Deoghar Murder : देवघर में युवक की सिर कटी लाश मिलने से सनसनी, सड़क पर आगजनी और भारी बवाल
देवघर के रिखिया में दो दिनों से लापता दिलीप तुरी का बिना सिर का शव मिलने से हड़कंप मच गया है। उग्र ग्रामीणों ने वैद्यनाथपुर चौक पर शव रखकर जाम लगा दिया और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की। पुलिस की जांच और इलाके में बढ़ते तनाव की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।
देवघर/झारखंड, 17 मार्च 2026 – बाबा नगरी देवघर के रिखिया थाना क्षेत्र में मंगलवार को एक ऐसी नृशंस वारदात सामने आई जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया। थाड़ी गांव के पास एक युवक का सिर कटा शव बरामद होने से पूरे जिले में सनसनी फैल गई है। मृतक की पहचान रिखिया निवासी दिलीप कुमार तुरी के रूप में हुई है, जो पिछले दो दिनों से रहस्यमय तरीके से लापता थे। इस जघन्य हत्याकांड ने न केवल पुलिसिया तंत्र को चुनौती दी है, बल्कि स्थानीय लोगों के सब्र का बांध भी तोड़ दिया है। पोस्टमार्टम के बाद जब शव परिजनों को मिला, तो गुस्सा फूट पड़ा और देवघर की सड़कें रणक्षेत्र में तब्दील हो गईं।
लाश मिली पर सिर गायब: कपड़ों से हुई शिनाख्त
दिलीप कुमार तुरी की गुमशुदगी के बाद परिवार वाले दर-दर भटक रहे थे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि उनका सामना ऐसी खौफनाक हकीकत से होगा।
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बेरहमी की इंतहा: हत्यारों ने न केवल दिलीप की जान ली, बल्कि साक्ष्य मिटाने या दहशत फैलाने के उद्देश्य से उनका सिर धड़ से अलग कर दिया।
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पहचान का संकट: थाड़ी गांव के पास जब पुलिस को बिना सिर का शव मिला, तो पहचान करना मुश्किल था। हालांकि, मौके पर पहुँचे परिजनों ने दिलीप के कपड़ों और शरीर की बनावट को देखकर भारी मन से उसकी पुष्टि की।
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जांच की शुरुआत: पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि दिलीप का सिर कहाँ है?
सड़क पर संग्राम: टायर जलाकर फूटा आक्रोश
जैसे ही पोस्टमार्टम के बाद दिलीप का शव परिजनों को सौंपा गया, रिखिया और आसपास के ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया।
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चक्का जाम: न्याय की मांग को लेकर उग्र भीड़ ने वैद्यनाथपुर चौक को चारों तरफ से घेर लिया। बीच सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया गया।
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आगजनी और नारेबाजी: प्रदर्शनकारियों ने बीच सड़क पर टायर जलाए और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसके चलते वैद्यनाथपुर चौक से लेकर बरमसिया चौक तक वाहनों की किलोमीटर लंबी कतारें लग गईं।
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ठप हुआ आवागमन: घंटों चले इस जाम के कारण राहगीरों और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा, लेकिन ग्रामीण आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग पर अड़े रहे।
देवघर की कानून-व्यवस्था और रिखिया क्षेत्र का अतीत
देवघर, जिसे 'सांस्कृतिक राजधानी' कहा जाता है, ऐतिहासिक रूप से शांति और आध्यात्म का केंद्र रहा है।
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रिखिया की विरासत: रिखिया का इलाका महान योगियों और रिखियापीठ जैसे आध्यात्मिक केंद्रों के लिए विश्व विख्यात है। यहाँ देश-विदेश से श्रद्धालु शांति की तलाश में आते हैं।
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अपराध का बदलता चेहरा: इतिहास गवाह है कि पिछले एक दशक में देवघर के बाहरी इलाकों (जैसे रिखिया और जसीडीह) में जमीनी विवाद और आपसी रंजिश के कारण हिंसक वारदातों में बढ़ोतरी हुई है। सिर काटकर हत्या करने जैसा क्रूर तरीका पहले झारखंड के सुदूर नक्सल प्रभावित इलाकों में देखा जाता था, लेकिन अब यह शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में 'वर्चस्व की लड़ाई' का हिस्सा बनता जा रहा है।
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पुराना पैटर्न: 2018 में भी देवघर के बाहरी इलाके में एक इसी तरह का 'ब्लाइंड मर्डर' हुआ था, जिसमें शव की पहचान छिपाने के लिए उसे क्षत-विक्षत किया गया था। आज की घटना याद दिलाती है कि रिखिया जैसे शांत क्षेत्र में भी अब अपराधियों का दुस्साहस चरम पर है।
पुलिस की चुनौती: हत्या की वजह अब भी रहस्य
मौके पर तैनात भारी पुलिस बल लोगों को समझाने और जाम खुलवाने की कोशिश में जुटा है।
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हत्या का कारण: पुलिस अभी तक यह पता नहीं लगा पाई है कि दिलीप की किसी से पुरानी दुश्मनी थी या यह किसी तांत्रिक अनुष्ठान या अन्य साजिश का हिस्सा है।
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छापेमारी: पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर अलग-अलग टीमें संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं। दिलीप के मोबाइल लोकेशन और आखिरी कॉल रिकॉर्ड्स खंगाले जा रहे हैं।
देवघर में हुई दिलीप तुरी की यह जघन्य हत्या प्रशासन के लिए एक बड़ा इम्तिहान है। एक युवक का सिर कटा शव मिलना समाज के गिरते स्तर और बढ़ते अपराध का प्रमाण है। जब तक पुलिस इस हत्याकांड के मास्टरमाइंड को बेनकाब नहीं करती, तब तक रिखिया की सड़कों पर उठा यह धुआं शांत नहीं होगा। क्या देवघर पुलिस 24 घंटे के भीतर इस खौफनाक पहेली को सुलझा पाएगी?
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