Adityapur Raid: आदित्यपुर में तंत्र-मंत्र के लिए मासूम का अपहरण, पड़ोसी के घर में मिला बंधक, भाटिया बस्ती में भारी बवाल
आदित्यपुर की भाटिया बस्ती में एक पड़ोसी के घर से गायब बच्चा सकुशल बरामद हुआ है। स्थानीय लोगों ने तंत्र-मंत्र की आशंका जताते हुए आरोपी परिवार को 24 घंटे में बस्ती खाली करने का अल्टीमेटम दिया है। सरायकेला के इस सनसनीखेज मामले और मौके पर व्याप्त तनाव की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।
आदित्यपुर/सरायकेला, 20 मार्च 2026 – झारखंड के औद्योगिक क्षेत्र आदित्यपुर स्थित भाटिया बस्ती में शुक्रवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक मासूम बच्चे के अपहरण और उसे तंत्र-मंत्र के लिए बंधक बनाए जाने की खबर आग की तरह फैल गई। गायब बच्चे को उसके ही पड़ोसी रंजीत मंडल के घर से स्थानीय लोगों ने कड़ी मशक्कत के बाद छुड़ाया। इस घटना ने पूरे इलाके में आक्रोश पैदा कर दिया है। घर के भीतर मिले पूजा के सामान और मूर्तियों ने 'नरबलि' या किसी गुप्त साधना के संदेह को गहरा कर दिया है। फिलहाल बस्ती में तनाव चरम पर है और उग्र भीड़ ने आरोपी परिवार को इलाका छोड़ने की चेतावनी दी है।
दरवाजा टूटा और मिला मासूम: रोंगटे खड़े कर देने वाला खुलासा
भाटिया बस्ती में रहने वाला एक बच्चा अचानक अपने घर के बाहर से गायब हो गया था। परिजनों की खोजबीन के बीच शक की सुई पड़ोसी रंजीत मंडल के बंद घर पर रुकी।
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बचाव अभियान: जब पड़ोसी ने दरवाजा खोलने से इनकार किया, तो स्थानीय लोगों ने हिम्मत दिखाई और जबरन घर में प्रवेश किया। घर के भीतर एक कमरे में बच्चे को डरी-सहमी हालत में बंधक बनाकर रखा गया था।
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तंत्र-मंत्र का संदेह: लोगों की नजर जैसे ही घर के पूजा स्थल पर पड़ी, सबके होश उड़ गए। वहां दक्षिण दिशा की ओर मुख किए हुए माँ काली की मिट्टी की एक नई मूर्ति स्थापित थी, जिसके आसपास संदिग्ध पूजा सामग्री बिखरी हुई थी।
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अल्टीमेटम: आक्रोशित बस्ती वासियों ने इसे सीधे तौर पर तंत्र-मंत्र की साधना से जोड़ते हुए आरोपी परिवार को 24 घंटे के भीतर घर खाली करने का अल्टीमेटम दे दिया है।
आदित्यपुर का 'भाटिया बस्ती' और अंधविश्वास का ऐतिहासिक साया
सरायकेला-खरसावां जिले का आदित्यपुर इलाका अपनी फैक्ट्रियों के लिए मशहूर है, लेकिन इसके भीतर बसी भाटिया बस्ती जैसे रिहायशी इलाकों का अपना एक अलग सामाजिक इतिहास रहा है।
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बस्ती का उद्भव: भाटिया बस्ती दशकों पुरानी है, जहाँ मजदूर और मध्यम वर्गीय परिवार बसते आए हैं। यहाँ की गलियां ऐतिहासिक रूप से घनी और आपस में जुड़ी हुई हैं, जहाँ पड़ोसियों के बीच गहरा मेल-जोल रहता है। लेकिन इसी जुड़ाव के बीच 'अंधविश्वास' की जड़ें भी इतिहास में कहीं न कहीं दबी रही हैं।
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तंत्र-विद्या और कोल्हान का इतिहास: कोल्हान और सरायकेला का क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से अपनी 'छऊ' कला के साथ-साथ 'तांत्रिक परंपराओं' के लिए भी चर्चा में रहा है। 1990 के दशक के पुलिस रिकॉर्ड्स बताते हैं कि इस बेल्ट में 'डायन बिसाही' और 'गुप्त साधना' के नाम पर कई हिंसक घटनाएं हुई हैं। हालांकि आधुनिकता आई, लेकिन भाटिया बस्ती जैसी घनी बस्तियों में आज भी शिक्षा के अभाव में ऐसी कुरीतियां सिर उठा रही हैं।
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प्रशासनिक विफलता का इतिहास: पहले भी आदित्यपुर क्षेत्र में बच्चा चोरी की अफवाहों पर हिंसक भीड़ (मॉब लिंचिंग) का इतिहास रहा है। 2017 की 'राजहंस' वाली घटनाएं आज भी लोगों के जेहन में ताजा हैं। रंजीत मंडल के घर से बच्चे का मिलना उसी ऐतिहासिक डर को दोबारा जिंदा कर रहा है कि क्या आज भी सभ्य समाज के बीच 'अघोरी' मानसिकता वाले लोग छिपे हुए हैं?
तनावपूर्ण स्थिति: पुलिस से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
घटना के बाद से ही भाटिया बस्ती में भारी पुलिस बल की तैनाती की मांग की जा रही है।
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सुरक्षा की चिंता: स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते दरवाजा नहीं खुलवाया जाता, तो मासूम के साथ कोई बड़ी अनहोनी हो सकती थी।
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कानूनी कार्रवाई: पीड़ित परिवार और बस्ती के लोगों ने आदित्यपुर थाना पुलिस से रंजीत मंडल और उसके परिवार के खिलाफ सख्त धाराओं में मामला दर्ज करने की मांग की है।
आदित्यपुर की यह घटना विज्ञान और विकास के युग में अंधविश्वास के गहरे अंधेरे को दर्शाती है। एक बच्चे का सुरक्षित मिल जाना राहत की बात है, लेकिन आरोपी परिवार को मिला 24 घंटे का अल्टीमेटम किसी बड़ी कानून-व्यवस्था की समस्या को जन्म दे सकता है। क्या प्रशासन समय रहते इस 'टेंट्रम' को शांत कर पाएगा? क्या रंजीत मंडल के घर मिली काली प्रतिमा केवल आस्था का विषय थी या इसके पीछे वास्तव में कोई खौफनाक तांत्रिक साजिश थी?
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