Giridih Elephant: गिरिडीह में झुंड से भटके गजराज ने बुजुर्ग को पटका, हजारीबाग में इलाज के दौरान मौत, इलाके में भारी दहशत

गिरिडीह के बगोदर में जंगली हाथी के हमले में बुजुर्ग रोशन मंडल की मौत हो गई है। झुंड से भटके हाथी ने गम्हरिया गांव में अचानक हमला कर उन्हें कुचल दिया था। इलाके में हाथियों के बढ़ते आतंक और वन विभाग की कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।

Mar 16, 2026 - 14:01
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Giridih Elephant:  गिरिडीह में झुंड से भटके गजराज ने बुजुर्ग को पटका, हजारीबाग में इलाज के दौरान मौत, इलाके में भारी दहशत
Giridih Elephant: गिरिडीह में झुंड से भटके गजराज ने बुजुर्ग को पटका, हजारीबाग में इलाज के दौरान मौत, इलाके में भारी दहशत

गिरिडीह/बगोदर, 16 मार्च 2026 – झारखंड के गिरिडीह जिले में मानव-हाथी द्वंद्व (Man-Animal Conflict) ने एक और मासूम जिंदगी लील ली है। बगोदर थाना क्षेत्र के मुंडरो पंचायत अंतर्गत गम्हरिया गांव में सोमवार को उस वक्त चीख-पुकार मच गई, जब झुंड से भटके एक विशालकाय जंगली हाथी ने एक बुजुर्ग पर जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में गंभीर रूप से घायल रोशन मंडल की हजारीबाग सदर अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में हाथियों के बढ़ते खतरे और वन विभाग की सुरक्षा तैयारियों की पोल खोल दी है।

अचानक मौत बनकर आया गजराज: कैसे हुआ हादसा?

गम्हरिया गांव के निवासी रोशन मंडल अपनी दैनिक दिनचर्या में व्यस्त थे, तभी जंगल से भटककर आए एक हाथी ने उन पर हमला बोल दिया।

  • अचानक हमला: प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हाथी इतना आक्रामक था कि रोशन मंडल को संभलने का मौका तक नहीं मिला। हाथी ने उन्हें उठाकर पटक दिया, जिससे उनके शरीर के अंदरूनी हिस्सों में गंभीर चोटें आईं।

  • इलाज का संघर्ष: स्थानीय लोगों ने साहस दिखाते हुए हाथी को खदेड़ा और तुरंत घायल रोशन मंडल को बगोदर ट्रामा सेंटर पहुँचाया। प्राथमिक उपचार के बाद उनकी नाजुक हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें हजारीबाग सदर अस्पताल रेफर कर दिया।

  • अंतिम सांस: हजारीबाग में विशेषज्ञों की टीम ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन चोटें जानलेवा साबित हुईं और इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

प्रशासनिक हलचल: आर्थिक मदद की गुहार

घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मुंडरो मुखिया बंधु महतो ने इस दुखद घटना की आधिकारिक जानकारी हजारीबाग पूर्वी वन प्रमंडल के डीएफओ (DFO) को दे दी है।

  1. मुआवजे की मांग: मुखिया ने मांग की है कि पीड़ित परिवार को सरकार द्वारा निर्धारित मुआवजे के साथ-साथ अंतिम संस्कार के लिए तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।

  2. नेताओं का आश्वासन: भाकपा माले नेता और पूर्व मुखिया प्रतिनिधि उमेश मंडल ने भी अस्पताल पहुँचकर शोक संवेदना व्यक्त की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वन विभाग से मिलने वाली हर संभव सरकारी मदद परिवार को जल्द से जल्द दिलाई जाएगी।

गिरिडीह और हाथियों का खूनी कॉरिडोर

गिरिडीह और हजारीबाग की सीमा पर स्थित बगोदर का इलाका ऐतिहासिक रूप से हाथियों का एक प्रमुख 'माइग्रेशन कॉरिडोर' (आवाजाही का रास्ता) रहा है।

  • जंगलों का विनाश: पिछले दो दशकों में जंगलों के बीच से गुजरने वाले हाईवे और बढ़ते अतिक्रमण के कारण हाथियों के प्राकृतिक रास्ते बाधित हुए हैं। इतिहास गवाह है कि जब भी कोई हाथी अपने झुंड से भटककर 'लोन एलिफेंट' (अकेला हाथी) बन जाता है, तो वह ज्यादा आक्रामक और खतरनाक हो जाता है।

  • अतीत के जख्म: 2020 और 2022 में भी बगोदर और सरिया ब्लॉक के गांवों में हाथियों ने भारी तबाही मचाई थी, जिसमें कई घरों को ध्वस्त किया गया था और फसलें बर्बाद हुई थीं। गिरिडीह का यह क्षेत्र बंगाल और ओडिशा से आने वाले हाथियों के रूट में पड़ता है। रोशन मंडल की मौत इसी खूनी संघर्ष का नया अध्याय है, जो यह याद दिलाता है कि जब तक हाथियों के कॉरिडोर सुरक्षित नहीं होंगे, इंसानी बस्तियां असुरक्षित रहेंगी।

इलाके में अलर्ट: क्या फिर हमला करेगा हाथी?

बुजुर्ग की मौत के बाद गम्हरिया और आसपास के मुंडरो पंचायत के गांवों में भारी दहशत व्याप्त है।

  • ग्रामीणों का डर: लोगों को डर है कि अकेला हाथी अभी भी आसपास के जंगलों में छिपा हो सकता है और रात के वक्त दोबारा बस्ती का रुख कर सकता है।

  • वन विभाग की टीम: वन विभाग ने ग्रामीणों को जंगल की ओर न जाने और शाम के बाद घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी है। हाथियों को भगाने के लिए टॉर्च और पटाखों का इंतजाम किया जा रहा है।

रोशन मंडल की मौत ने गिरिडीह के ग्रामीण अंचल को झकझोर दिया है। हाथी का हमला केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि वन्यजीव प्रबंधन की विफलता का संकेत है। अब जिम्मेदारी वन विभाग की है कि वह न केवल पीड़ित परिवार को मुआवजा दिलाए, बल्कि उस भटके हुए हाथी को सुरक्षित तरीके से गहरे जंगल में खदेड़े ताकि और कोई परिवार उजड़ने से बच सके।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।