Saranda IED Blast: सारंडा में आईईडी विस्फोट, 16 वर्षीय किशोरी की मौत, 2 महिलाएं गंभीर घायल, नक्सलियों ने जंगल में क्यों बिछाया था जाल?
पश्चिम सिंहभूम के सारंडा में बड़ा नक्सली हमला! कोलबंगा क्षेत्र में IED विस्फोट में 16 वर्षीय फूलो घनवार की मौत, 2 ग्रामीण महिलाएं गंभीर घायल। पत्ता चुनकर लौट रहे थे 15-20 ग्रामीण, लेबरागढ़ा जंगल में दहशत।
चक्रधरपुर, 28 नवंबर 2025 – झारखंड (Jharkhand) का सुदूरवर्ती (Remote) और नक्सल (Naxal) प्रभावित (Affected) सारंडा (Saranda) क्षेत्र शुक्रवार (Friday) को एक बार फिर खून (Blood) और दहशत (Terror) का गवाह (Witness) बना। पश्चिम सिंहभूम (West Singhbum) जिले के कोलबंगा (Kolbanga) क्षेत्र में दोपहर (Afternoon) हुए आईईडी (IED - Improvised Explosive Device) विस्फोट (Blast) ने मासूम (Innocent) ग्रामीणों (Villagers) को निशाना (Target) बनाया। इस भीषण हादसे (Terrible Accident) में एक 16 वर्षीय किशोरी (Teenager) की मौके पर ही (On the Spot) दर्दनाक (Painful) मौत (Death) हो गई, जबकि दो अन्य महिलाएं गंभीर रूप से घायल (Seriously Injured) हो गईं। इस घटना ने एक बार फिर सारंडा के जंगलों (Forests) में नक्सली खतरे (Naxalite Threat) की गंभीरता (Seriousness) को उजागर (Exposed) किया है।
पत्ता चुनकर लौट रहे थे 15 से 20 ग्रामीण, फिर भीषण विस्फोट
पुलिस ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि यह विस्फोट लेबरागढ़ा (Labragarha) जंगल क्षेत्र में उस समय हुआ, जब 15 से 20 ग्रामीणों का समूह (Group) जंगल से पत्ता (Leaves) चुनने के बाद वापस (Returning) अपने गांव की ओर लौट रहा था। आईईडी (IED) आमतौर पर नक्सलियों द्वारा सुरक्षाबलों (Security Forces) को निशाना बनाने के लिए बिछाया जाता है, लेकिन अक्सर ग्रामीण ही इसकी चपेट (Clutches) में आ जाते हैं।
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मृतक और घायल: विस्फोट में फूलो घनवार (Phulo Ghanwar) (16 वर्ष) की मौत हो गई। वहीं, कोलबोगा निवासी बिरसी घनवार (Birsi Ghanwar) (35 वर्ष) और सालिमी घनवार (Salimi Ghanwar) (30 वर्ष) गंभीर रूप से घायल हो गईं।
स्थानीय लोगों की मदद से इलाज के लिए पहुंचे घायल
विस्फोट के बाद जंगल में चीख-पुकार (Screams) मच गई। बाकी ग्रामीणों ने जल्दबाजी (Haste) और हिम्मत (Courage) के साथ घायल महिलाओं को संभाला। स्थानीय लोगों की मदद से ही घायलों को तुरंत मनोहरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (Manoharpur Community Health Center) पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज (Treatment) चल रहा है।
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दहशत का माहौल: इस घटना से पूरे कोलबंगा और आस-पास के इलाकों में गहरी दहशत (Deep Fear) का माहौल पैदा हो गया है। ग्रामीण असुरक्षा (Insecurity) महसूस कर रहे हैं क्योंकि जंगल उनकी रोजी-रोटी (Livelihood) का एकमात्र साधन (Only Means) है।
पुलिस और सुरक्षाबल मौके पर, घेराबंदी कर जांच शुरू
विस्फोट की सूचना मिलते ही पुलिस (Police) और सुरक्षाबल (Security Forces) तुरंत लेबरागढ़ा जंगल क्षेत्र पहुंचे। उन्होंने पूरे इलाके की घेराबंदी (Cordoned Off) कर दी है और विस्फोट के स्रोत (Source) तथा नक्सलियों के ठिकानों (Hideouts) का पता लगाने के लिए गहन जांच (Intensive Investigation) शुरू कर दी है।
यह घटना सारंडा के इतिहास (History) में एक और दुखद अध्याय (Tragic Chapter) जोड़ती है, जहां वर्षों से नक्सली गतिविधियों (Naxalite Activities) के कारण विकास (Development) बाधित (Hindered) हुआ है और मासूम लोगों की जान जाती रही है। सुरक्षाबलों को यह पता लगाना होगा कि आखिर यह आईईडी विस्फोट किस उद्देश्य (Motive) से किया गया था और क्या यह किसी बड़ी योजना (Bigger Plan) का हिस्सा था।
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