Maiya Scheme Yojna : बड़ा धोखा, मंईयां सम्मान योजना पर लगा 'अघोषित' ब्रेक, 1.33 लाख महिलाओं के नाम कटे, नया रजिस्ट्रेशन ठप
झारखंड की मंईयां सम्मान योजना में पिछले 11 महीनों में 1.33 लाख से अधिक महिलाओं के नाम काट दिए गए हैं और नए रजिस्ट्रेशन पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। सरकारी सिस्टम के इस 'गुप्त' खेल और ढाई लाख पेंडिंग आवेदकों की पूरी रोंगटे खड़े कर देने वाली रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी इस योजना के सच से हमेशा अनजान रह जाएंगे।
रांची, 7 जनवरी 2026 – झारखंड सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी 'मंईयां सम्मान योजना' अब विवादों के घेरे में है। जिस योजना को महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का 'ब्रह्मास्त्र' बताया गया था, वह अब लाखों लाभार्थियों के लिए चिंता का सबब बन गई है। चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं कि पोर्टल से हर महीने हजारों महिलाओं के नाम हटाए जा रहे हैं, लेकिन नए नाम जोड़ने का रास्ता पूरी तरह बंद कर दिया गया है। राज्यभर की करीब ढाई लाख पात्र महिलाएं अब भी कतार में हैं, लेकिन 'पोर्टल खराब' होने का बहाना बनाकर उनके भविष्य पर ताला लगा दिया गया है।
आंकड़ों का खौफनाक सच: हर महीने कट रहे हैं 20 हजार नाम
सरकारी सिस्टम की समीक्षा में एक अजीबोगरीब पैटर्न देखने को मिल रहा है। योजना के नियमों के अनुसार 18 से 50 वर्ष की महिलाएं ही इसकी पात्र हैं।
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स्वतः डिलीट हो रहे नाम: जैसे ही किसी महिला की उम्र 50 वर्ष पूरी होती है, पोर्टल से उनका नाम ऑटोमेटिक हट जाता है।
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भारी कटौती: बीते 11 महीनों में उम्र पूरी होने के आधार पर 1,33,776 महिलाओं को योजना से बाहर कर दिया गया है। हर महीने औसतन 8 हजार से लेकर 20 हजार तक नाम काटे जा रहे हैं।
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एंट्री बंद, एग्जिट चालू: विडंबना यह है कि जो युवतियां अब 18 वर्ष की पात्रता पूरी कर रही हैं, उन्हें सिस्टम में जगह ही नहीं मिल रही है।
पोर्टल की खराबी या अघोषित रोक? ढाई लाख आवेदन अधर में
'सरकार आपके द्वार' जैसे बड़े कार्यक्रमों का आयोजन तो हुआ, लेकिन वहां भी मंईयां सम्मान योजना का पोर्टल बंद ही रहा।
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पोर्टल का बहाना: स्थानीय अधिकारी तकनीकी खराबी का हवाला दे रहे हैं, लेकिन जानकारों का मानना है कि बजट के बढ़ते बोझ को देखते हुए नए लाभुकों को जोड़ने पर 'अघोषित रोक' लगा दी गई है।
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ढाई लाख का पेंडिंग लिस्ट: राज्यभर में करीब 2.5 लाख नई महिलाओं ने आवेदन कर रखा है, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी उन्हें पोर्टल पर जगह नहीं मिली।
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सिर्फ बाहर का रास्ता: लाभार्थियों का कहना है कि सरकार के पास नाम काटने के लिए तो हाई-टेक सिस्टम है, लेकिन नया नाम जोड़ने के वक्त सर्वर डाउन हो जाता है।
मंईयां सम्मान योजना: मौजूदा स्थिति (Scheme Status 2026)
| विवरण | आंकड़े (Statistics) |
| 11 माह में कटे नाम | 1,33,776 (सिर्फ उम्र के कारण) |
| लंबित नए आवेदन | 2,50,000+ (लगभग) |
| मासिक कटौती | 8,000 से 20,000 नाम |
| पात्रता श्रेणी | 18 से 50 वर्ष |
| पोर्टल की स्थिति | नए रजिस्ट्रेशन के लिए 'बंद' |
इतिहास और वादे: वोट के लिए योजना या असली मदद?
झारखंड की राजनीति में 'मंईयां सम्मान योजना' का उदय एक बड़े चुनावी वादे के रूप में हुआ था। ऐतिहासिक रूप से देखें तो झारखंड में महिलाओं के लिए इतनी बड़ी प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) योजना पहले कभी नहीं आई थी। इसकी तुलना पड़ोसी राज्यों की 'लाड़ली बहना' जैसी योजनाओं से की गई। शुरुआत में जिस तेजी से करोड़ों महिलाओं को जोड़ा गया, उसने एक रिकॉर्ड बनाया था। लेकिन अब, 2026 की शुरुआत होते-होते, सिस्टम की सुस्ती ने पुराने वादों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। जानकारों का कहना है कि चुनावी लाभ लेने के बाद अब धीरे-धीरे लाभार्थियों की संख्या कम करना सरकारी रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
महिलाओं में भारी नाराजगी: सशक्तिकरण पर सवाल
योजना से बाहर हुई महिलाओं और नई पात्र युवतियों में गहरा गुस्सा है।
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भ्रम की स्थिति: सरकार की तरफ से कोई स्पष्टीकरण नहीं आने के कारण महिलाएं असमंजस में हैं कि क्या यह योजना केवल कुछ समय के लिए थी?
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आर्थिक चोट: कई गरीब परिवारों के लिए यह 1000 रुपये की राशि दवा और दूध के खर्च का सहारा थी, जिसका अचानक बंद होना उन्हें संकट में डाल रहा है।
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तकनीकी छल: 'डिजिटल इंडिया' के दौर में एक योजना का पोर्टल महीनों तक बंद रहना प्रशासनिक विफलता की ओर इशारा करता है।
सम्मान या केवल राजनीति?
मंईयां सम्मान योजना का मौजूदा संकट यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या यह वास्तव में महिलाओं की मदद के लिए है या केवल सरकारी खजाने को संतुलित करने का एक तरीका। अगर 1.33 लाख नाम काट दिए गए हैं, तो उन ढाई लाख महिलाओं का क्या दोष है जो अपनी बारी का इंतजार कर रही हैं?
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