Sonari Devotion:सोनारी के उपकार संघ में जलेंगे 75 ज्योति कलश, चैत्र नवरात्र पर दिखेगा केदारनाथ ज्योतिर्लिंग का अद्भुत पंडाल
जमशेदपुर के सोनारी स्थित उपकार संघ में इस वर्ष चैत्र नवरात्र और जवारा पूजा की भव्य तैयारी है। केदारनाथ ज्योतिर्लिंग की थीम पर आधारित पंडाल और 75 अखंड ज्योति कलश मुख्य आकर्षण होंगे। जसगीत प्रतियोगिता और विसर्जन शोभायात्रा की पूरी समय सारिणी और इतिहास यहाँ देखें।
जमशेदपुर/सोनारी, 16 मार्च 2026 – लौहनगरी जमशेदपुर के सोनारी बुधराम मोहल्ला स्थित उपकार संघ मंदिर प्रांगण में इस वर्ष चैत्र नवरात्र का उत्सव अपनी भव्यता की नई मिसाल पेश करने जा रहा है। शक्ति की उपासना और आस्था के महापर्व जवारा पूजा के उपलक्ष्य में इस साल संघ परिसर में 75 ज्योति कलश प्रज्वलित किए जाएंगे। संघ के अध्यक्ष श्री सतपाल साहू ने प्रेस वार्ता के दौरान इस भक्तिमय अनुष्ठान की पूरी रूपरेखा साझा की। इस वर्ष का सबसे बड़ा आकर्षण भक्ति और शिल्प का संगम होगा, जहाँ श्रद्धालुओं को सोनारी में ही बाबा केदारनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन होंगे।
केदारनाथ की थीम पर पंडाल: मुख्य आकर्षणों की सूची
उपकार संघ ने इस बार अपनी सजावट और पंडाल के लिए विशेष तैयारी की है।
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दिव्य पंडाल: इस वर्ष पूजा पंडाल को उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ ज्योतिर्लिंग के स्वरूप में ढाला जा रहा है।
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75 अखंड ज्योति: 20 मार्च शुक्रवार को 75 ज्योति कलशों का प्रज्वलन होगा, जो पूरे नौ दिनों तक मंदिर को दैवीय प्रकाश से सराबोर रखेंगे।
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जसगीत प्रतियोगिता: इस वर्ष 'जवारा जसगीत प्रतियोगिता' का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें शहर की प्रतिष्ठित पूजा समितियां अपनी कला और भक्ति का प्रदर्शन करेंगी।
पूजा कार्यक्रम: तिथियों का पूरा विवरण
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए संघ ने विस्तृत कार्यक्रम जारी किया है:
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19 मार्च: पूजा पंडाल का भव्य उद्घाटन और संध्या बेला में 'बिरही भिगोने' का पारंपरिक कार्यक्रम।
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23 मार्च (सोमवार): शाम 4 बजे 'बाना आगवानी', शाम 7 बजे मां जगदम्बे का विशेष श्रृंगार पूजन और ध्वजारोहण। इसके बाद रात 7:30 बजे से जसगीत की महफिल सजेगी।
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26 मार्च: धार्मिक अनुष्ठान की पूर्णाहुति।
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27 मार्च: सुबह 8 बजे विशाल विसर्जन शोभायात्रा, जो सोनारी के विभिन्न मार्गो (गुदरी बाजार, नर्स क्वार्टर चौक, पुराना सीपीएन क्लब) से होते हुए कपाली घाट पहुँचेगी।
सोनारी का उपकार संघ और जवारा पूजा की परंपरा
जमशेदपुर का सोनारी इलाका ऐतिहासिक रूप से अपनी विविधता और धार्मिक एकजुटता के लिए जाना जाता है।
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सांस्कृतिक विरासत: उपकार संघ दशकों से इस क्षेत्र में जवारा पूजा का आयोजन करता आ रहा है। जवारा पूजा का संबंध मूलतः छत्तीसगढ़ी और मध्य भारतीय संस्कृति से है, जिसे जमशेदपुर के प्रवासियों ने यहाँ की मिट्टी में रच-बस दिया है।
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आस्था का विकास: शुरुआत में छोटे स्तर पर होने वाली यह पूजा आज शहर के बड़े आयोजनों में शुमार हो गई है। ऐतिहासिक रूप से 'जवारा' बोने की रस्म धरती की उर्वरता और शक्ति की देवी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का प्रतीक है। सोनारी के इतिहास में उपकार संघ की यह पूजा न केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह मुहल्ले की आपसी एकता और सेवा भावना का भी परिचायक रही है। केदारनाथ की थीम चुनना यह दर्शाता है कि यह संघ अब आधुनिक शिल्प के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी पौराणिक जड़ों से जोड़ना चाहता है।
तैयारियों में जुटे सदस्य
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने के लिए उपकार संघ की पूरी टीम दिन-रात एक कर रही है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में अध्यक्ष सतपाल साहू के साथ उपाध्यक्ष उमाशंकर शर्मा, महासचिव विश्वकर्मा वर्मा, सचिव राजीव वर्मा और कोषाध्यक्ष नरेंद्र साहू सहित बालकृष्ण साहू, साहिल शर्मा और अन्य सक्रिय सदस्य मौजूद रहे।
सोनारी के उपकार संघ में होने वाली यह जवारा पूजा केवल एक रस्म नहीं, बल्कि आस्था का महाकुंभ है। 75 ज्योति कलशों की रोशनी और केदारनाथ के स्वरूप में सजा पंडाल इस वर्ष जमशेदपुर के लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा। अगर आप भी भक्ति के रस में डूबना चाहते हैं, तो 19 मार्च से शुरू होने वाले इस दिव्य उत्सव का हिस्सा जरूर बनें।
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