में धारा 163 लागू
गिरिडीह के जमुआ में गैरमजरुआ जमीन को लेकर दो गुटों में भीषण पथराव हुआ है। घोरंजो गांव में मचे इस बवाल और प्रशासन द्वारा लागू की गई निषेधाज्ञा की पूरी इनसाइड रिपोर्ट यहाँ देखें।
गिरिडीह/जमुआ, 14 अप्रैल 2026 – झारखंड के गिरिडीह जिले के जमुआ थाना क्षेत्र अंतर्गत घोरंजो गांव में मंगलवार को जमीन विवाद ने एक खौफनाक मोड़ ले लिया। एक विवादित गैरमजरुआ जमीन पर कब्जे को लेकर दो पक्ष इस कदर आमने-सामने आए कि पूरा गांव युद्ध के मैदान में तब्दील हो गया। देखते ही देखते दोनों ओर से भारी पत्थरबाजी शुरू हो गई, जिससे सड़क पर चल रहे राहगीरों और स्थानीय लोगों के बीच अफरा-तफरी मच गई। घटना की भयावहता को देखते हुए प्रशासन ने पूरे इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया है और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए निषेधाज्ञा लागू कर दी है।
विवाद की चिंगारी: गैरमजरुआ जमीन पर काम पड़ गया भारी
घोरंजो गांव में तनाव तब शुरू हुआ जब एक पक्ष ने लंबे समय से विवादित चल रही गैरमजरुआ जमीन पर निर्माण कार्य शुरू करने की कोशिश की।
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अचानक हुआ हमला: दूसरे पक्ष ने जैसे ही काम शुरू होते देखा, उन्होंने विरोध दर्ज कराया। बहसबाजी ने चंद मिनटों में उग्र रूप ले लिया और दोनों तरफ से लोग लाठी-डंडों और पत्थरों के साथ सड़क पर उतर आए।
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सड़क पर बवाल: पत्थरबाजी के कारण कुछ देर के लिए आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित ठिकानों की ओर भागने लगे।
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पुलिस की एंट्री: सूचना मिलते ही जमुआ थाना प्रभारी विभूति देव अपने गश्ती दल के साथ मौके पर पहुँचे। पुलिस की तत्परता ने मामले को बड़े दंगों में बदलने से रोक लिया।
प्रशासनिक शिकंजा: धारा 163 लागू और कड़ी चेतावनी
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिले के बड़े अधिकारी भी घोरंजो गांव पहुँच गए हैं।
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अंचल अधिकारी का सख्त रुख: जमुआ के अंचल अधिकारी (CO) नरेश कुमार वर्मा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गैरमजरुआ जमीन पर किसी भी तरह का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि कानून को हाथ में लेने वाले पत्थरबाजों को चिन्हित कर जेल भेजा जाएगा।
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निषेधाज्ञा लागू: खोरी महुआ अनुमंडल पदाधिकारी के निर्देश पर इलाके में बीएनएस (BNS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। अब वहां एक साथ पांच से ज्यादा लोगों के जमा होने पर पाबंदी है।
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एफआईआर की तैयारी: पुलिस पत्थरबाजी के वीडियो फुटेज खंगाल रही है ताकि दोषियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की जा सके।
जमीन के झगड़े और 'लाल जमीन' की त्रासदी
गिरिडीह जिला ऐतिहासिक रूप से अभ्रक (Mica) और घने जंगलों के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन यहाँ की जमीन का इतिहास संघर्षों से भरा है।
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गैरमजरुआ जमीन का पेंच: झारखंड के इतिहास में गैरमजरुआ जमीन (सरकारी जमीन) हमेशा से विवादों का केंद्र रही है। जमुआ और देवरी जैसे इलाकों में कई ऐतिहासिक संघर्ष केवल इसलिए हुए क्योंकि भू-माफियाओं और स्थानीय दबंगों ने इन जमीनों पर नजर गड़ा रखी थी।
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सामुदायिक संघर्ष की विरासत: घोरंजो गांव और आसपास के क्षेत्रों में पहले भी जमीन विवादों के कारण सामाजिक ताना-बाना बिगड़ने के उदाहरण मिलते रहे हैं। 1990 के दशक के बाद से यहाँ भूमि सुधार कानूनों की जटिलता के कारण छोटे-छोटे विवाद उग्र हिंसा का रूप लेते रहे हैं।
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प्रशासनिक सतर्कता का इतिहास: गिरिडीह जिला प्रशासन ने पूर्व में भी भूमि विवादों को सुलझाने के लिए 'जमीन समाधान शिविर' जैसे ऐतिहासिक कदम उठाए थे, लेकिन घोरंजो की इस घटना ने साफ कर दिया है कि धरातल पर अब भी बहुत कुछ करना बाकी है।
वर्तमान स्थिति: दहशत के साये में घोरंजो गांव
फिलहाल गांव में शांति है, लेकिन यह 'तूफान से पहले वाली शांति' जैसा महसूस हो रहा है।
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भारी पुलिस बल: गांव के चौक-चौराहों पर पुलिस बल तैनात है। विभूति देव स्वयं स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।
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अधिकारियों की अपील: सीओ नरेश कुमार वर्मा ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी बहकावे में न आएं और विवाद का समाधान केवल सरकारी दस्तावेजों और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से ही ढूंढें।
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जांच का दायरा: पुलिस उन बाहरी तत्वों की भी तलाश कर रही है जिन्होंने पत्थरबाजी के दौरान भीड़ को उकसाया था।
गिरिडीह के जमुआ में हुई यह घटना झारखंड के ग्रामीण अंचलों में जमीन को लेकर बढ़ती गहरी रंजिश का प्रमाण है। घोरंजो गांव में पत्थरबाजी और धारा 163 का लागू होना यह बताता है कि एक छोटी सी चिंगारी कैसे बड़े विस्फोट का रूप ले सकती है। अंचल अधिकारी और थाना प्रभारी की मुस्तैदी ने आज एक बड़ी अनहोनी को टाल दिया है, लेकिन असली चुनौती उस गैरमजरुआ जमीन के विवाद का स्थायी समाधान निकालने की है। अब देखना यह है कि प्रशासन पत्थरबाजी के दोषियों पर कितनी कड़ी कार्रवाई करता है ताकि भविष्य में कोई कानून को हाथ में लेने की हिम्मत न कर सके।
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