MGM Suicide : जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल की चौथी मंजिल से कूदा मरीज, एचआईवी और टीबी से था पीड़ित, दर्दनाक मौत
जमशेदपुर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज अस्पताल (डिम्ना) में एक गंभीर बीमार मरीज ने चौथी मंजिल की खिड़की से कूदकर अपनी जान दे दी है। टीबी और एचआईवी संक्रमण से जूझ रहे इस युवक के आत्मघाती कदम और अस्पताल की सुरक्षा पर उठे बड़े सवालों की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।
जमशेदपुर/मानगो, 20 मार्च 2026 – लौहनगरी के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज अस्पताल, डिम्ना में शुक्रवार की सुबह एक दिल दहला देने वाली घटना घटी। मेडिसिन विभाग के वार्ड नंबर 419 में भर्ती एक 30 वर्षीय मरीज ने अस्पताल की चौथी मंजिल की खिड़की से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना सुबह करीब 4 से 5 बजे के बीच की है, जब पूरा अस्पताल सो रहा था। मरीज टीबी, फेफड़ों की बीमारी और हाल ही में पता चले एचआईवी (HIV) संक्रमण के कारण गहरे मानसिक तनाव में था। इस घटना ने एमजीएम अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और गंभीर मरीजों की काउंसलिंग पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
मां से कहा 'शौच जाना है' और फिर... खौफनाक अंत
मृतक पिछले तीन दिनों से एमजीएम के मेडिसिन विभाग के पार्ट-1 में उपचाराधीन था। उसकी मां रात भर उसके सिराहने बैठी रही, लेकिन उसे क्या पता था कि उसका बेटा मौत की तैयारी कर रहा है।
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धोखे से उठा: सुबह करीब 4:30 बजे उसने अपनी मां को जगाया और कहा कि उसे शौच के लिए जाना है। जैसे ही मां ने उसे सहारा देकर उठाया, वह बाहर की ओर निकला।
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खिड़की से मौत की छलांग: वार्ड से बाहर निकलते ही उसने चौथी मंजिल की खिड़की चुनी और नीचे छलांग लगा दी। कुछ ही सेकंड में एक जोरदार आवाज हुई।
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इमरजेंसी में तोड़ा दम: आवाज सुनकर जब मां और सिक्योरिटी गार्ड नीचे दौड़े, तो युवक खून से लथपथ जमीन पर पड़ा था। उसे तुरंत उठाकर इमरजेंसी ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
बीमारियों का घातक जाल: टीबी, एचआईवी और नशा
मृतक की मेडिकल हिस्ट्री उसकी मानसिक स्थिति को बयां करती है।
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4 साल का संघर्ष: वह पिछले 4 वर्षों से टीबी और फेफड़ों की गंभीर समस्या से जूझ रहा था।
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एचआईवी का खुलासा: तीन दिन पहले सदर अस्पताल में जांच के दौरान वह एचआईवी संक्रमित पाया गया था, जिसके बाद उसे एमजीएम रेफर किया गया।
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नशे की लत: परिजनों के अनुसार, वह नशे का भी आदी था, जिसने उसकी शारीरिक और मानसिक स्थिति को और ज्यादा कमजोर कर दिया था। बीमारी और सामाजिक कलंक (Stigma) के डर ने उसे आत्महत्या के लिए उकसाया।
एमजीएम अस्पताल और 'डिम्ना कैंपस' की सुरक्षा का ऐतिहासिक विवाद
जमशेदपुर के मानगो-डिम्ना रोड पर स्थित एमजीएम मेडिकल कॉलेज का यह नया कैंपस अत्याधुनिक सुविधाओं के वादे के साथ बनाया गया था, लेकिन इसका इतिहास सुरक्षा चूक की घटनाओं से भरा रहा है।
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साकची से डिम्ना तक का सफर: एमजीएम का मुख्य अस्पताल पहले साकची में था, जहाँ जगह की कमी और पुरानी इमारतों के कारण मरीज अक्सर परेशान रहते थे। डिम्ना स्थित इस नई बहुमंजिला इमारत के बनने के बाद उम्मीद थी कि यहाँ सुरक्षा के कड़े इंतजाम होंगे। लेकिन ऐतिहासिक रूप से, जमशेदपुर के सरकारी अस्पतालों में 'पेशेंट सुसाइड' की घटनाएं पहले भी रिकॉर्ड की गई हैं।
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खिड़कियों का डिजाइन और लापरवाही: 2010 और 2018 के दौरान साकची स्थित पुराने एमजीएम परिसर में भी मरीजों के छत से कूदने के मामले सामने आए थे। इतिहास गवाह है कि बार-बार मांग के बावजूद अस्पताल की ऊंची मंजिलों की खिड़कियों पर 'ग्रिल' या सुरक्षा जाली नहीं लगाई गई।
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एचआईवी मरीजों के प्रति ऐतिहासिक उपेक्षा: झारखंड के स्वास्थ्य इतिहास में एचआईवी मरीजों के लिए 'काउंसलिंग' का अभाव हमेशा से एक बड़ा मुद्दा रहा है। जब किसी मरीज को अपनी इस बीमारी का पता चलता है, तो वह अक्सर अवसाद में चला जाता है। एमजीएम जैसे बड़े संस्थान में भी 'साइकोलॉजिकल सपोर्ट' की कमी ऐतिहासिक रूप से खलती रही है, जिसका परिणाम आज इस युवक की मौत के रूप में सामने आया है। चौथी मंजिल से कूदने की यह घटना केवल एक आत्महत्या नहीं, बल्कि सिस्टम की उस विफलता की गवाह है जिसने एक बीमार इंसान को इतना अकेला कर दिया कि उसे मौत ज्यादा आसान लगी।
सुरक्षा पर सवाल: कहाँ थे गार्ड?
अस्पताल प्रशासन अब इस मामले की आंतरिक जांच की बात कर रहा है।
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वार्ड की निगरानी: क्या चौथी मंजिल के वार्डों में रात के समय गार्ड्स की तैनाती नहीं थी?
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ग्रिल का अभाव: ऊंची मंजिलों की खिड़कियां इतनी खुली क्यों छोड़ी गई हैं कि कोई भी आसानी से बाहर कूद सके?
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पोस्टमार्टम और जांच: पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और अस्वाभाविक मौत (U.D Case) का मामला दर्ज किया गया है।
एमजीएम अस्पताल की चौथी मंजिल से हुई यह मौत जमशेदपुर के स्वास्थ्य ढांचे के लिए एक बड़ा धक्का है। एक युवक जो अपनी जान बचाने की उम्मीद में अस्पताल आया था, वह वहां से कफन में लिपटकर बाहर निकला। टीबी और एचआईवी जैसी बीमारियां जानलेवा हो सकती हैं, लेकिन मानसिक अवसाद और अस्पताल की ढीली सुरक्षा व्यवस्था ने आज एक जिंदगी पहले ही छीन ली। क्या अब प्रशासन जागेगा और अस्पताल की खिड़कियों पर मजबूत ग्रिल लगवाएगा?
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