Palamu Rescue: 10 साल बाद कब्र से लौट आया मुर्दा! कोलकाता के बॉर्डर पर मिला पलामू का मंदीस, खाकी ने ऐसे मुकम्मल कराई मां की ममता
पलामू पुलिस ने 10 साल से लापता मंदीस परहिया को कोलकाता के बांग्लादेश बॉर्डर से ढूंढ निकाला है। एक पिता की 18 दिसंबर की गुहार और पुलिस की उस सीक्रेट टीम की पूरी कहानी यहाँ मौजूद है वरना आप झारखंड पुलिस का यह सबसे बड़ा 'इमोशनल रेस्क्यू' मिस कर देंगे।
पलामू/छत्तरपुर, 24 फरवरी 2026 – इसे चमत्कार कहें या पलामू पुलिस की अटूट कर्तव्यनिष्ठा, लेकिन झारखंड के काला पहाड़ गांव की मिट्टी में आज खुशियों का सैलाब उमड़ पड़ा है। जिस बेटे की तस्वीर धुंधली पड़ चुकी थी और जिसकी वापसी की उम्मीद परिवार लगभग छोड़ चुका था, वह मंदीस परहिया आज 10 साल के लंबे वनवास के बाद सुरक्षित घर लौट आया है। कोलकाता के साउथ 24 परगना के सुदूर इलाकों, जो बांग्लादेश बॉर्डर के बेहद करीब हैं, वहां से मंदीस को बरामद करना किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं था। पलामू पुलिस की इस संवेदनशीलता ने आज साबित कर दिया कि खाकी केवल डंडा चलाने के लिए नहीं, बल्कि आंसू पोंछने के लिए भी होती है।
2016 की वो विदाई और 10 साल का सन्नाटा
कहानी शुरू होती है एक दशक पहले, जब गरीबी और रोजगार की तलाश मंदीस को अपने गांव काला पहाड़ (छत्तरपुर) से कोसों दूर ले गई थी।
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लापता बेटा: रोजगार की तलाश में घर से निकला मंदीस फिर कभी वापस नहीं आया। 10 सालों तक न कोई फोन आया, न कोई खबर।
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पिता की आखिरी उम्मीद: 18 दिसंबर 2025 को पिता मंगल परहिया ने अपनी हिम्मत जुटाई और पलामू एसपी के सामने अपनी व्यथा रखी। उन्हें डर था कि शायद उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन पुलिस के आश्वासन ने उनकी उम्मीद को जिंदा कर दिया।
ऑपरेशन 'घर वापसी': कोलकाता के बॉर्डर पर पुलिस की दबिश
पलामू एसपी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत एक विशेष टीम (SIT) का गठन किया।
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तकनीकी सुराग: पुलिस ने जब मंदीस के पुराने संपर्कों और तकनीकी इनपुट्स को खंगाला, तो एक लोकेशन कोलकाता के पास साउथ 24 परगना में ट्रेस हुई।
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बांग्लादेश बॉर्डर का इलाका: यह क्षेत्र भौगोलिक रूप से काफी कठिन और संवेदनशील है। छत्तरपुर थाना प्रभारी प्रशांत प्रसाद के नेतृत्व में टीम वहां पहुँची और स्थानीय पुलिस के सहयोग से मंदीस को ढूंढ निकाला।
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सकुशल वापसी: कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद जब मंदीस को पलामू लाया गया, तो गांव का नजारा देखने लायक था।
पलामू पुलिस रेस्क्यू: मिशन की मुख्य कड़ियां (Rescue Snapshots)
| विवरण | प्रमुख जानकारी (Key Facts) |
| लापता युवक | मंदीस परहिया (पिता- मंगल परहिया) |
| लापता अवधि | 10 वर्ष (2016 से 2026) |
| बरामदगी स्थल | साउथ 24 परगना, कोलकाता (बॉर्डर क्षेत्र) |
| विशेष टीम के नायक | अवध कुमार यादव (SDPO), प्रशांत प्रसाद (थाना प्रभारी) |
| सफलता का मंत्र | तकनीकी विश्लेषण और मानवीय सूचना तंत्र |
परिवार की आँखों में खुशी के आँसू: पुलिस को दिया धन्यवाद
जब मंदीस अपनी चौखट पर पहुँचा, तो पिता मंगल परहिया की आँखों से आँसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।
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पुलिस का आभार: परिवार ने कहा कि उन्हें यकीन नहीं था कि पुलिस इतनी पुरानी फाइल को इतनी संजीदगी से लेगी।
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SIT की सराहना: अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी अवध कुमार यादव और अनुसंधानकर्ता धर्मवीर कुमार यादव की टीम को आज गांव का हर शख्स सलाम कर रहा है।
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एक नई शुरुआत: मंदीस अब अपने परिवार के साथ रहकर गांव में ही काम करने की योजना बना रहा है।
सुशासन का मानवीय चेहरा
पलामू पुलिस की यह उपलब्धि हमें सिखाती है कि कानून और तकनीक का सही इस्तेमाल किसी के उजड़े हुए संसार को फिर से बसा सकता है। मंदीस का घर लौटना पलामू के उन सैकड़ों परिवारों के लिए उम्मीद की एक नई किरण है, जिनके अपने आज भी लापता हैं।
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